चारे के अभाव में दम तोड़ रहे पशु, परेशान हो रहे पशुपालक

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/01 01:31

रामदेवरा (जैसलमेर)। इस बार के मानसून ने न सिर्फ किसानों बल्कि पशुपालकों को भी धोखा दे दिया,जिसके चलते किसानों के साथ अब पशुपालक भी पशुओं के चारे की कमी को लेकर भारी परेशानी उठा रहे है। कई पशुओं की चारे के अभाव में मौत तक हो चुकी है। बारिश की कमी से तहसील क्षेत्र में चारे के संकट को लेकर गौशालाओं के संचालक व पशुपालक काफी चिंतित है। 

इस बार सावन का महीना गुजरने के बाद भी बारिश का औसत पिछले वर्ष से काफी कम रहा है। ऐसे स्थिति में खेतों, पड़त भूमियों व वन क्षेत्रों में अभी तक पशुओं के लिए पर्याप्त चारा नहीं हुआ है। जिससे गौशालाओं में पल रहे हजारों गौवंश सहित जिले के अन्य पशुओं को चारा खिलाने में उनके संचालकों व मालिकों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। खेतों में हरा चारा नहीं होने से सूखे चारे की भी कमी खलने लगी है। वर्तमान में सूखे चारे का परिवहन अन्य प्रांतों व जिलों से हो रहा है। ऐसे में परिवहन खर्च भी अधिक आने से गरीब तबके के पशुपालकों एवं आर्थिक तंगी से जूझ रही गौशालाओं के संचालकों को बाहर से सूखा चारा मंगाने में काफी दिक्कतें हो रही है। पशुपालकों ने बताया कि, "सूखे चारे के भाव दोगुने हो गये है।" पशुपालक जुगताराम ने बताया कि, "प्रतिदिन एक पशु के लिए कम से कम 50-60 रुपए का चारा चाहिए। जिसके पास 25 पशु है, उन्हें चारा खरीदने के लिए सिर्फ एक माह में करीब 37 से 45 हजार रुपए की जरूरत होती है।"

चारे के भाव हुए दोगुने :

सावन महीने के पूर्व सूखे चारे की कीमत 300 से 350 रुपए प्रति क्विंटल ही थी, लेकिन कमजोर मानसून के चलते इसके भाव बढ़कर दोगुने हो गए। वर्तमान में ग्वार व वार का सूखा चारा 600 से 650 रुपए प्रति क्विंटल है। इसमें भी समय पर चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यही नहीं मध्यप्रदेश से आने वाले मसूर के सूखे चारे के दाम तो अब आसमान छूने लग गए है। पहले यह चारा 400 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बड़ी आसानी से मिल जाता था, लेकिन इस समय इसके भाव 700 से 750 रुपए प्रति क्विंटल हो गए है।

रामदेवरा से संवाददाता राजेन्द्र सोनी की खबर 

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