VIDEO: राजस्थान को जापान की मियावाकी पद्धति से हरा-भरा बनाने की कोशिश, शांति धारीवाल ने की प्लांटेशन की शुरुआत

VIDEO: राजस्थान को जापान की मियावाकी पद्धति से हरा-भरा बनाने की कोशिश, शांति धारीवाल ने की प्लांटेशन की शुरुआत

जयपुर: पर्यावरण को सुधारने के लिए अब प्रदेश के बड़े बड़े शहरों में भी घने जंगलों की तरह पेड़ पौधे नजर आएंगे. राजस्थान सरकार जापान की मियावाकी पद्धति से शहरों में पेड़ पौधे लगोन की तैयारी कर रही है. राजस्थान में पहली बार लागू की गई इस पद्धति की खासियत ये है की इससे सड़कों पर बहते बरसात के पानी को भी रिचार्ज किया जा सकेगा.

प्रदेश में शहरों के पर्यावरण को सुधारने के लिए अब जापान की मियावाकी पद्धति का सहारा लिया जा रहा है. राजस्थान के सभी प्रमुख शहरों में अब सड़कों के किनारे और पार्कों और खाली पड़ी सरकारी जमीन पर हरियाली लाने की कवायद शुरु की गई है. यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने जयपुर के जवाहर सर्किल पर जापान की मियावाकी पद्धति से प्लांटेशन की शुरुआत की है. इस अवसर पर यूडीएच प्रमुख शासन सचिव कुंजीलाल मीणा और जेडीसी सहित कई अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे. मियावाकी पद्धति में एक वर्ग मीटर क्षेत्रफल में चार से पांच बड़े पेड़ लगाए जा सकते हैं. इस पद्धति में कंक्रीट वाली सड़क के आस-पास भी पेड़ लगाए जा सकेंगे. जमीन में तीन फीट गहरा गढ्ढा खोदकर उसमें जैविक खाद भरी जाती है. फिर इन गढ्ढों में पौधे लगाने के बाद इसके आस-पास घास-फूंस की पत्तियां भर दी जाती हैं. सीमेंट की जाली से ढक दिया जाता है और सड़क के पानी के बहाव को इन पौधों के गढ्ढों की तरफ मोड़ दिया जाता है. बरसात का पानी इन गढ्ढों में भरने से पेड़-पौधे हरे भरे रहेंगे वहीं जमीन का भूजल स्तर भी सुधर सकेगा.

जापान की मियावाकी पद्धति से शहरों में घने जंगल किए जाएंगे तैयार
यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने जापान की मियावाकी पद्धति से शहरों में घने जंगल तैयार करने के निर्देश दिए हैं, अकेले जयपुर शहर में दस स्थानों पर 1.20 लाख पेड़ इस पद्धति से लगाए जा रहे हैं. जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए प्लान के अनुसार तरूछाया नगर के वुड़लैंड पार्क की पांच हजार वर्ग मीटर जमीन पर बीस हजार पेड़ लगाए जा रहे हैं. जबकि गजधरपुरा एसटीपी प्लांट पर 2000 वर्ग मीटर में 8 हजार, स्वर्ण जयंति पार्क की 5000 वर्ग मीटर जमीन पर बीस हजार, सेन्ट्रल पार्क में 4500 वर्ग मीटर जमीन पर 18000 पेड़, बगरू के मोहन लाल सुखाड़िया नग में 1500 वर्ग मीटर में 6 हजार, जवाहर सर्किल व रामनिवास बाग की 500-500 वर्ग मीटर में दो-दो हजार, हीरालाल शास्त्री नगर की 5000 वर्ग मीटर जमीन पर बीस हजार, हाथौज कालवाड़ एसटीपी प्लांट की 2000 वर्ग मीटर जमीन पर आठ हजार रलावता एसटीपी प्लांट की 4000 वर्ग मीटर जमीन पर सोलह हजार पेड़ पौधे लगाने की तैयारी कर  ली है. मंत्री शांति धारीवाल ने कहा है की प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों के साथ साथ सड़क मार्गों पर पर्यावरण सुधारने के लिए मियावाकी पद्धति से पौधारोपण किया जा रहा है.

मियावाकी पद्धति कम जगह में अधिक वृक्षारोपण की पद्धति 
मियावाकी पद्धति कम जगह में अधिक वृक्षारोपण की पद्धति है, इस जापानी पद्धति से जहां हरियाली को संरक्षण मिलता है वहीं बरसाती और सड़कों पर व्यर्थ बहने वाले पानी को पेड़ों में देने के साथ जमीन को रिचार्ज करने की सुविधा भी होती है. मियावाकी पद्धति को राजधानी में जयपुर विकास प्राधिकरण ने 1.20 लाख पौधारोपण के साथ शुरु की है. अब प्रदेश के प्रमुख शहरों और राजमार्गों पर इसे लागू किया जाएगा. जो मरुधरा के पर्यावरण को सुधारने में अहम भूमिका निभा सकता है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए शिवेंद्र सिंह परमार की रिपोर्ट

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