भारतीय नागरिकता मिलने के बाद भी पाक विस्थापित महिलाएं नहीं लड़ पा रही पंचायतीराज चुनाव

FirstIndia Correspondent Published Date 2020/01/10 18:21

बाड़मेर: पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए पाक विस्थापितों को लंबे समय के बाद भारतीय नागरिकता मिली और उसके बाद से लगातार ये लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर भारतीय लोकतंत्र में अपनी हिस्सेदारी निभा रहे हैं. लेकिन पाक विस्थापित महिलाओं को भारतीय नागरिकता मिलने के बाद भी वो पंचायतीराज का चुनाव नही लड़ पा रही है. कारण ये है की राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार आरक्षित सीटों पर पिता के नाम का जाति प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य कर दिया है. यही वजह है कि पाक विस्थापित महिलाओं को भारतीय नागरिकता मिलने के बाद भी पाकिस्तान जाकर जाति प्रमाणपत्र बनवाना उनके बस की बात नही है. 

ये महिलाएं मन को मार कर बैठी:  
इस बार आयोजित होने वाले पंचायतीराज चुनाव के तहत सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए कई महिलाओं के सामने अब पाकिस्तान जाने की नौंबत आ गई  है. हम आपको बता दे कि बॉर्डर इलाकों की वे महिलाएं है जिनका पीहर पक्ष पाकिस्तान में है. नियमानुसार जाति प्रमाण पत्र पितृत्व के आधार पर बनता है, जो मायके के गांव से जारी होता है. ऐसे में अब ये महिलाएं मन को मार कर बैठी है कि न तो इतने कम समय में पाकिस्तान जा पाएगी और न ही चुनाव लड़ सकेगी.  

करीब एक लाख पाक विस्थापित परिवार:
सीमावर्ती बाड़मेर-जैसलमेर जिले में करीब एक लाख पाक विस्थापित परिवार है. जिलेभर के सौ से अधिक गांवो में ये परिवार चौहटन, सेड़वा, रामसर, गडरारोड़, शिव व अन्य क्षेत्र में आकर बस गए. इन परिवारों को भारतीय नागरिकता तो मिल गयी है. अब सरपंच के चुनावों में जहां-जहां आरक्षित सीट आई है वहां इन परिवारों की महिलाएं भी दावेदार है, लेकिन जाति प्रमाण पत्र के नियम ने इनको निराश कर दिया है. पाक विस्थापित संघ के जिलाध्यक्ष नरपतसिंह धारा बताते है कि इतने कम समय मे पाकिस्तान जाकर जाति प्रमाण पत्र कैसे बनाया जा सकता है. भारतीय नागरिकता मिलने के बाद सरकार हमारा जाति प्रमाण भी यही का बनाकर दे ताकि पंचायतीराज चुनावों में अपनी भागीदारी निभा सके. 

चुनाव लड़ने के लिए जाति प्रमाण पत्र  होना आवश्यक:
आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के लिए जाति प्रमाण पत्र  होना आवश्यक है. अतिरिक्त निर्वाचन अधिकारी राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र का आधार पितृत्व है इसी के आधार पर आरक्षण तय होता है. महिलाओं को अपने मायके से यह प्रमाण पत्र लाना आवश्यक है. बहरहाल जिनका पीहर पक्ष पाकिस्तान में है वे न तो इतने कम समय मे पाकिस्तान जा सकती है और न ही वहां से अब यह प्रमाण पत्र जारी होना है. लिहाजा अब उनके चुनाव लड़ने की हसरत मन में ही रह जाएंगी.

...फर्स्ट इंडिया के लिए संवाददाता पीके बृजवाल की रिपोर्ट

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