VIDEO: 25 साल बाद भी राजस्थान को नहीं मिल रहा अपने हिस्से का पानी, मामले में हाईकोर्ट सख्त

Nizam Kantaliya Published Date 2019/07/11 08:33

जयपुर: वर्ष 1994 में हुए यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान के हिस्से का पानी लाने में हो रही देरी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है. राजस्थान हाईकोर्ट ने केन्द्रीय जल आयोग को आदेश दिये हैं कि वो राजस्थान सरकार द्वारा भेजी गई डीपीआर पर 6 सप्ताह में निर्णय ले. 

5 माह बाद भी डीपीआर पर निर्णय नहीं:
दरअसल राजस्थान सरकार ने हरियाणा से पाइपलाईन के जरिए राजस्थान में पानी लानले को लेकर एक नई डीपीआर बनाकर फरवरी 2019 को केंद्रीय जल आयोग को भेजी थी. 5 माह बाद भी इस डीपीआर पर आयोग द्वारा निर्णय नहीं लेने पर यशवर्धनसिंह ने जनहित याचिका दायर कर इसे चुनौती दी. जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार की ओर से पेश हुए एएसजी आर डी रस्तोगी ने आयोग का पक्ष रखा. एएसजी ने कहा कि वे शीघ्र हाईकोर्ट के आदेश की पालना करेंगे. 

1994 में हुआ समझौता:
गौरतलब है 1994 में हुए जल समझौते के तहत राजस्थान को कुल 1119 बिलीयन क्यूबीक मीटर पानी मिलना था, लेकिन हरियाणा सरकार द्वारा लगातार पानी देने को लेकर टालमटोल कि जाती रही. पहले हरियाणा ने अपनी नहर से पानी भेजने से इंकार कर दिया. जिस पर राजस्थान सरकार द्वारा हरियाणा नहर के समानान्तर खुद की नहर बनाने का प्रोजेक्ट तैयार किया. लंबे समय तक उस पर भी हरी झण्डी नहीं मिलने पर हाल ही पाइपालाईन के जरिए पानी लाने के प्रोजेक्टर पर कार्य शुरू किया गया. इस प्रोजेक्टर की डीपीआर बनाकर केन्द्रीय जल आयोग को फरवरी 2019 में ही भेज दी गयी लेकिन 5 माह बाद भी निर्णय नहीं लिया गया. 

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