Live News »

कल से ब्रह्मा मंदिर खोलने की कवायद शुरू, गाइडलाइन की पालना के साथ 5 माह बाद खुलेगा ब्रह्मा मंदिर

कल से ब्रह्मा मंदिर खोलने की कवायद शुरू, गाइडलाइन की पालना के साथ 5 माह बाद खुलेगा ब्रह्मा मंदिर

अजमेर: पुष्कर स्थित विश्व का इकलौता जगत पिता ब्रह्मा मंदिर करीब 5 माह के लंबे अंतराल के बाद कल यानी 7 सितम्बर को फिर से खुलेगा. मंदिर खुलने के साथ ही श्रदालु कोरोना गाइडलाइन की पालना के साथ भगवान ब्रह्मा के दर्शन कर सकेंगे. मंदिर को नए नॉर्म से खोलने को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है. आज अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशन सिंह भाटी ने ब्रह्मा मंदिर में कोरोना की पालना के लिए की जा रही व्यवस्थाओं का जायजा लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए. 

श्रद्धालुओं को गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश:
भाटी ने मंदिर प्रबंधन के सदस्यों और व्यवस्था में तैनात पुलिस कर्मियों को साफ शब्दों में निर्देशित किया कि श्रद्धालुओं को कोरोना गाइडलाइन की पालना करने पर ही प्रवेश दिया जाए.उन्होंने मंदिर में भीड़ ना हो और सोशल डिस्टेंसिंग की पालना कराने के सख्त निर्देश दिए.भाटी ने बताया कि श्रदालुओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में आने वाले श्रदालु प्रशासन के निर्देशों की पालना करे.

मंदिर परिसर को किया जाएगा समय-समय पर सेनेटाइजेशन:
बहरहाल मंदिर को खोले जाने की तैयारियां युद्ध स्तर पर पूरी की जा रही है. प्रवेश द्वार पर लाल गोले ओर उससे पहले  लकड़ी की बेरिकेट्स के गुजरने के बाद ही श्रदालुओं को मास्क के साथ प्रवेश दिया जाएगा. सभी श्रदालुओं की थर्मल स्क्रिनिग होगी और स्वास्थ्य जांच के बाद ही प्रवेश मिलेगा.भाटी ने बताया कि मंदिर परिसर को समय-समय पर सेनेटाइजेशन किया जाएगा. 

और पढ़ें

Most Related Stories

एक ऐसा गांव, जहां पर होती हैं रावण की पूजा, नहीं जलाते हैं पुतला, जानिए वजह...

एक ऐसा गांव, जहां पर होती हैं रावण की पूजा, नहीं जलाते हैं पुतला, जानिए वजह...

अकोला: देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरा के अवसर पर रावण के पुतलों का दहन किया जात है लेकिन महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां राक्षसों के राजा रावण की पूजा की जाती है. स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले 200 वर्षों से संगोला गांव में रावण की पूजा उसकी विद्वता और तपस्वी गुणों के लिए की जाती है.

गांव के मध्य में काले पत्थर की रावण की लंबी प्रतिमा बनी हुई है जिसके 10 सिर और 20 हाथ हैं. स्थानीय लोग यहीं राक्षसों के राजा की पूजा करते हैं. स्थानीय मंदिर के पुजारी हरिभाउ लखाड़े ने रविवार को पीटीआई-भाषा से बातचीत में बताया कि दशहरा के अवसर पर देश के बाकी हिस्सों में बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में रावण के पुतलों का दहन किया जाता है, वहीं संगोला के निवासी रावण की पूजा उसकी विद्वता और तपस्वी गुणों के लिए करते हैं.

{related}

लखाड़े ने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से रावण की पूजा करता आया है. उन्होंने दावा किया कि लंका के राजा की वजह से ही गांव में समृद्धि और शांति बनी हुई है. स्थानीय निवासी मुकुंद पोहरे ने कहा कि गांव के कुछ बुजुर्ग लोग रावण को विद्वान बताते हैं और उनका विश्वास है कि रावण ने सीता का अपहरण राजनीतिक कारणों से किया था और उनकी पवित्रता को बनाए रखा.

उन्होंने कहा कि गांव के लोगों का विश्वास राम में भी है और रावण में भी है. वे रावण के पुतले नहीं जलाते हैं. देश के कई हिस्सों से लोग दशहरा के मौके पर रावण की प्रतिमा को देखने यहां आते हैं और कुछ पूजा भी करते हैं. हालांकि, कोविड-19 महामारी की वजह से यहां भी सादे तरीके से उत्सव मनाया जा रहा है. (भाषा)

विजयादशमी पर कोरोना का कहर, रावण के ससुराल जोधपुर में इस बार नहीं होगा रावण दहन

विजयादशमी पर कोरोना का कहर, रावण के ससुराल जोधपुर में इस बार नहीं होगा रावण दहन

जोधपुर: कोरोना ने इस बार सदियों से चली आ रही रावण दहन की परम्परा पर विराम लगा दिया है. रावण के ससुराल जोधपुर में इस बार विजयादशमी के अवसर पर रावण का दहन नहीं किया जाएगा. आज विजयादशमी का पर्व है और ऐसे में आज के दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक रावण दहन का कार्यक्रम कोरोना के चलते आयोजित नही होगा. ऐसे में जोधपुर वासियों ने जहां कोरोना को कोसा तो वही सरकार के इस निर्णय का भी स्वागत किया. विजयादशमी पर रावण का चबूतरा मैदान में हर वर्ष रावण दहन का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है.

