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आर्थिक सर्वेक्षण भारत के लिए 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने का ब्लूप्रिंट: सीईए सुब्रमण्यन

आर्थिक सर्वेक्षण भारत के लिए 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने का ब्लूप्रिंट: सीईए सुब्रमण्यन

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने आज आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश किया. देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) प्रोफेसर केवी सुब्रमण्यन ने यह आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 तैयार किया है. देश की अर्थव्यवस्था का आईना कहे जाने वाले इकोनॉमिक सर्वे में सरकार के सामने जीएसटी और किसानों के स्कीम में वित्तीय घाटा अहम चुनौती हैं. 

पांच जुलाई को आम बजट:
दरअसल हर साल बजट पेश करने से एक दिन पहले संसद में ऑर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला आम बजट पांच जुलाई यानी कल पेश होगा. नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में ये पहला आर्थिक सर्वे है. इससे पहले इस साल पेश किए गए अंतरिम बजट के दौरान आर्थिक समीक्षा पेश नहीं की गई थी. सर्वे पेश करने से पहले केवी सुब्रमण्यन ने कहा कि हमारी टीम ने मेहनत और लगन से काम किया है. उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण भारत के लिए 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने का ब्लूप्रिंट है.

आर्थिक सर्वे 2019 की बड़ी बातें:
—वित्त वर्ष 2020 में तेल की कीमतें कम होने का अनुमान
—जनवरी से मार्च के बीच चुनाव की अनिश्चितता के कारण मंदी
—देश की विकास दर वित्त वर्ष 2020 में 7 फीसदी रहने की उम्मीद है
—वित्त वर्ष 2020 में विकास दर बढ़ने की उम्मीद है
—इन्वेस्टमेंट रेट अपने निचले स्तर पर पहुंचे
—वित्त वर्ष 2019 में फिस्कल डेफिसिट 5.8 फीसदी रहने का अनुमान, वित्त वर्ष 2018 में 6.4 फीसदी था
—वित्तवर्ष 2020 में इन्वेस्टमेंट रेट बढ़ने की उम्मीद है
—एनबीएफसी संकट के कारण विकास दर में कमी आई
—एनपीए में गिरावट से कैपेक्स सायकल बढ़ने की उम्मीद
—पिछले 5 साल में GDP की दर औसत तौर पर 7.5 फीसदी रही
—खाने के सामानों की कीमत कम होने के कारण किसानों ने कम उत्पादन किया
—भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना आर्थिक सर्वे का मूल है
—विदेशी मुद्रा भंडार 2018-19 में 412.9 अरब डालर रहने का अनुमान
—वित्त वर्ष 2018-19 में आयात 15.4 प्रतिशत जबकि निर्यात में 12.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान
—एलपीजी सब्सिडी के लिए ‘गिव इट अप’ से ‘थिंक अबाउट द सब्सिडी’

मुख्य आर्थिक सलाहकार का कार्य:
बता दें कि मुख्य आर्थिक सलाहकार का प्रमुख काम विदेश व्यापार और औद्योगिक विकास के मुद्दों पर नीतिगत सलाह देना होता है. साथ ही औद्योगिक उत्पादन के रुखों का आकलन और अहम आर्थिक संकेतकों पर सांख्यिकी जानकारी जारी करना है. वह वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है. देश के पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार जे.जे. अंजरिया थे, वे वर्ष 1956 से वर्ष 1961 के बीच देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे. 

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जयपुर: उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा ने बताया है कि राज्य सरकार के उपक्रम रीको में विभिन्न श्रेणी के करीब 238 पदों को सीधी भर्ती से भरा जाएगा. उन्होंने सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरु करने के रीको की पत्रावली पर आदेश जारी कर दिए हैं. 

