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आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी इस गांव में नहीं है लाइट

आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी इस गांव में नहीं है लाइट

बुंदेलखंड। ये है डिजिटल युग का बुन्देलखंड, जहां आज भी कई गांव लालटेन युग में जी रहे हैं। जबकि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गांव-गांव बिजली होने का दावा करते हैं। आजादी के लगभग 70 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक बुन्देलखंड के इन गांवों में बिजली का करंट नहीं दौड़ा है। जिस कारण आज भी यहां लोग अंधेरे में जीने पर मजबूर हैं। कुछ बनने की चाहत पाले हुए गांव के बच्चे लालटेन की रोशनी में पढ़ते हैं और माता-पिता से सवाल करते हैं कि उनके गांव में कब करंट दौड़ेगा। 

गौरतलब है कि झांसी जिले की मऊरानीपुर तहसील में साजेरा गांव में आजादी के लगभग 70 साल बीत जाने के बाद भी इस गांव में आज तक लाईट नहीं पहुंची। इस गांव की आवादी लगभग 15 सौ से लेकर 2000 है। यहां खम्भे तो गाड़ दिये गये, लेकिन उनमें तार नहीं खींच गये। बिजली न होने के कारण आसानी से कोई अपनी लड़की की शादी भी गांव के लड़के से नहीं करता है। कई लोगों की उम्र निकलने वाली है, लेकिन उनकी शादी नहीं हुई है।  

गांव की रहने वाली 25 वर्षीय महिला कल्पना का कहना है कि वह जब पैदा हुई थी, उस समय भी उसके घर में अंधेरा था और आज रात्रि के समय अंधेरा रहता है। इसका कारण कोई और नहीं, बल्कि बिजली का न होना है। बिजली न होने के कारण आज भी उसके घर में लालटेन जलाकर खाना पकाते हैं और काम करते हैं। गर्मी हो या बरसात, दिन हो या रात। उनके लिए सब बराबर होता है। कभी-कभी रात्रि में भय सताता कि कहीं उन्हें कोई कीड़ा न काट ले।
 

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