VIDEO: भाजपा से पिछड़ रहा कांग्रेस का सोशल मीडिया

Naresh Sharma Published Date 2019/03/28 11:06

जयपुर। लोकसभा चुनाव का शंखनाद हो गया है और चुनाव प्रचार का आगाज भी। जगह जगह रैलिया हो रही है, लेकिन हकीकत यह है कि रैलियां, सभाओं व लाउडस्पीकरों की बजाय अब सोशल मीडिया प्रचार का बड़ा मंच बन गया है। पिछले लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी सभी पार्टियां प्रचार के लिए फेसबुक, व्हाट्एएप्प, ट्वीटर आदि का सहारा ले रहे हैं, लेकिन मोबाइल क्रांति के इस डिजीटल युग में फिलहाल भाजपा की बजाय प्रदेश कांग्रेस सोशल मीडिया कैंप में पिछड़ती नजर आ रही है। 

हिंदुस्तान में इंटरनेट व सोशल मीडिया के माध्यम से अब राजनीति की लड़ाई लड़ी जा रही है। लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार-प्रसार शुरू हो गया है, लेकिन सोशल मीडिया ने प्रचार के अन्य तरीकों को पीछे छोड़ रखा है।  ट्वीटर, फेसबुक व वेबसाइट के माध्यम से राजनीतिक पार्टियां प्रचार में जुटी हैं। दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस ने साइबर योद्धा के नाम से सोशल मीडिया की बड़ी बड़ी टीमें बना रखी हैं। राजनीति से जुड़ा कोई भी बयान हो या वीडियो या फिर फोटो, कुछ ही पलों में करोड़ों लोगों के बीच पहुंच जाती है। साइबर योद्धाओं के बीच यह जंग और बढ़ेगी, लेकिन फिलहाल दोनों पार्टियों की स्थिति देखे, तो कांग्रेस अभी थोड़ी पिछड़ी हुई है। 

कांग्रेस ने प्रदेश में सोशल मीडिया प्रभारी बदल दिया, लेकिन सोशल मीडिया टीम के हालात नहीं बदले। आप खुद ही देखिए।  प्रदेश कांग्रेस कमेटी की वेबसाइट का बुरा हाल है। समाचार व कार्यक्रम के नाम पर पीसीसी प्रमुख सचिन पायलट के तीन बयान है, वे भी तब के जब कांग्रेस विपक्ष में थी। इसी तरह लेटेस्ट न्यूज सेक्शन पर नजर डाले, तो एक दिसंबर बाद यहां पर कोई नई जानकारी ही नहीं है। यानी वेबसाइट को देखकर यह कहीं नहीं लगता कि राजस्थान में अब कांग्रेस सत्ता में आ गई है। इस वेबसाइट से कांग्रेस के अग्रिम संगठनों जैसे सेवादल, यूथ कांग्रेस ,महिला कांग्रेस व एनएसयूआई की कोई जानकारी नहीं है। पदाधिकारियों के नाम तो दूर, इन संगठनों के नाम तक वेबसाइट पर नहीं है।

सोशल मीडिया पर लड़ी जा रही चुनावी जंग
ट्वीटर, फेसबुक व व्हाट्सएप्प आ रहे प्रयोग में
पल पल में सूचनाए पहुंच रही करोड़ों लोगों के पास
भाजपा व कांग्रेस ने तैयार की साइबर फौज
लेकिन राजस्थान कांग्रेस की साइबर फौज अभी कमजोर
प्रदेश कांग्रेस की वेबसाइट का नहीं है कोई धणीधोरी ?
पुराने ढर्रे पर चल रही है पीसीसी की वेबसाइट
सरकार बदल गई, लेकिन वेबसाइट की सूरत नहीं बदली
पुरानी खबरें दिखाई जा रही वेबसाइट पर
सेवादल, यूथ कांग्रेस व महिला कांग्रेस की कोई जानकारी नहीं

बात ट्वीटर की करे, तो पीसीसी का ट्वीटर हैंडल 2013 में शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक यहां पर महज 59 हजार फोलोअर हैं। यानी कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता भी शायद इस ट्वीटर हैंडल को फोलो नहीं करते होंगे। लाइक व कमेंट की बात करें, तो पीसीसी द्वारा किए गए एक ट्वीटर पर 200 या 400 से ज्यादा लाइक कमेंट नहीं होते। हाल ही शक्ति केंद्र कार्यकर्ता सम्मेलन में काफी ट्रेनिंग दी गई थी। हजारों शक्ति केंद्र कार्यकर्ता हैं, लेकिन वे भी अपने पार्टी के ट्वीटर हैंडल पर एक्टिव नहीं है। दूसरी तरफ भाजपा के प्रदेश ट्वीटर हैंडल की बात करें, तो वह कांग्रेस के बाद शुरू हुआ था, लेकिन फॉलोअर की संख्या में कांग्रेस से कहीं आगे है। भाजपा के ट्वीटर पर दो लाख से ज्यादा फोलोअर हैं। दोनों के ट्वीटर हैंडल की आगे तुलना करें, तो भाजपा ने अब तक 21 हजार से अधिक ट्वीट किए हैं, जबकि कांग्रेस के हैंडल से महज नौ हजार ट्वीट ही हो पाए हैं।

फेसबुक पेज की बात करें, तो प्रदेश में भाजपा व कांग्रेस की बराबर सी स्थिति है। दोनों ही दलों के फेसबुक पर करीब 10-10 लाख फॉलोअर हैं। इसी तरह व्हाट्सएप्प की बात करें, तो भाजपा ने हर मंडल व वार्ड स्तर पर व्हाट्सएप्प ग्रुप बना रखे हैं और न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं को बल्कि आम लोगों को भी ग्रुप से जोड़ रखा है। पार्टी की हर गतिविधि की जानकारी पल पल दी जाती है। पार्टी का मीडिया सेल भी काफी एक्टिव हैं। वहीं कांग्रेस की बात करें, तो प्रदेश कांग्रेस का मीडिया सेल भाजपा की बजाय पिछड़ा है, न कोई व्हाट्स ग्रुप हैं और न ही मैसेज सुविधा। बस शाम को ईमेल से प्रेस नोट भेजकर इतिश्री कर ली जाती है। ऐसे में पार्टी की गतिविधियों की जानकारी तुरंत जनता तक नहीं पहुंच सकती। प्रदेश में 25 सीटों पर लोकसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में अब कार्यकर्ताओं को एक्टिव रखने की जरूरत है। ऐसे में देखना होगा कि कांग्रेस के साइबर योद्धा सोशल मीडिया पर चुनावी जंग में भाजपा से कितना लोहा ले पाते हैं।

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