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युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह निर्णय लिया:
उद्योग मंत्री ने बताया कि रीको में उप प्रबंधक से अधीनस्थ सहायक श्रेणी तक के करीब 238 पद लंबें समय से रिक्त चल रहे हैं. उन्होंने बताया कि रीको में पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता व बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह निर्णय लिया गया है. 

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लंबे समय से रिक्त चल रहे ये पद: 
उन्होंने बताया कि रीको में उपमहाप्रबंधक आईटी/टेक के 8, उपप्रबंधक एचआरडी/जीएडी/इन्फ्रा के 2, प्रोगामर कम ऑपरेटर के 2, सहायक स्थल अभियंता सिविल के 43, सहायक लेखाधिकारी द्धितीय के 23, कनिष्ठ विधि अधिकारी के 12, कनिष्ठ अभियंता पॉवर के 3, कम्प्यूटर ऑपरेटर कम सीनियर असिसटेंट के 2, आशुलिपिक के 9, ड्राफ्ट्समैन कम ट्रेसर के 13, कनिष्ठ सहायक के 74, वाहन चालक प्रथम के 9 और अधीनस्थ सहायक के 38 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे थे. उन्होंने बताया कि इन सभी पदों की सीधी भर्ती की प्रक्रिया रीको द्वारा जल्दी ही शुरु करने के निर्देश दे दिए गए हैं. 

VIDEO: आयकर रिटर्न पर कोरोना ग्रहण! पिछले साल की तुलना में 66 फीसदी की कमी

जयपुर: कोरोना महामारी के चलते जब विश्वभर का अर्थतंत्र गड़बड़ाया हुआ है और देश में भी आर्थिक हालात मुश्किल भरे चल रहे हैं. इस बीच आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या में भी भारी कमी आई है. इन आंकड़ों ने केन्द्रीय एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि इस बार आयकर रिटर्न भरने की तिथि बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है. कोरोना काल में केन्द्र सरकार आर्थिक गतिविधियों को सुचारू बनाने के लिए जब 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज दे चुकी है. उद्याेगों और आमजन को राहत देने के लिए कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद सामान्य आर्थिक गतिविधियां पटरी पर नहीं लौट पा रही हैं. यह बात हाल ही सामने आए आयकर विवरणियों के आंकड़ों से साबित हो रही है.

काफी कम संख्या में आयकर रिटर्न प्राप्त:
इस वित्त वर्ष के शुरुआती चार माह में काफी कम संख्या में आयकर रिटर्न प्राप्त हुए हैं. राजस्थान में पिछले वर्षों में औसतन 40 लाख विवरणियां भरी जाती हैं. आयकर विवरणी भरे जाने की अंतिम तारीख 31 जुलाई होती है, लेकिन इस बार कोरोना के चलते चूंकि 2 माह तक सभी तरह की आर्थिक गतिविधियां बंद रही थीं. इसके बाद भी गतिविधियों को शुरू होने में लम्बा समय लगा. इस कारण आयकर विभाग ने विवरणी फाइल करने की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2020 कर दी है. इस वजह से भी तुलनात्मक रूप से कम संख्या में आयकर विवरणी भरी जा रही हैं. आयकर विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक राजस्थान में आयकर विवरणी भरे जाने के आंकड़ों में अक्टूबर माह में बढ़ोतरी हो सकती है.

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राजस्थान के आंकड़े:
वित्तीय वर्ष : आयकर विवरणी
2014-15 : 25.96 लाख
2015-16 : 31.18 लाख
2016-17 : 31.93 लाख
2017-18 : 37.45 लाख
2018-19 : 41.28 लाख (प्रोविजिनल)
2019-20 : 43.97 लाख (प्रोविजिनल)

- इस वित्त वर्ष में 31 जुलाई तक 6.01 लाख आयकर रिटर्न फाइल हुए
- जबकि पिछले साल इसी अवधि में 17.71 लाख आयकर रिटर्न भरे गए
- पिछले साल की तुलना में इस बार मात्र 33.93 फीसदी रिटर्न भरे गए

