बाड़मेर में गोवंश पर आफत बना सूखा, अब तक हो चुकी हैं हजार मौतें

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/17 10:28

बाड़मेर: पाकिस्तान सरहद से सटा बाड़मेर जिला इन दिनों सूखे सन्नाटे के दौर से गुजर रहा है हालात ये हो गए हैं की हजारो की संख्या में इस सूखे की वजह से गोवंश दम तोड़ चुका है. तो वहीं दूसरी तरफ बाकी बचे गोवंश को बचाने के लिए पशुपालक अपने गहने गिरवी रखकर पशुधन को बचाने का जुगाड़ कर रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन ने कुछ गांवों को छोड़कर काफी जगह पशु शिविर नहीं खोले हैं जिसके चलते आए दिन दर्जनों की संख्या में मवेशी चारे पानी के अभाव में मौत के मुंह में समा रहे हैं. पेश है सरहदी गांव से फर्स्ट इण्डिया बाड़मेर संवाददाता पीके बृजवाल की ये ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट.... 

बाड़मेर में पानी का अकाल
कभी काले पानी के नाम से पहचान रखने वाले रेगिस्तानी बाड़मेर जिले को जब रिफाइनरी जैसे बड़े प्रोजेक्ट की सौगात मिली तो मानो यंहा की आमजनता को लगा की अब बाड़मेर जिले की तस्वीर ही बदल जाएगी. लेकिन ऐसा हुआ नही क्योंकि हर बार की तरह इस बार भी राम के रूठने के साथ साथ राज भी रूठ गया है. दरअसल 48 डिग्री के इस तापमान में जब पानी ही नसीब नही होगा तो वाजिब है कि अकाल का छाया ही देखने को मिलेगा. 

पशुधन ने तोड़ा दम
यहीं वजह है कि बाड़मेर जिले के कई इलाके इन दिनों भयंकर अकाल की चपेट में हैं और हालात ये हो गए हैं कि चारे पानी के अभाव में हजारो की संख्या में पशुधन दम तोड़ चुका है और टीवी स्क्रीन पर चल रही ये तस्वीरें खुद अकाल की भयावह स्थिति को बयां कर रही हैं. 

कर्जा लेकर पशुधन को बचाने की कोशिश
इतना ही नही हमारे संवाददाता ने पाकिस्तान से सटे बाड़मेर जिले के गडरारोड, जैसिंधर, दूदाबेरी, जायडू,देताणी सहित एक दर्जन से अधिक गांवो का दौरा कर इन हालातों को सरकार के सामने रखने का एक छोटा सा प्रयास किया है. यंहा के ग्रामीण बताते हैं कि पशुधन को बचाने के लिए अपने गहने बेचकर व साहुकारो से ब्याज पर पैसे लेकर पशुधन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन यहां के प्रशासनिक अधिकारियो की कुंभकर्णी नींद नही खुल रही है.

47 से ज्यादा तापमान
अकाल के हालात और ऊपर से 47 डिग्री से ज्यादा चढता पारा भूख और गर्मी के मारे मवेशी दम तोड़ रहे हैं. बाड़मेर जिले के सीमावर्ती गांव गडरारोड में ज्वेलर्स का काम करने वाले अर्जुनराम सोनी बताते हैं कि किसान लोग प्रतिदिन उनके पास आते हैं और गहने गिरवी रखकर पैसे ले जाते हैं ताकि इस भयंकर अकाल में पशुधन को बचा सकें. 

तो वहीं दूसरी तरफ अकाल को लेकर बाड़मेर के अतिरिक्त जिला कलेक्टर राकेश कुमार शर्मा बताते हैं कि सरकार की मंशा के अनुरूप 248 पशु शिविर कई ग्राम पंचायतों में संचालित हैं, इसके अलावा 412 चारा डिपो भी खोले गए हैं. जंहा अनुदानित दर पर पशुपालकों को चारा मिल रहा है.

साधु संतों ने निकाली शव यात्रा
बरहाल, पिछले अकाल की वजह से दम तोड़ रहे गोवंश को बचाने की मांग को लेकर साधु संतों ने बाड़मेर जिला कलेक्ट्रेट सहित शहर के मुख्य मार्गो से मृत गाय की शव यात्रा निकाल कर अपना विरोध भी दर्ज करवाया था लेकिन अभी तक गोवंश को बचाने के लिए सरकार और जिला प्रशासन की और से ठोस व्यवस्था नही हो पाई है.

बाड़मेर से पीके बृजवाल की रिपोर्ट

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