934 करोड़ की लागत से 1056 किमी रेल ट्रैक पर होगा विद्युतीकरण

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/17 10:47

जयपुर (काशीराम चौधरी)। आने वाले महीनों में मारवाड़ में रेल विद्युतीकरण की रफ्तार अब तेज होगी। केन्द्रीय रेल विद्युतीकरण संगठन ने जोधपुर के लिए एक नया प्रोजेक्ट निदेशक का पद स्वीकृत किया है। नया ऑफिस खुलने से अब यहां पर विकास कार्य अधिक तेज गति से पूरे होंगे। ऐसे में प्रदेश में अब डीजल इंजन के बजाय विद्युतीकृत ट्रैक पर तेज गति वाले इलेक्ट्रिक इंजन युक्त ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी। एक विशेष रिपोर्ट-

जयपुर-जोधपुर रेलमार्ग पर अगले कुछ सालों में 1056 किलोमीटर ट्रैक पर शुरू होने वाले विद्युतीकरण के करीब 934 करोड़ के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय रेल विद्युतिकरण संगठन (कोर) ने जयपुर-जोधपुर ट्रैक को इलेक्ट्रीफाइड करने के लिए प्रोजेक्ट ऑफिस को मंजूरी दी है। पूरे प्रोजेक्ट को जोधपुर से हैड किया जाएगा। यहां जबलपुर से स्थानांतरित कर प्रोजेक्ट डायरेक्टर का पद भी सृजित कर दिया गया है। संभावना है कि 1 दिसंबर से ऑफिस काम करना शुरू कर देगा। दरअसल, कोर ने देशभर में विद्युतीकरण कार्यों के लिए 11 जगह प्रोजेक्ट ऑफिस खोले हुए हैं। अब रेल विद्युतीकरण के काम बढ़ाने के साथ प्रोजेक्ट ऑफिस भी बढ़ाए जा रहे हैं। इसी के चलते जबलपुर से पद हटा कर उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल में भेजा गया है। इस ऑफिस में प्रोजेक्ट डायरेक्टर के अलावा अकाउंट्स, इलैक्ट्रिक, इंजीनियरिंग, सिग्नल एंड टेलिकॉम, स्टोर्स, पर्सनल व ऑपरेशन डिपार्टमेंट के अधिकारी व कर्मचारी भी लगाए जा रहे हैं। कोर के जयपुर प्रोजेक्ट ऑफिस के सीनियर पीआरओ महेश कुमार शर्मा ने बताया कि इस ऑफिस से जोधपुर व बीकानेर मंडल के प्रोजेक्ट को मूर्त रूप दिया जाएगा। 

—देशभर में रेलवे रूट को विद्युतीकृत करने का 12134 करोड़ का प्रोजेक्ट
—जयपुर व जोधपुर मंडल का 1056 किलोमीटर ट्रैक शामिल
—करीब 934 करोड़ रुपए लागत से पूरा होगा प्रोजेक्ट
—जयपुर, मकराना, मेड़ता सिटी, जोधपुर, बीकानेर, सूरतगढ़
—रतनगढ़, परबतसर व मुनाबाव विद्युत रेलमार्ग से जुड़ेंगे
—बीकानेर-मेड़ता रोड-जोधपुर व फुलेरा-मेड़ता रोड (424 किमी)
—मारवाड़ जंक्शन-लूणी (71 किमी), रतनगढ़-डेगाना (142 किमी)
—समदड़ी-बाड़मेर-मुनाबाव (250 किमी)
—थियात हमीरा-सानू, पीपाड़ रोड-बिलाड़ा, मकराना-परबतसर सिटी व मेड़तारोड-मेड़ता सिटी (135 किमी)

गौरतलब है कि दो-तीन साल बाद यहां इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाने की तैयारी की जा रही है। वर्षों से रेल बजट में अटकी सूरतगढ़-फलोदी-जोधपुर-समदड़ी-भीलड़ी रेलवे ट्रैक, जिसमें फलौदी-जैसलमेर रूट भी शामिल है की 902 किमी लंबी लाइन को विद्युतीकृत किया जाना है। कोर ने इंजीनियरिंग तैयार कर निर्माण सामग्री खरीद प्रोजेक्ट तैयार करने वाले ईपीसी मोड पर इसे मूर्त रूप देने की तैयारी कर ली है। ईपीसी मोड पर कार्य होने के कारण इसके पूरे होने के दिन भी तय हैं, जो ढाई से तीन साल रखे जाएंगे। करीब 611 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए ईपीसी बिड की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। कुलमिलाकर आने वाले तीन साल में राजस्थान के अधिकांश हिस्से में विद्युतीकृत इंजन वाली ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी। जिसके फायदे यह होंगे कि न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा, डीजल की बचत होगी, साथ ही ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ जाएगी।
 

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