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आयकर रिटर्न की स्क्रूटनी का प्रतिशत है काफी कम:
आयकर विवरणी भरे जाने में तो कमी आई ही है, आयकर विभाग ने पिछले 2 वर्षों में प्राप्त आयकर विवरणियों की जांच स्क्रूटनी की संख्या में भी कमी की है. वर्ष 2017-18 में मात्र 0.13 प्रतिशत रिटर्न की ही स्क्रूटनी की थी. इस वित्त वर्ष में भरे जाने वाले आयकर रिटर्न में भी स्क्रूटनी में कमी आएगी. आयकर विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस वर्ष केन्द्र सरकार ने केन्द्रीय एजेंसियों को जांच-कार्रवाई करने से हतोत्साहित किया है. ऐसे में यह माना जा रहा है कि इस बार आयकर छापे और जांच प्रकरणों में भी कमी आएगी. हालांकि आयकर अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि अक्टूबर माह से आयकर रिटर्न फाइल होने की संख्या में अच्छी ग्रोथ हो सकती है.

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

देश की अर्थव्यवस्था अब सुधर रही, रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं

देश की अर्थव्यवस्था अब सुधर रही, रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं

नई दिल्ली: रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के निर्णयों का ऐलान कर दिया गया है. RBI ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. रेपो रेट 4% और रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर बरकरार है. ऐसे में साफ है कि आपको ईएमआई या लोन की ब्याज दरों पर नई राहत नहीं मिलेगी.

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कोरोना की मार के बाद देश की अर्थव्यवस्था अब सुधर रही:
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ग्लोबल इकनॉमी कमजोर है. लेकिन कोरोना की मार के बाद देश की अर्थव्यवस्था अब सुधर रही है. विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है. खुदरा महंगाई दर नियंत्रण में है. उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी ग्रोथ रेट निगेटिव रहेगी. जून में लगातार चौथे महीने भारत के व्यापार निर्यात में कमी आई. घरेलू मांग में कमी और अंतर्राष्ट्रीय क्रूड तेल के दामों में कमी की वजह से जून महीने में आयात में काफी कमी आई.

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कोरोना काल में आरबीआई के मौद्रिक नीति समीक्षा की तीसरी बैठक:  
कोरोना काल में आरबीआई के मौद्रिक नीति समीक्षा की तीसरी बैठक थी. बता दें कि कोरोना संकट की वजह से दो बार समय से पहले बैठक हो चुकी है. पहली बैठक मार्च में और उसके बाद मई, 2020 में दूसरी बैठक हुई. इन दोनों बैठकों में रिजर्व बैंक की रेपो रेट में कुल मिला कर 1.15 फीसदी की कटौती की. बीते साल यानी फरवरी, 2019 के बाद रेपो रेट में 2.50 फीसदी की कटौती हो चुकी है.


 

VIDEO: अनलॉक-3 में शराब की बिक्री बढ़ने की उम्मीद, 3 महीने में 2800 करोड़ की बिकी शराब, सरकार को मिला एक हजार करोड़ का राजस्व

जयपुर: राज्य सरकार ने जिस उम्मीद से लॉक डाउन में शराब की दुकान खोलने का जो साहसिक निर्णय लिया था करीब 3 महीने में ही यह निर्णय सरकार की उम्मीदों पर खरा उतरा है. इस 3 महीने की अवधि में प्रदेश में करीब 2800 करोड रुपए की शराब बिकी है, जिससे सरकार को करीब 1000 करोड रुपए आबकारी राजस्व के तौर पर मिला है. लॉक डॉन में शराब की दुकान खोलने को लेकर सरकार को आलोचना भी झेलनी पड़ी थी और शुरुआती 2 दिन में जिस तरह से लोग शराब खरीदने के लिए शराब के ठेकों पर टूटकर पड़े उससे भी एक बार सरकार के इस निर्णय को लेकर अलग अलग राय सामने आई थी.

भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा:
कोरोना संकट के चलते केंद्र और राज्य सरकार ने लॉक डाउन की घोषणा की थी इसके बाद प्रदेश में 23 अप्रैल को सभी शराब की दुकानों को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया गया था. लॉक डाउन की अवधि में केंद्र से अपेक्षित मदद न मिलने और राज्य के सभी आर्थिक संसाधन अवरुद्ध हो जाने से सरकार शराब की दुकान खोलने को लेकर पसोपेश में थी. इस दौरान मार्च के अंत में यानी 31 मार्च को वर्ष 2019-20 का आबकारी बंदोबस्त भी समाप्त हो चुका था. अचानक लॉक डाउन में शराब दुकान बंद होने से वित्त वर्ष के अंतिम 8 दिनों में पुराने अनुज्ञाधारियों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था.

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लाइसेंस फीस जमा कराने की भी थी बड़ी चुनौती:
सरकार के सामने चुनौती थी कि 1 अप्रैल से शुरू हुए नए वित्त वर्ष में कैसे नए आबकारी बंदोबस्त को लागू किया जाए. इस दौरान जो सबसे बड़ी समस्या थी वह यह थी कि पुराने अनुज्ञाधारियों से वित्तीय सेटलमेंट भी करना था और नए अनुज्ञाधारियों से लाइसेंस फीस जमा कराने की भी बड़ी चुनौती थी. दरअसल लॉक डाउन के चलते नए लाइसेंसी भी लाइसेंस फीस जमा कराने से कतरा रहे थे. ऐसे में वित्त विभाग के एसीएस निरंजन आर्य, एसएसआर डॉ पृथ्वी और तत्कालीन आबकारी आयुक्त बीसी मलिक ने अपनी पूरी टीम के साथ कड़ी मशक्कत की और अधिकतर अनुज्ञाधारियों से लाइसेंस फीस जमा करवाने में सफल रहे. इसके बाद प्रदेश में होटल और रेस्टोरेंट बार भी खोल दिए गए.

4 मई को खुली प्रदेश की शराब की दुकानें: 
नए आबकारी आयुक्त डॉ जोगाराम के सामने चुनौती थी कि बार लाइसेंस का नवीनीकरण तेजी से हो ताकि विभाग को राजस्व मिले. जोगाराम में आते ही अपने प्रशासनिक दक्षता दिखाई और वर्तमान में प्रदेश में 999 में से करीब 725 होटल और रेस्टोरेंट बार के लाइसेंस का नवीनीकरण हो चुका है. दरअसल सरकार के सामने राजस्व अर्जित करना बड़ी चुनौती थी ऐसे में प्रदेश में लॉक डाउन में करीब 41 दिन बंद रखने के बाद आखिर 4 मई को प्रदेश में शराब दुकानों को खोल दिया गया. इसके लिए बाकायदा गाइडलाइन जारी की गई. सीधे तौर पर अनुज्ञाधारियों को कहा गया कि वे अपनी दुकान पर बैरिकेडिंग कराएं, सोशियल डिस्पेंसिंग की सख्ती से पालना करें, मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर का उपयोग हो और समय सीमा को भी सुबह 10 बजे से रात्रि 8 बजे के स्थान पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक ही रखा गया.

सुरा प्रेमियों का धैर्य का बांध मानो टूटा:
4 मई को जैसे ही शराब दुकानों को खोला गया सुरा प्रेमियों का धैर्य का बांध मानो टूट गया और ऐसा महसूस हुआ जैसे उन्होंने शराब दुकानों पर धावा बोल दिया हो. पहले ही दिन आरएसबीसीएल और गंगानगर शुगर मिल के डिपो से करीब 74 करोड रूपए की शराब बेची गई. इसके अगले दिन 59 करोड़ फिर 65 करोड़ की शराब बिकी. पिछले 3 महीने में प्रदेश में करीब 2800 करोड रुपए की अंग्रेजी व देशी शराब बिकी है. इसके बाद स्थिति सामान्य हुई और अब करीब 20 करोड़ से 25 करोड़ रुपए औसतन रोजाना की शराब बिक रही है.

