VIDEO: IGST के कारण निर्यातक ज्वैलर्स की हालत पतली, अटके 427 करोड़

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/05 01:06

जयपुर। कहते हैं हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, 1 जुलाई 2017 से देश में लागू हुए GST कानून के भी दो पहलू है। GST के कारण जहां आम लोगों के लिए कर की गणना सरल हुई, वहीं निर्यातक इसके कुछ प्रावधानों से आज तक परेशान है। GST कानून में IGST की वसूली होने के कारण देश के जौहरियों के अरबों रुपए अटके पड़े हैं। जिसे रिलीज होने की सूरत फिलहाल नजर नहीं आ रही। पेश है जाैहरियों पर IGST की मार को लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट:

देश में GST की शुरुआत के कारण इससे पूर्व देश भर में स्थानीय करों को लेकर चल रही प्रतिस्पद्र्धा समाप्त हो गई। करदाता को 17 तरह के कर व 23 तरह के सैस से झुटकारा मिला। देश में वन टेक्स, वन नेशन, वन मार्केट के रूप में जहां ग्राहकों व करदाताओं को राहत मिली। वहीं सरकार काे कम्प्यूटराइजेशन के कारण करचोरी पर नियंत्रण भी बढ़ा, लेकिन इसके बावजूद GST की शुरुआत से निर्यातक खुश नहीं। इसका कारण GST कानून में विदेश लेकर गए अपने ही माल को भारत वापस लाने की दशा में उस पर वसूला जा रहा IGST है। हैरानी की बात यह भी है कि एक जुलाई 2017 को GST की शुरुआत से लेकर अब तक GST कानून में अनेकों संशोधन हाे चुके हैं। ज्वैलरी उद्योग के लिए भी GST कानून में अनेक संशोधन किए जा चुके हैं, पर फिर भी IGST की मुसीबत से ज्वैलर्स को अभी तक छुटकारा नहीं मिला। 

यह है राष्ट्रीय स्तर पर ज्वैलर्स की ओर से चुकाया गया IGST:

समयावधि                                         चुकाया गया IGST 
अप्रेल 17 से मार्च 18                          237,95,84,928 रु.
अप्रेल 18 से फरवरी 19                      189,29,95,987 रु.
कुल IGST राशि                               427,25,80,915 रु. 

देश में ज्वैलर्स की सबसे बड़ी संस्था रत्न व आभूषण निर्यात परिषद अर्थात GJEPC भी इस मुद्दे पर सरकार के सामने कई बार गुहार लगा चुकी है, लेकिन सरकार ने इस मुद्दे पर जौहरियों को कोई राहत नहीं दी। नजीता यह निकला की एक जुलाई 2017 से फरवरी 2019 तक देश भर में जौहरियों के 427.25 करोड़ रुपए IGST क्रेडिट के रूप में अटक गए। 

GJEPC की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2019 तक जयपुर के जौहरियों की अटकी राशि 55.80 करोड़ रुपए है। IGST क्रेडिट के रूप में जौहरियों के खातों में तो यह राशि है, लेकिन इसका उपयोग वे नहीं कर पा रहे। इसका कारण यह है कि IGST की क्रेडिट का उपयोग घरेलू स्तर पर होने वाले GST भुगतान में किए जाने के प्रावधान तो हैं, लेकिन जौहरियों की घरेलू बाजारों में कारोबार ही काफी सीमित है। ज्वैलर्स का कहना है कि इसका असर यह हो रहा है कि ज्वैलर्स अब अपने साथ अधिक माल लेकर ही विदेश नहीं जा रहे। जिसका सीधा असर उनके कारोबार पर पड़ रहा है। उधर कर सलाहकारों का कहना है कि GST व्यवस्था के बाद निर्यात की वापसी को कर मुक्त रखें जाने के प्रावधान ही नहीं है। इसमें निर्यातक को माल निर्यात करते समय छूट का जो प्रावधान देती है, उसका रिफण्ड तो समय पर नहीं मिल पाता, लेकिन यदि वहीं माल वापस भारत आए तो निर्यातक को तत्काल IGST चुकाना पड़ रहा है। इससे निर्यातक काफी परेशान है। 

जयपुर के ज्वैलर्स की ओर से चुकाया गया IGST:

समयावधि                                        चुकाया गया IGST 
अप्रेल 17 से मार्च 18                          40,97,02,423 रु.
अप्रेल 18 से फरवरी 19                      14,83,05,587 रु.
कुल IGST राशि                               55,80,08,010 रु. 

विदेशी मुद्रा कमाने के लिए पूरे विश्व में हर देश अपने देश के निर्यात में बढ़ोतरी के लिए प्रयासरत है। भारत में भी निर्यातकों को हर संभव मदद के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन रि-इम्पोर्ट पर IGST के पेंच के कारण निर्यातकों की परेशानी दूर नहीं किए जाने का असर अब कारोबार पर हो रहा है। एग्जिब्यूशन में जाने वाले ज्वैलर्स अब अपने साथ सीमित मात्रा में माल लेकर जाने लगे हैं। इसका एक मात्र कारण रि-इम्पोर्ट पर वसूला जाने वाला IGST है। जिसका सीधा असर निर्यातक जौहरियों के कारोबार पर भी पड़ रहा है। हालांकि जौहरियों का कहना है कि इस समस्या का शीघ्र ही व्यवहारिक हल निकलेगा, लेकिन कब इसकी प्रतीक्षा सभी जौहरियों को है। 

... संवाददाता विमल कोठारी की रिपोर्ट 


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