जोधपुर में 102 वर्षों बाद टूटेगी यह परपंरा: 
रावण दहन की परपंरा सदियों से चली आ रही है और यह पहला मौका होगा जब जोधपुर में 102 वर्षो बाद यह परपंरा टूटेगी और आज रावण दहन नही किया जाएगा. महोत्सव को लेकर नगर निगम ने कलेक्टर के जरिए राज्य सरकार को पत्र लिख मार्गदर्शन मांगा था. राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि कोरोना की रोकथाम के लिए पहले से जोधपुर में धारा 144 लागू है. ऐसे में रावण दहन के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए इसका आयोजन इस साल नहीं किया जाए. वही इस बार करे रावण के पुतले बनाने वाले उन मजदूरों की तो उनके लिए भी इस बार रोजगार का संकट रहा है. मजदूर परिवारों के लिए रावण दहन कार्यक्रम नही होने से रोजी रोजी का संकट सामने आ रहा है. जब जोधपुर के राजघराने से जुडे हुए राज व्यास परिवार के सदस्यों से जब रावण दहन की परपंरा कब से चली आ रही है इस संबंध मे पूछा गया तो उन्होने बताया कि परपंरागत दशहरा जोधपुर महाराजा द्वारा विधिपूर्वक सदियों से मनाया जा रहा है. लेकिन यह पहली मर्तबा है कि इस बार रावण का दहन नही हो पा रहा है.

{related}

सन 1918 से चली आ रही है ये परंपरा:
पूर्व महाराजा उम्मेद सिंह के समय 1918 से यह परंपरा चली आ रही है,तब से लेकर आज यह पहला मौका है जब रावण का दहन नही होगा. वहीं राहन दहन नही किए जाने के निर्णय की जहां जोधपुर के लोगो ने सराहना करते हुए कहा कि रावण दहन जब होता है तो रावण चबूतरा मैदान में काफी भीड लगती है ऐसे में वहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नही हो पाएगा. जोधपुर में कोरोना के कहर को देखते हुए सरकार का यह सही निर्णय है कि इस बार रावण दहन नही होगा क्योकि त्यौहार तो हम अगले वर्ष भी मना लेंगे मगर अभी कोरोना को भगाना हमारे लिए जरूरी.

इस बार नहीं निकलेगी भगवान रामचन्द्र जी की सवारी:
बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व विजयदशमी के दिन मेहरानगढ़ में सदियों पुरानी परम्परा दशहरा दरबार नहीं सजेगा. कोविड-19 और जिला प्रशासन की गाइडलाइन के कारण दशहरे के दिन किए जाने वाला अश्व, पारम्परिक शस्त्रों एवं शमीपूजन भी प्रतिकात्मक ही होगा. किले के ही मुरली मनोहरजी मन्दिर से दशानन दहन स्थल रावण चबूतरा मैदान तक भगवान रामचन्द्र की सवारी भी इस बार नहीं निकलेंगी. शस्त्र व शमी पूजन की परम्परा इस बार कोविड के कारण उम्मेद भवन में प्रतिकात्मक रूप से की जाएगी. मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी मारवाड़ की प्राचीन राजधानी मंडोर की रहने वाली थी. उसका विवाह मंडोर में ही रावण के साथ हुआ था. मंडोर में दोनों के विवाह के दौरान फेरे लिए जाने का स्थान भी है. वहीं, जोधपुर में रावण व मंदोदरी का एक मंदिर भी बना हुआ है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए राजीव गौड़ की रिपोर्ट

दशहरा का पर्व आज, लेकिन आज नहीं होगा रावण, कुम्भकरण और मेघनाथ का दहन 

 दशहरा का पर्व आज, लेकिन आज नहीं होगा रावण, कुम्भकरण और मेघनाथ का दहन 

जयपुर: देश के जाति एवं गौरव को बढ़ाने वाले उसकी महान संस्कृति की परम्पराओं और भीत्तरी ऊर्जा के प्रतीक विभिन्न त्यौहार मनाए जाते हैं. शरद ऋतु के एक ऐसे ही विशिष्ट त्यौहारों में से एक है दशहरा. यह आश्विन मास की शुक्ला दशमी को बड़े उत्साह ,उल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते जिला प्रशासन और नगर परिषद के संयुक्त तत्वाधान में हर साल आयोजित होने वाला दशहरे मेले का इस बार आयोजन नहीं होगा.