अनलॉक3 में बिक्री बढ़ने की संभावना:
गर्मी के चलते वैसे भी इस समय शराब की बिक्री ज्यादा होती है फिर पर्यटन स्थल खुलने से भी शराब बिक्री में आंशिक वृद्धि हुई है. हालांकि विदेशी पर्यटकों का आगमन नहीं के बराबर है फिर भी अनलॉक 3 मैं आज से बार खुलने का समय रात्रि 11 बजे तक होने से भी आबकारी विभाग का राजस्व बढ़ने की संभावना है. इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा राजस्व में वृद्धि के लिए शराब पर विशेष सैस लगाया था. राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर अंग्रेजी व देशी शराब पर प्राकृतिक आपदाओं और मानव निर्मित आपदाओं से निपटने के लिए ₹5 से लेकर ₹30 तक सर चार्ज भी लगाया है. वैसे भी राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 12500 करोड रुपए का आबकारी राजस्व का लक्ष्य रखा है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में शराब की बिक्री तो बढ़ेगी ही सरकार के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी. 

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जयपुर एयरपोर्ट की यात्रीभार के लिहाज से मात्र 18 प्रतिशत रिकवरी, पिछले साल जून की तुलना में 81.9 फीसदी गिरा यात्रीभार

जयपुर एयरपोर्ट की यात्रीभार के लिहाज से मात्र 18 प्रतिशत रिकवरी, पिछले साल जून की तुलना में 81.9 फीसदी गिरा यात्रीभार

जयपुर: कोरोना के इस दौर में हवाई यात्रा की गति थमी हुई है. यह बात अब आंकड़ों ने भी साबित कर दी है. जयपुर एयरपोर्ट के जून माह के आंकड़ों में सामने आया है कि पिछले साल जून के मुकाबले यात्रियों की संख्या करीब 82 फीसदी घट गई है. विमानों का मूवमेंट भी पिछले साल के मुकाबले 70 प्रतिशत कम है. इस कमी से जयपुर एयरपोर्ट जून माह में दूसरे कई छोटे एयरपोर्ट की तुलना में भी पिछड़ गया है.लॉकडाउन के बाद जब हवाई यात्रा शुरू हुई थी तो विमानन विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि हवाई यात्रा के पहले माह में यात्रियों की संख्या और फ्लाइट संचालन पिछले साल के मुकाबले करीब 20 से 25 फीसदी ही रहेगा. जून माह में जो आंकड़े आए हैं उनमें यह सामने आया है कि पिछले साल की तुलना में पहले माह में देश के ज्यादातर एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट्स का संचालन 20 से 25 फीसदी के बीच ही रहा है. 

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पिछले साल की तुलना में मात्र 30 प्रतिशत ही फ्लाइट चल रहीं:
जयपुर एयरपोर्ट से पिछले साल के मुकाबले फ्लाइट संचालन मात्र 30 फीसदी हो सका है. यात्रियों की संख्या में गिरावट ज्यादा रही है. दरअसल कोरोना के बाद विभिन्न राज्यों के सख्त क्वांरटीन नियमों और कोरोना बीमारी के डर के चलते लोग हवाई यात्रा करने से बच रहे हैं. विमानों के अंदर सोशल डिस्टेंसिंग नहीं हो पाने के चलते ज्यादातर लोग हवाई यात्रा नहीं कर रहे. ऐसे यात्री, जिन्हें जरूरी कार्यों से एक से दूसरे शहर जाना है, वे ही लोग हवाई यात्रा कर रहे हैं. हालांकि कोरोना के इस दौर में कई छोटे एयरपोर्ट ऐसे सामने आए हैं, जहां से जयपुर एयरपोर्ट से ज्यादा यात्रीभार रहा है. पटना और श्रीनगर जैसे एयरपोर्ट से यात्रीभार जयपुर से कहीं ज्यादा रहा है. इसके पीछे माना जा रहा है कि बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों में रहने वाले लोग इस दौरान लौटे हैं. यात्रियों के लिहाज से जयपुर एयरपोर्ट की रैंक हर माह देश में 12वीं या 13वीं होती है, लेकिन इस बार 14वीं रही है. लखनऊ और जयपुर एयरपोर्ट के बीच हमेश नैक टू नैक फाइट होती है. इस बार लखनऊ 11वें और जयपुर 14वें स्थान पर खिसक गया है.

