VIDEO: डेढ़ साल बाद भी नहीं सुलझ पाया कर्मचारी संघ कैंटीन अनियमितता का विवाद

Dr. Rituraj Sharma Published Date 2019/04/21 07:44

जयपुर। सत्ता और शासन के केंद्र सचिवालय कर्मचारी संघ कैंटीन में वित्तीय अनियमितता का विवाद डेढ़ साल बाद भी नहीं सुलझ पाया है। इसके तहत जहां शासन के केंद्र सचिवालय में आरटीपीपी एक्ट का सरेआम उल्लंघन हो रहा है तो वहीं खुली निविदा के जरिए टेंडर देने का मसला भी राजनीति के चलते अटका हुआ है। खास रिपोर्ट:

क्या है पूरा मामला:

दरअसल पूर्व राज्य सरकार में मंत्रियों और स्टाफ के जुलाई 2017 तक के 3 माह के चाय नाश्ते के 17.65 लाख के बिल बकाया थे। इसके साथ ही करीब 1 साल के 50-55 लाख के बिल बकाया थे। जुलाई 2017 से देशभर में जीएसटी लागू की गई थी, जिसके बाद कैंटीन या अन्य अधिकृत खाद्य पदार्थ बेचने वाले के लिए जीएसटी नंबर और विधिवत रूप से जीएसटी कटौती सर्विस चार्ज आदि की कटौती वाला बिल अनिवार्य था, लेकिन सचिवालय कर्मचारी संघ की कैंटीन की ओर से प्रस्तुत बिल्स में इन प्रावधानों का सीधा-सीधा उल्लंघन था। 

कैबिनेट सचिवालय में इस पर इसे आरटीपीपी एक्ट का सरासर उल्लंघन बताते हुए बिल रोक लिए थे। बाद में मुख्य सचिव के हस्तक्षेप से मामला सुलझा था। तब जुलाई 2017 तक के दिन के भुगतान के सशर्त आदेश दिए गए थे और कहा गया था कि आगे के बिल आरटीपीपी नियमों के तहत बाकायदा जीएसटी दिखाकर प्रस्तुत किए जाएं। अब 1 साल से ज्यादा होने के बाद भी करीब 23 लाख का बिल भुगतान बकाया है कैंटीन संचालक में जीएसटी नंबर तो ले लिया है लेकिन विधिवत रूप से आरटीपीपी नियमों की पालना बाकी है। 

अब क्यों उलझा हुआ है मामला:

उधर इस वजह से कैंटीन की जीएसटी के साथ नई दरें घोषित करके लागू करने का मसला भी अटका हुआ है, क्योंकि जैसे ही दरें बढ़ाई जाएंगी वैसे ही कर्मचारियों की ओर से भारी विरोध शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही सिंगल सॉर्स टेंडर के बजाय ओपन बिडिंग के जरिए कैंटीन का सितंबर 2018 बाद ठेका जारी होना था लेकिन अभी तक यह मसला अटका हुआ है। इसके पीछे कर्मचारी संघ की राजनीति को माना जा रहा है और क्योंकि कोई भी सरकार संघ की नाराजगी मोल नहीं ले सकती। मुख्य सचिव स्तर पर हुई बैठक में यह भी तय किया गया था सचिवालय कर्मचारी संघ की पूरी कमेटी बनाकर रजिस्ट्रेशन कराया जाए मुख्य सचिव ने आरटीपीपी एक्ट और जीएसटी के नियम भारत सरकार के बनाए होने के आधार पर भी राहत नहीं दिए जा सकने की बात कही थी। 

इन सभी बिंदुओं के चलते प्रशासन के आला अधिकारी भी खुद सत्ता और प्रशासन के अहम केंद्र सचिवालय में नियमों की पालना सुनिश्चित नहीं करवा पा रहे हैं और फिलहाल अनियमितता जारी है।

... संवाददाता ऋतुराज शर्मा की रिपोर्ट 

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