लिस्ट जारी होने से पहले ही संभावित प्रत्याशियों ने निकलवाए नामांकन के मुहूर्त

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/11 08:34

चित्तौड़गढ़ (पीके अग्रवाल)। भले ही राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की सूचियों पर मंथन का काम पूरा हो गया हो, लेकिन प्रत्याशियों के विधानसभा क्षेत्रों में अभी से कयासों के दौर शुरू हो गए है। दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों में जहां भाजपा के संभावित प्रत्याशियों ने नामांकन के महूर्त तक निकलवा लिए है वहीं कांग्रेस के दावेदार अभी भी टिकट पाने के लिए मशक्कत ही करते दिख रहे है।

कभी कांग्रेस का किला रहे चित्तौड़गढ़ जिले को भाजपा ने मोदी लहर में ऐसा ढहाया कि फिर कांग्रेस इस किले पर फतह के लिए उभर नही पाई। चित्तौड़गढ़ से कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाने वाले पूर्व विधायक सुरेन्द्रसिंह जाड़ावत को भाजपा के बिल्कुल नए चेहरे ने 2013 के विधानसभा चुनावों में करीब 10 हजार वोटों से पटखनी दी थी। इतना ही निम्बाहेड़ा में कांग्रेस का पहाड़ माने जाने वाले उदयलाल आंजना भी अपनी सीट नही बचा पाए और मामूली से अंतर से श्रीचंद कृपलानी के आगे सीट को गंवा बैठे। 

ठीक इसी तरह बात बड़ीसादडी़ की करें तो विपरीत परिस्थियों में भी कांग्रेस के झण्डे को बुलंद करने वाले प्रकाश चौधरी भी मोदी लहर में भाजपा के नए चेहरे गौतम दक के सामने तिनका-तिनका होकर बिखर गए। इसी तरह कपासन में कांग्रेस की भूल ने सीट कों गंवा दिया। वहां से मौजूद विधायक शंकर लाल बैरवा का टिकट काटकर कांग्रेस ने आरडी जावा को प्रत्याशी बनाया और भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़ चुके अर्जुनलाल जीनगर पर जब भाजपा ने दाव खेला तो भाजपा ने कपासन सीट को 30 हजार से भी अधिक के अंतर से जीत लिया। ठीक इसी तरह बेगूं विधान सभा में कांग्रेस के प्रत्याशी राजेन्द्रसिंह विधूड़ी का विरोध होते हुए भी कांग्रेस ने राजेन्द्रसिंह विधूड़ी ने दाव खेला और वहां से भाजपा ने एक नये चेहरे के रूप में सुरेश धाकड़ को मैदान में उतार दिया और कांग्रेस इस तरह से बेगूं सीट को गंवा बैठी, लेकिन आज के समय की बात करें तो भले ही स्थित और परिस्थियां कांग्रेस के फेवर में हो, लेकिन टिकट वितरण से पहले जिस तरह की अफवाहें आ रहीं है वह कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती ही जा रहीं है। 

चित्तौड़गढ़ विधानसभा से 2 बार विधायक रहें कांग्रेस के कद्दावर नेता सुरेन्द्रसिंह जाड़ावत का टिकट कटने की चर्चा है। जबकि कांग्रेस बेगूं में फिर से राजेन्द्रसिंह विधूड़ी पर दाव खेलना चाहती है। ऐसे में अगर कांग्रेस ने स्थित को नही भांपा को चित्तौड़गढ़ किलें को फतह कर पाना कांग्रेस के लिए डेढ़ी खीर होगा, इतना ही नही अपनी टिकट के प्रति आश्वस्त भाजपा के कद्दावर नेता श्रीचंद कृपलानी ने भाजपा की सूची आने से पहले ही अपने नामांकन का महूर्त निकलवा लिया है और श्रीचंद कृपलानी 12 नवम्बर को नामांकन कर रहे है। जबकि भाजपा के ही चित्तौड़गढ़ विधानसभा से मौजूदा विधायक चंद्रभानसिंह आक्या ने भी महूर्त निकवा लिया है और चंद्रभानसिंह आक्या 15 नवम्बर को नामांकन करने जा रहे है। ऐसे में टिकट कटने की चर्चाओं ने जहां सुरेन्द्रसिंह जाड़ावत के समर्थकों मे निराशा का भाव पैदा कर दिया है। उससे तो बस ऐसा ही लग रहा है जौरसौर से तैयारियों में लगी कांग्रेस एन वक्त पर कहीं अपनी नैया ना डूबो दें।
 

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