देश में 14वें स्थान पर खिसका जयपुर एयरपोर्ट
- जून माह में 77663 यात्रियों ने जयपुर एयरपोर्ट से यात्रा की
- पिछले साल जून में 428490 यात्रियों ने यात्रा की थी, 81.9 प्रतिशत की कमी
- देश में सबसे ज्यादा 10.15 लाख यात्रियों ने दिल्ली एयरपोर्ट से यात्रा की
- हालांकि पिछले साल जून में दिल्ली से 55.01 लाख यात्री थे, 81.5 फीसदी की कमी
- दूसरे स्थान पर कोलकाता, तीसरे पर बेंगलूरु, चौथे पर मुम्बई एयरपोर्ट रहा
- 5वें पर हैदराबाद, छठे पर चेन्नई, 7वें पर पटना, 8वें पर पुणे, 9वें पर अहमदाबाद
- 10वें पर कोचीन, 11वें पर लखनऊ, 12वें पर गुवाहाटी, 13वें पर श्रीनगर रहा
- पटना एयरपोर्ट देश के टॉप 15 में भी नहीं, लेकिन कोविड के चलते आवागमन ज्यादा रहा
- देश में 10वें स्थान पर रहने वाला गोवा जून में यात्रियों के लिहाज से टॉप 30 में भी नहीं रहा
- मुम्बई एयरपोर्ट देश का दूसरा बड़ा एयरपोर्ट है, लेकिन कोविड के चलते चौथे पर खिसका
- श्रीनगर टॉप 15 में भी नहीं आता, लेकिन इस बार जयपुर से आगे रहा

यात्रीभार के अलावा विमानों के संचालन के जो आंकड़े आए हैं, वे भी आशा जनक नहीं हैं. जयपुर एयरपोर्ट से जून माह में फ्लाइट्स का संचालन पिछले साल जून की तुलना में 70 फीसदी कम हुआ है. हालांकि इस मामले में जयपुर एयरपोर्ट देश में 13वें स्थान पर रहा है. इस सूची में मात्र पटना एयरपोर्ट ही एकमात्र ऐसा एयरपोर्ट है जो जयपुर से आगे रहा है, हालांकि सामान्य तौर पर यह जयपुर से काफी पीछे रहता है.

विमानों के मूवमेंट के लिहाज से देश में 13वें स्थान पर जयपुर
- दिल्ली एयरपोर्ट से 11647 विमानों का आवागमन हुआ, देश में अव्वल
- बेंगलूरु दूसरे, कोलकाता तीसरे, मुम्बई चौथे, हैदराबाद पांचवें, चेन्नई छठे
- अहमदाबाद 7वें, कोचीन 8वें, गुवाहाटी 9वें, पुणे 10वें, पटना 11वें स्थान पर
- लखनऊ 992 फ्लाइट संचालन के साथ 12वें स्थान पर
- जयपुर 950 फ्लाइट संचालन के साथ 13वें स्थान पर
- हालांकि पिछले साल जून में 3189 विमानों का मूवमेंट था
- यानी 70.2 प्रतिशत की कमी, पिछले साल की तुलना में 30 प्रतिशत विमान ही चल रहे
- पिछले साल जून में लखनऊ से आगे था जयपुर एयरपोर्ट

