VIDEO: पर्यावरण विभाग की मनमानी, लागू नहीं हो पा रहे ठोस कचरा प्रबंधन नियम

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/03/18 09:46

जयपुर (अभिषेक श्रीवास्तव)। राज्य के पर्यावरण विभाग की मनमानी के चलते प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन नियम पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहे हैं। राज्य सरकार स्तर पर पर्यावरण विभाग को कई बार नियमों को लागू करने की जिम्मेदारी दी जा चुकी है, लेकिन विभाग के अधिकारी है कि मानते ही नहीं। खास रिपोर्ट-

केन्द्र सरकार के पयार्वरण व वन मंत्रालय की ओर से वर्ष 2016 में ठोस कचरा प्रबंधन नियम जारी किए गए थे। इन नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश के शहरी व ग्रामीण इलाकों में किस तरह तरह कचरे का संग्रहण किया जाएगा। किस तरह सूखे व गीले कचरे अलग-अलग संग्रहित होगा और किस तरह वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निस्तारण होगा। इन नियमों को लागू करने का उद्देश्य शहरों व गांवों के पर्यावरण को स्वच्छ बनाना है ताकि प्रदूषण,गंदगी और कचरे के ढेर से होने वाली बीमारियों से लोगों को बचाया जा सके। राज्य सरकार के स्तर पर कई बार तय हो चुका है कि इन नियमों को लागू करने के मामले में प्रदेश का पर्यावरण विभाग नोडल विभाग होगा। यह विभाग अन्य विभागों के साथ समन्वय कर इन नियमों की पालना सुनिश्चित कराएगा। इसके बावजूद विभाग अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहा है। आपको बताते हैं कब-कब राज्य सरकार के स्तर पर पर्यावरण विभाग को इन नियमों की पालना की जिम्मेदारी दी गई।

—14 जुलाई 2017 को मुख्य सचिव स्तर के तय किया गया कि पर्यावरण विभाग मामले में प्रशासनिक विभाग होगा
—बैठक में लिए फैसले के अनुसार स्वायत्त शासन विभाग ने मुख्य सचिव को इस बारे में प्रस्ताव भी भिजवा दिया
—8 अक्टूबर 2018 को मुख्य सचिव ने स्वायत्त शासन विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूर कर दिया
—9 जनवरी 2019 को हुई उच्च स्तरीय बैठक में भी तय हो गया कि पर्यावरण विभाग इन नियमों के लिए कॉर्डिनेटिंग विभाग होगा
—ये नियम केन्द्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय ने जाहिर किए हैं
—इस लिहाज से भी अन्य विभागों का तर्क है कि मामले में पर्यावरण विभाग ही नोडल विभाग होना चाहिए

पर्यावरण विभाग लगातार तर्क दे रहा है कि ठोस कचरा प्रबंधन नियमों को लागू करने का काम स्वायत्त शासन विभाग का है। उधर स्वायत्त शासन विभाग का कहना है कि पर्यावरण विभाग और इसके अधीन आने वाले राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल अपनी जिम्मेदारी दूसरे विभागों पर डाल रहे हैं। स्वायत्त शासन विभाग ने एक बार फिर एक विस्तृत प्रस्ताव मुख्य सचिव को भिजवाया है। 
 

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