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आठ दिवसीय 1008 श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान समापन

आठ दिवसीय 1008 श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान समापन

कठूमर(अलवर)। कस्बे के आदिनाथ जैन मंदिर मे अष्टान्हिका महापर्व  के अवसर पर आयोजित आठ दिवसीय 1008 श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान का शुक्रवार को समापन हुआ। समापन पर विश्व शांति के लिये नित्य पूजा, शांति धारा और अभिषेक के बाद एक हजार चौबीस अधर्य दिये और पॉच कुंडीय हवन किया गया।

जैन समाज के अध्यक्ष विजयपाल जैन ने बताया जैन मुनि आचार्य वसुनन्दी महाराज की पावन प्रेरणा से विधानाचार्य सोनेश जैन शास्त्री टिटपुरी वालो के मार्गदर्शन मे जैन समाज के अनेको श्रावक एवं श्राविकाएं केशरिया वस्त्र धारण कर बडे श्रृद्धा एवं भक्ति भाव से विधान मे शामिल होकर आठ दिन तक सातिशय पुण्यार्जन किया।

विधानाचार्य सोनेश जैन शास्त्री ने विधान के महत्व को समझाते हुये कहा कि सिद्ध परमेष्ठि भगवान की पूजा अर्चना का अष्टान्हिका महापर्व पर विशेष महत्व है।

विधानाचार्य ने कहा महासती मैना सुन्दरी ने इस विधान को विधि पूर्वक किया। जिसके परिणामस्वरूप उनके पति राजा श्रीपाल का कुष्ठ रोग दूर हो गया। प्रतिदिन होने वाले यन्त्र हवन के गन्धोदक  का विशेष महत्व है। इसके शरीर पर लगाने  से विभिन्न प्रकार के असाध्य रोग पीडा दूर होती है।

इस अवसर पर प्रतिदिन श्रीजी का अभिषेक  शान्तिधारा , नित्य नियम पूजन  पंचमेरु  नन्दीश्वर दीप पूजा की  गई। तत्पश्चात् सिद्ध चक्र महामण्डल विधान मे विश्व शांति और समाज की खुशहाली के लिये अर्घ्य चढाये गये।  विधान मे श्रावक श्राविकाओ द्वारा भजन भक्ति नृत्य आदि  प्रस्तुत किये।                
 

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