बारिश से प्रभावित होने वाले मैच में इस्तेमाल होता है 'डकवर्थ-लुईस-स्टर्न फॉर्मूला', जानें क्या है प्रक्रिया 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/19 07:00

जयपुर: विश्वकप 2019 में आज एक बार फिर बारिश के कारण मैच प्रभावित हुआ. आज का मैच न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका बीच खेला जा रहा है. बारिश के कारण यह मैच 49 ओवर का हो गया है. अभी तक विश्वकप में तीन मैचों में बारिश के दखल के कारण ओवर कम करने पड़े हैं, वहीं चार मैच रद्द करने पड़े. जो मैच बारिश या अन्य कारणों से प्रभावित होते हैं तो इस स्थिति में 'डकवर्थ-लुईस-स्टर्न फॉर्मूला' इस्तेमाल होता है. जानिए आखिर यह फॉर्मूला कैसे काम करता है और कैसे इसके अंतर्गत ओवर कम होते हैं.

डकवर्थ-लुइस की शुरुआत: 
डकवर्थ-लुइस मेथड की शुरुआत ब्रिटेन के दो स्टैटिस्टिशन फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुइस ने 1992 विश्वकप सेमीफाइनल (इंग्लैंड बनाम दक्षिण अफ्रीका) के बाद की थी. जब बारिश के कारण दक्षिण अफ्रीका को एक गेंद पर बाइस रनों का नामुमकिन लक्ष्य मिला. इस मैच में एमपीओ (MPO) यानी मोस्ट  प्रोडक्टिव ओवर मेथड का इस्तेमाल हुआ था. इस मेथड की खामी यह थी कि इसमें पहले बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को फायदा होता था. इस मैच के बाद उस समय के मशहूर बीबीसी रेडियो कमेंटेटर क्रिस्टोफर-मार्टिन जेंकिन्स ने कहा था कि क्रिकेट को एमपीओ (MPO) से बेहतर मेथड की आवश्यकता है. फ्रैंक डकवर्थ के मानें तो अगर डकवर्थ-लुइस मेथड 1992 विश्वकप में इस्तेमाल होता तो दक्षिण अफ्रीका को मैच टाई करने के लिए आखिरी गेंद पर 4 रन और जीतने के लिए 5 रनों की आवश्यकता होती. इस मेथड का इस्तेमाल पहली बार 1 जनवरी 1997 को ज़िम्बाब्वे बनाम इंग्लैंड के मैच में हुआ था, जिसमें ज़िम्बाब्वे 7 रनों से जीता था. 

डकवर्थ-लुइस का कैलकुलेशन: 
इस मेथड में टारगेट तय करना इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों टीम्स के रिसोर्सेज कितने बाकी है. रिसोर्सेज से हमारा मतलब "विकेट्स इन हैंड" और "ओवर्स रिमेनिंग" से है. डकवर्थ-लुइस में हमेशा कुछ ना कुछ बदलाव होते रहे हैं. 1996 से 2003 तक सिंगल पब्लिक रेफ्रेंस टेबल मेथड का इस्तेमाल होता था. यह मेथड काफी आसान और पारदर्शी था. हालांकि 1999 में टोनी लुइस ने इस मेथड में खामी पाई. उनके अनुसार अगर पहले बल्लेबाज़ी करने वाली टीम 350+ का स्कोर खड़ा करती थी, तो इसके फायदा लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को ही मिलता था. 

फॉर्मूले में हुए कई बदलाव:
2004 में प्रोफ़ेशनल एडिशन की शुरुआत हुई, जिसमें कैलकुलेशन टेबल को 350+ स्कोर के हिसाब से तैयार किया गया. जिसके कारण दूसरी बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को अनावश्यक फायदा ना मिले. हालांकि इस मेथड पर 2002 से काम करने शुरू कर दिया था डकवर्थ और लुइस ने. इसके बाद सिंगल पब्लिक रिफरेन्स टेबल का नाम स्टैण्डर्ड एडिशन रखा गया. 2009 में प्रोफेशनल एडिशन को टी-20 फॉर्मेट के हिसाब से ढ़ाला गया. 50 ओवर और 20 ओवर मैच में अलग-2 टेबल का इस्तेमाल होता है. 

बता दें कि 2015 में इस मेथड का नाम डकवर्थ-लुइस-स्टर्न रखा गया. क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी में डिपार्टमेंट ऑफ़ स्टेटिस्टिक्स के प्रोफेसर स्टीवन स्टर्न का नाम इस मेथड में जोड़ा गया. यह सभी कॅल्क्युलेशन्स के लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है. अगर यह कैलकुलेशन अगर कैलकुलेटर से करने बैठेंगे तो पूरा क्रिकेट मैच मिस कर देंगे.

इस बार विश्व में बारिश का असर:
पहली बार श्रीलंका बनाम अफ़ग़ानिस्तान के मैच में बारिश के कारण 41 ओवर का मैच खेला गया. दूसरी बार भारत बनाम पाकिस्तान के मैच जब पाकिस्तान ने 35 ओवर बल्लेबाज़ी कर 166/6 बनाये तभी बारिश के कारण मैच 40 ओवर का खेला गया. डकवर्थ-लुइस कैलकुलेशन के मुताबिक पाकिस्तान को 40 ओवर में 302 रनों का नामुमकिन लक्ष्य मिला. इसके अलावा चार मैच पूरी तरह रद्द हुए.

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