नई दिल्ली शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान बोले- दिव्यांग छात्रों की परेशानी का विषय ‘वास्तविक एवं संवेदनशील’, सरकार दे रही ध्यान

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान बोले- दिव्यांग छात्रों की परेशानी का विषय ‘वास्तविक एवं संवेदनशील’, सरकार दे रही ध्यान

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान बोले- दिव्यांग छात्रों की परेशानी का विषय ‘वास्तविक एवं संवेदनशील’, सरकार दे रही ध्यान

नई दिल्ली: शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि दिव्यांग छात्रों को पेश आ रही परेशानियों का विषय ‘वास्तविक एवं संवेदनशील’ है, इसको लेकर समाज में जागरूकता की भी कमी है और इस चुनौती पर नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों को लागू करते हुए एवं पाठ्यचर्या तैयार करते हुए ध्यान दिया जा रहा है.
लोकसभा में अपराजिता सारंगी, ई टी मोहम्मद बशीर, गौरव गोगोई, एस एस अहलूवालिया के पूरक प्रश्नों के उत्तर में प्रधान ने यह बात कही. शिक्षा मंत्री ने कहा कि सदस्यों ने जिस विषय को उठाया है, वह बेहद संवेदनशील मुद्दा है. यह वास्तविक मुद्दा है. समाज में, परिवार में कौन दिव्यांग है, इसे लेकर जागरूकता का अभाव भी है.

हमारे घरों में इस प्रकार के बच्चे मिल जायेंगे:

उन्होंने कहा कि जब मैंने मंत्री पद संभाला था तब एक विषय ‘डिस्लेक्सिया’ शब्द के रूप में सामने आया, इसके बारे में पहले नहीं सुना था और पता करने पर इसे परिभाषित करने वाला हिन्दी में कोई एक शब्द नहीं मिला. प्रधान ने कहा कि हमारे घरों में इस प्रकार के बच्चे मिल जायेंगे. ऐसे में नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत इस विषय को काफी तवज्जो दी जा रही है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने स्कूलों के बंद हो जाने के कारण न केवल भारत की बल्कि विश्वभर की शिक्षा प्रणाली को अत्यधिक प्रभावित किया है. ऐसे में विशेष रूप से सक्षम बच्चों को किस प्रकार से पढ़ाया जाए, यह एक चुनौती रही है.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस विषय पर विशेषज्ञ काम कर रहे हैं. नयी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम तैयार करते हुए भी इस विषय पर ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस विषय पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि प्रशिक्षकों को कैसे बढ़ाया जाए, स्कूलों में कैसे व्यवस्था बढ़ायी जाए. प्रधान ने कहा कि हमें मिलकर इस चुनौती का सामना करना है. एक प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रधान ने कहा कि कोविड-19 महामारी के चलते स्कूलों के बंद हो जाने के कारण शिक्षा प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि इसने एक ऐसी स्थिति भी बना दी जहां छात्रों की सतत शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीव्र गति से ऑनलाइन प्रौद्योगिकी और शिक्षा के मिश्रित तरीकों को अपनाना पड़ा.

नियमित कक्षा के आदान-प्रदान की पूर्ति की जा रही:

उन्होंने कहा कि ई-सामग्री के जरिये पठन-पाठन प्रक्रिया में उपयोग किए जाने वाले संसाधनों से शिक्षकों की सहायता करके नियमित कक्षा के आदान-प्रदान की पूर्ति की जा रही है. उन्होंने कहा कि इसमें विशेष रूप से यह संसाधन बच्चों को नियमित स्कूलों के अनुकूल बनाने और समावेशी कक्षा को प्रोत्साहित करने में सहायता करने के लिए भी बनाए गए हैं . प्रधान ने कहा कि यह हमें सभी दिव्यांग बच्चों के बेहतर शैक्षिक एवं व्यावसायिक विकास के लिए दिशानिर्देशों में यथा अनुशंसित मानकों के साथ पूर्ण समावेशी शिक्षा प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगा.

दिव्यांगता वाले विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को कवर किया जाएगा:

प्रधान ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामग्री प्रदान करने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग की सिफारिश भी की गई है. इसके तहत एक व्यापक पहल शुरू की गई है जो शिक्षा के लिए बहु विविध तरीके से सक्षम करने के लिए डिजिटल ऑनलाइन शिक्षा से संबंधित सभी प्रयासों को एकीकृत करती है. उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता प्राप्त स्थानीय निकायों के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के संदर्भ में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की दिव्यांगता अनुसूची में उल्लिखित एक या एक से अधिक दिव्यांगता वाले विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को कवर किया जाएगा.  सोर्स-भाषा  

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