आर्थिक सर्वेक्षण भारत के लिए 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने का ब्लूप्रिंट: सीईए सुब्रमण्यन

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/04 04:49

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने आज आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश किया. देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) प्रोफेसर केवी सुब्रमण्यन ने यह आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 तैयार किया है. देश की अर्थव्यवस्था का आईना कहे जाने वाले इकोनॉमिक सर्वे में सरकार के सामने जीएसटी और किसानों के स्कीम में वित्तीय घाटा अहम चुनौती हैं. 

पांच जुलाई को आम बजट:
दरअसल हर साल बजट पेश करने से एक दिन पहले संसद में ऑर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला आम बजट पांच जुलाई यानी कल पेश होगा. नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में ये पहला आर्थिक सर्वे है. इससे पहले इस साल पेश किए गए अंतरिम बजट के दौरान आर्थिक समीक्षा पेश नहीं की गई थी. सर्वे पेश करने से पहले केवी सुब्रमण्यन ने कहा कि हमारी टीम ने मेहनत और लगन से काम किया है. उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण भारत के लिए 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने का ब्लूप्रिंट है.

आर्थिक सर्वे 2019 की बड़ी बातें:
—वित्त वर्ष 2020 में तेल की कीमतें कम होने का अनुमान
—जनवरी से मार्च के बीच चुनाव की अनिश्चितता के कारण मंदी
—देश की विकास दर वित्त वर्ष 2020 में 7 फीसदी रहने की उम्मीद है
—वित्त वर्ष 2020 में विकास दर बढ़ने की उम्मीद है
—इन्वेस्टमेंट रेट अपने निचले स्तर पर पहुंचे
—वित्त वर्ष 2019 में फिस्कल डेफिसिट 5.8 फीसदी रहने का अनुमान, वित्त वर्ष 2018 में 6.4 फीसदी था
—वित्तवर्ष 2020 में इन्वेस्टमेंट रेट बढ़ने की उम्मीद है
—एनबीएफसी संकट के कारण विकास दर में कमी आई
—एनपीए में गिरावट से कैपेक्स सायकल बढ़ने की उम्मीद
—पिछले 5 साल में GDP की दर औसत तौर पर 7.5 फीसदी रही
—खाने के सामानों की कीमत कम होने के कारण किसानों ने कम उत्पादन किया
—भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना आर्थिक सर्वे का मूल है
—विदेशी मुद्रा भंडार 2018-19 में 412.9 अरब डालर रहने का अनुमान
—वित्त वर्ष 2018-19 में आयात 15.4 प्रतिशत जबकि निर्यात में 12.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान
—एलपीजी सब्सिडी के लिए ‘गिव इट अप’ से ‘थिंक अबाउट द सब्सिडी’

मुख्य आर्थिक सलाहकार का कार्य:
बता दें कि मुख्य आर्थिक सलाहकार का प्रमुख काम विदेश व्यापार और औद्योगिक विकास के मुद्दों पर नीतिगत सलाह देना होता है. साथ ही औद्योगिक उत्पादन के रुखों का आकलन और अहम आर्थिक संकेतकों पर सांख्यिकी जानकारी जारी करना है. वह वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है. देश के पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार जे.जे. अंजरिया थे, वे वर्ष 1956 से वर्ष 1961 के बीच देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे. 

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