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अभी हवाई यात्रा का समय बहुत अच्छा नहीं:
जून माह के ये आंकड़े साबित कर रहे हैं कि अभी हवाई यात्रा का समय बहुत अच्छा नहीं है. मार्च माह से कोरोना बढ़ा था. इससे पहले फरवरी में देश में फ्लाइट्स का संचालन काफी बेहतर था. माना जा रहा है कि फरवरी के बराबर यात्री संख्या या फ्लाइट संचालन के आंकड़े को छूने में विमानन सेक्टर को 1 साल तक का समय लग सकता है और हवाई यात्रियों की संख्या कोरोना खत्म होने के बाद ही बढ़ सकेगी.

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

सीएम अरविंद केजरीवाल का बड़ा तोहफा, दिल्ली में 8 रुपये 36 पैसे तक घटे डीजल के दाम

सीएम अरविंद केजरीवाल का बड़ा तोहफा, दिल्ली में 8 रुपये 36 पैसे तक घटे डीजल के दाम

नई दिल्ली: दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने आज दिल्लीवालों को बड़ा तोहफा दिया है. केजरीवाल सरकार ने डीजल का दाम घटाने का फैसला किया है. केजरीवाल ने कैबिनेट की बैठक के बाद बताया कि फैसला किया गया है कि राज्य में आर्थिक गतिविधियों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जाएं. 

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डीजल अब  73.74 पैसे का मिलेगा: 
उन्होंने कहा कि दिल्ली में अभी 82 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से डीजल बिक रहा है, लेकिन अब केजरीवाल सरकार ने डीजल पर VAT 30 फसदी से घटाकर 16.75 फीसदी कर दिया है. इससे अब डीजल के दाम 8.36  पैसे तक कम होंगे, डीजल अब  73.74 पैसे का मिलेगा.

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लोगों ने किया था आग्रह:
इससे पहले लगातार लोगों का आग्रह था कि तेल की कीमतों को घटाया जाए. इससे दिल्ली की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. गुरुवार को दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया कि कैबिनेट ने राज्य में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ये फैसला लिया है. दिल्ली में अब लोग काम पर लौट रहे हैं, माहौल सुधर रहा है और कोरोना के केस भी कम हो रहे हैं.
 


 

जयपुर एयरपोर्ट पर बढ़ रहा चार्टर विमानों का आवागमन, डेढ माह में हुआ 78 चार्टर विमानों का मूवमेंट

 जयपुर एयरपोर्ट पर बढ़ रहा चार्टर विमानों का आवागमन, डेढ माह में हुआ 78 चार्टर विमानों का मूवमेंट

जयपुर: कोरोना काल में 2 माह तक फ्लाइट्स का संचालन बंद रहा. 25 मई से फिर से फ्लाइट संचालन चल रहा है, लेकिन अभी भी फ्लाइट्स में यात्रियों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं देखी जा रही है. इसके अलावा फ्लाइट्स की संख्या में भी बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हो रही है. दरअसल 25 मई से फ्लाइट्स का संचालन शुरू हाेने पर एयर इंडिया, इंडिगो, एयर एशिया और स्पाइसजेट ने 20 फ्लाइट शुरू करने का शेड्यूल दिया था. डेढ माह से ज्यादा समय बीतने पर भी अभी शेड्यूल में 24 फ्लाइट दर्शाई जा रही हैं. लेकिन इनमें से रोजाना औसतन 15 से 16 फ्लाइट ही संचालित हो रही हैं.

