Durga Ashtami 2020: राजस्थान में यहां देवी ने खुद प्रकट होने की जताई थी इच्छा, आज भी हजारों लोगों को मिल रहा रोजगार

Durga Ashtami 2020: राजस्थान में यहां देवी ने खुद प्रकट होने की जताई थी इच्छा, आज भी हजारों लोगों को मिल रहा रोजगार

Durga Ashtami 2020: राजस्थान में यहां देवी ने खुद प्रकट होने की जताई थी इच्छा, आज भी हजारों लोगों को मिल रहा रोजगार

डीडवाना(नागौर): नवरात्र पर्व का आज अंतिम दिन है बीते नौ दिनों से आदि शक्ति के अलग अलग रूपों की पूजा कर देवी की आराधना कर नवरात्रि पर्व मनाया जा रहा है. नागौर जिले के डीडवाना स्थित नमक झील में बने महिषासुर मर्दिनी के ऐतिहासिक मंदिर में भी देवी मां की बीते नौ दिनों से भक्ति और आराधना चल रही है. डीडवाना के पाढ़ाय माता मंदिर के निर्माण और देवी के प्रकट होने को लेकर आज हम आपको बताएंगे कहानी...

देवी ने यहां खुद प्रकट होने की इच्छा जताई: 
आज से ठीक 1200 वर्ष पूर्व यहां जंगल और मैदान था और यहां एक केर का झाड़ था उसमें देवी मां आठ नौ साल की बच्ची के रूप में रहती थी. शहर के सेठ भैरवलाल सारड़ा की गाए चराने यहां एक ग्वाला गाये चराने आता था देवी मां यहां गायों का दूध पी जाती थी. जब सेठ को पता चला कि एक आठ नौ साल की बच्ची गायों का दूध पी जाती है तो खुद अपना घोड़ा लेकर देखने आए. और देवी स्वरूप बच्ची से संवाद किया तो देवी ने यहां प्रकट होने की इच्छा जताई. किवदंती है कि देवी ने कहा तुम जितनी दूर यहां से अपनी गाय और घोड़ा लेकर दौड़ोगे उतनी दूर में चांदी की खान बन जाएगी लेकिन पीछे मुड़कर मत देखना पीछे से केर से देवी गर्जना के साथ प्रकट हुई तो सेठ ने गर्जना सुनकर डर के मारे पीछे देखा कहा जाता है कि जंगल चांदी की खान में बदल गया.  सेठ ने देवी से प्राथना की कि देवी मां यहां चांदी के लिए दुनिया लड़ लड़ कर मर जाएगी और राजा मुझे जेल में डाल देंगे. सेठ ने कहा कि देवी मा यहां लाखों लोगों को रोजगार मिले ऐसा कोई काम कर दो तो देवी मां ने आशीर्वाद दिया कि कच्ची चांदी के रूप में यहां नमक की खाने बन जाएगी जो आज नमक झील के रूप में विधमान है और हजारों लोग यहां मजदूरी कर अपना पेट पालते हैं. 

गुर्जर प्रतिहार कालीन शैली का बना हुआ ऐतिहासिक मंदिर: 
यहां निर्मित मंदिर गुर्जर प्रतिहार कालीन शैली का बना हुआ ऐतिहासिक मंदिर है. जो पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित भी किया गया है. यह गुर्जर प्रतिहारों के शांतिकाल में बना हुआ मंदिर है मुख्य द्वार पर भगवान विष्णु की शयन मुद्रा में मूर्ति विराजित है. मंदिर के दक्षिण भाग में नृत्य गणेश की मूर्ति लगी हुई है. मंदिर परिक्रमा के पूर्व भाग में भगवान नटराज की नृत्य मुद्रा में विशाल प्रतिमा लगी हुई है. तो दक्षिण भाग में देवी माँ महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति लगी हुई है. मंदिर की मूर्तियां सब शांतिकाल और प्रसन्न मुद्रा की होने से यही कहा जाता है कि मंदिर शांतिकाल में बना हुआ है लेकिन औरंगजेब सहित कई आक्रांताओं ने यहां मन्दिर को तोड़ने का असफल प्रयास भी किया गया उसके निशान आज भी मंदिर की बाहरी मूर्तियों पर दिखाई देते है कई मूर्तियों को खंडित किया गया था. 

कोविड गाइडलाइन की पालना में आयोजन रद्द: 
मंदिर में सालभर में तरह तरह के आयोजन होते रहते हैं उनमें नवरात्र भी एक है. नवरात्र में यहां विशेष आयोजन होते रहते है. लेकिन इस बार कोविड की वजह से गाइडलाइन की पालना में आयोजन रद्द किए गए है. एक एक श्रद्धालु को ही अंदर दर्शन के लिए प्रवेश दिया जा रहा है.

...फर्स्ट इंडिया न्यूज के लिए डीडवाना (नागौर) से संवाददाता नरपत ज़ोया की रिपोर्ट

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