अंधविश्वास के चलते कई मासूमों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/29 07:57

ब्यावर: विज्ञान के इस युग में आज भी अंधविश्वास के चलते कई मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है. पिछले कुछ माह में ब्यावर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के नाम पर मासूमों को दागने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. ऐसा ही एक मामला ब्यावर से सटे पाली जिला क्षेत्र के पचानपुरा गांव में फिर सामने आया. 

बिगड़ी मासूम की तबीयत:
दरअसल पचानपुरा गांव में एक सात माह की मासूम को परिजनों ने निमोनिया में सुधार नहीं होने पर एक कथित भोपी को दिखाया. महिला भोपी ने मां के सामने सात माह की दूधमुहीं मासूम को तीन बार दाग दिया. जिसके बाद भी स्थिति में सुधार तो नहीं हुआ उल्टा दागने से हुए इंफेक्शन से मासूम की तबीयत बिगड़ने लगी, जिस पर परिजनों ने मंगलवार देर रात राजकीय अमृतकौर अस्पताल में भर्ती करवाया. 

बीड़ी पीते हुए दाग दिया तीन बार:
सबसे बड़ी बात यह है कि उक्त मामले में भी परिजन ना तो भोपी का नाम बता रहे हैं और ना ही उसके बारे में कोई और जानकारी. जानकारी के अनुसार रायपुर के पचानपुरा निवासी ढगलाराम की सात माह की पुत्री भावना को निमोनिया की शिकायत होने पर परिजनों ने उसे आस-पास में दिखाया. स्थिति में सुधार नहीं होने पर भावना की माता लीला उसे सोमवार को गांव से कुछ दूरी पर किसी महिला भोपी के पास ले गई. जहां भोपी ने मासूम भावना को उपचार के नाम पर बीड़ी पीते हुए ही एक बार नहीं तीन बार दाग दिया. दागने के कारण हुए दर्द और पीड़ा से जहां मासूम कराहते हुए रोने लगी, तो वहीं उसके पास ही बैठी उसकी मां लीला को उम्मीद बंधी की अब उसकी पुत्री की तबीयत में सुधार हो जाएगा, लेकिन मासूम की स्थिति सुधरने की बजाय और ज्यादा बिगड़ गई और परिजनों ने उसे मंगलवार को राजकीय अमृतकौर अस्पताल में भर्ती करवाया. 

सामने आ चुके आधा दर्जन से अधिक मामले: 
गौरतलब है कि पिछले छह माह में एकेएच में गर्म सरिए से दागने के आधा दर्जन से अधिक मामले सामने आ चुके हैं. अंधविश्वास से ग्रस्त लोग ये नहीं समझ पाते कि बीमारी से ग्रस्त मासूम को दागना मासूम के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एमएस चांदावत ने बताया कि निमोनिया से ग्रस्त मासूम को दागना जानलेवा हो सकता है. ऐसे में मासूमों का उपचार नहीं करवा कर बच्चे को दागने से सेप्टीसिमिया और तार से दागने से टिटनेस जैसे जानलेवा संक्रमण का भी खतरा बढ़ जाता है. किशोर अधिनियम 15 के तहत बच्चों पर इस तरह की क्रूरता करने पर कार्रवाई का प्रावधान है. इसमें तीन साल की सजा और एक लाख के जुर्माने का प्रावधान है. 

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in