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डेढ माह की अवधि में 78 चार्टर विमानों का मूवमेंट:
रोजाना 8 से 9 फ्लाइट रद्द चल रही हैं. इस बीच जयपुर एयरपोर्ट पर चार्टर फ्लाइट का प्रचलन बढ़ा है. मंत्री, सांसद या फिर उद्योगपति समूहों से जुड़े लोग सामान्य फ्लाइट से यात्रा करने के बजाय अलग विमान में यानी चार्टर फ्लाइट में सफर करने को तरजीह दे रहे हैं. 25 मई से 10 जुलाई तक की डेढ माह की अवधि में 78 चार्टर विमानों का मूवमेंट हुआ है. दरअसल कोरोना के डर से अधिकांश वीआईपी लोग या तो सड़क मार्ग से यात्रा कर रहे हैं, या फिर चार्टर फ्लाइट से यात्रा कर रहे हैं. राजनैतिक दलों से जुड़े नेताओं के अलावा औद्योगिक घरानों से जुड़े लोग भी चार्टर फ्लाइट से यात्रा कर रहे हैं.

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कोरोना काल में चार्टर फ्लाइट से आवागमन
- जयपुर एयरपोर्ट पर गर्मियों में बढ़ा चार्टर फ्लाइट का मूवमेंट
- आमतौर पर जून-जुलाई में नहीं होता चार्टर प्लेन का आवागमन
- रोज बमुश्किल एक चार्टर फ्लाइट का मूवमेंट होता है गर्मियों के दौरान
- लेकिन कोरोनाकाल में इन दिनों बढ़ा चार्टर फ्लाइट का मूवमेंट
- पिछले डेढ माह में 78 चार्टर फ्लाइट का हुआ आवागमन
- कांग्रेस के राजनैतिक घटनाक्रम में नेताओं का चार्टर विमानों से हुआ मूवमेंट
- श्री सीमेंट, बिड़ला, रिलायंस और कई अन्य ग्रुप के लोगों का हुआ मूवमेंट
- चार्टर विमान कम्पनियां हर घंटे का औसतन ढाई से 3 लाख रुपए लेती किराया
- सामान्य फ्लाइट में ज्यादा यात्री होने पर रहता है संक्रमण का खतरा
- चार्टर फ्लाइट में केवल 2-5 लोग होने पर सुरक्षित माना जाता सफर

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपौर्ट

सुंदर पिचाई ने किया एलान, Google भारत में करेंगी 75,000 करोड़ रुपए का निवेश

सुंदर पिचाई ने किया एलान, Google भारत में करेंगी 75,000 करोड़ रुपए का निवेश

नई दिल्ली: Google अगले 5 से 7 वर्ष में भारत में 75,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगा. इसकी घोषणा सोमवार को Google के सीईओ सुंदर पिचाई ने की. खबरों के मुताबिक पिचाई ने कहा कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद करने के लिए 75,000 करोड़ रुपए का फंड देंगे.

डिजिटलीकरण कोष की घोषणा करने के लिए उत्साहित हूं:
Google फॉर इंडिया इवेंट को संबोधित करते हुए पिचाई ने कहा कि यह नवीनतम कदम भारत के भविष्य और इसकी डिजिटल अर्थव्यवस्था में कंपनी के विश्वास का प्रतिबिंब है. पिचाई ने कहा कि आज मैं भारत के डिजिटलीकरण कोष की घोषणा करने के लिए उत्साहित हूं. अगले 5-7 सालों में हम भारत में 75,000 करोड़ रुपए या 10 बिलियन अमरीकी डालर का निवेश करेंगे. 

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पीएम मोदी ने की सुंदर पिचाई से मुलाकात:
इससे पहले पीएम मोदी ने सुंदर पिचाई से हुई बातचीत की जानकारी देते हुए ट्वीट में लिखा, आज सुबह सुंदर पिचाई के साथ बातचीत हुई. हमने कई विषयों पर बात की, खास तौर से तकनीक के जरिए भारत के किसानों, युवाओं और उद्यमियों के जीवन को बदलने के विषय में बातचीत की.

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