आमजन के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मेले पर लगाई रोक:
जिला प्रशासन ने इस बार कोरोना संक्रमण के हालात को काबू में रखने और आमजन के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इस मेले पर रोक लगाई है. ऐसे में इस बार दशहरे पर हर साल की भांति स्थानीय शहीद पूनम सिंह स्टेडियम में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन और आतिशबाजी नहीं होगी. कलेक्टर आशीष मोदी ने बताया कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सबसे अधिक आवश्यक है सतर्कता. कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बेहद जरूरी है. 

{related}

जिले में दशहरे मेले का आयोजन स्थगित:
एक दूसरे से दूरी बनाकर ही कोरोना वायरस के संक्रमण पर रोक लगाई जा सकती है. ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करने के लिए जिले में दशहरे मेले का आयोजन स्थगित किया गया है. साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि, कोरोना महामारी को देखते हुए दशहरा और दीपावली का त्यौहार अपने परिवार के साथ सुरक्षित तरीके से घर में ही मनाएं. गौरतलब है कि हर बार जैसलमेर में बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व दशहरे के अवसर पर शहीद पूनम सिंह स्टेडियम में मेले का आयोजन होता था. जिसमें अन्य जिलों से आए कारीगरों द्वारा निर्मित रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के आदमकद के पुतलों का दहन किया जाता था. साथ ही इस मेले में भारी संख्या में लोगों पहुंचते थे.

...फर्स्ट इंडिया के लिए सूर्य​वीर सिंह तंवर की रिपोर्ट

Horoscope Today, 25 October 2020: आज का दिन इन राशियों के लिए रहेगा शानदार, पढ़ें दैनिक राशिफल

Horoscope Today, 25 October 2020: आज का दिन इन राशियों के लिए रहेगा शानदार, पढ़ें दैनिक राशिफल

जयपुर: दैनिक राशिफल चंद्र ग्रह की गणना पर आधारित होता है. राशिफल की जानकारी करते समय पंचांग की गणना और सटीक खगोलीय विश्लेषण किया जाता है. दैनिक राशिफल में सभी 12 राशियों के भविष्य के बारे में बताया जाता है. ऐसे में आप इस राशिफल को पढ़कर अपनी दैनिक योजनाओं को सफल बना सकते हैं. आइये अब जानते है की हमारे पढ़ने वाले बच्चे जो अब स्कूल एक्साम्स या बोर्ड एक्साम्स या किसी कॉम्पिटशन के तैयारी कर रहे है उनके लिए माता रानी क्या सन्देश लायी है..

मेष( Aries): - किसी बड़े काम की चिन्ता में आप अपने छोटे मोटे कामों की उपेक्षा नहीं करें. यह भी जरूरी है कि अपने सभी अधूरे काम जिसमें छोटा मोटा वक्त खर्च होता है उसे भी पूरा कर लें.

वृष( Taurus): -  आज  अपने दिल की आवाज को ही इंपॉर्टेंस दें. दोस्ती और दुनियादारी एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं.इनके बिना जिंदगी की गाड़ी नहीं चलती है.

मिथुन( Gemini): -  आप हमेशा ही आलस्य को छोड़ कर अपने काम पर लगे रहते हैं. इसी विशेष गुण की आपके अन्दर जो क्षमता विद्यमान है उसका फायदा भी आपको समय समय पर मिल ही जाता है. ऐसा ही कोई फायदा आज भी हो सकता है.

कर्क( Cancer): - घर में शांति बनाए रखना आपका पहला काम है. जीवनसाथी की सलाह भी ध्यान देने योग्य हो सकती है जिससे काम में आसानी होगी.

{related}

सिंह( Leo): - कुछ ऐसे सन्देश आपको मिल रहे हैं कि अब आपके अटके हुए काम जल्दी पूरे हो जायेंगे. इससे जहां आपकी चिन्तायें कम होंगी वहां कुछ आगे के लिए भी काम करने के अवसर मिलेंगे.

कन्या( Virgo): -छुट्टी के दिन भी आपको कभी-कभी छुट्टी नहीं मिल पाती है. इसका मुख्य कारण है कि आपको अपने काम और जॉब से बहुत लगाव है. कुछ ऐसे काम भी आपको देखने हैं जिनका संबंध घर के बुजुर्ग या अभिभावकों की जरूरत से है.

तुला( Libra): -कुछ ऐसे प्रसंग आज के दिन  आएंगे जिनको व्यवस्थित करने में आपको काफी माथापच्ची करनी होगी. यदि आप किसी वाहन की सवारी कर रहे हैं तो बेहतर होगा कि इसके कल-पुर्जों को जांच लें.

वृश्चिक( Scorpio): -अगर कोई लम्बा टूर या बिजनस टॉक का मौका मिले तो आप आंख बन्द कर इसे स्वीकार कर लें. हो सकता है किसी अच्छे तालमेल से अपनी माली हालत को सुधारने में सफलता मिल जाए.

धनु( Sagittarius): - सुबह-सबेरे ही घर के अन्दर बहस और किसी बवाल के चलते आज आप थोड़ा अपसेट रहेंगे. वैसे ऐसी स्थितियां घर में आती ही रहती हैं और आप अपने काम में बिजी भी रहते हैं.

मकर( Capricorn): - व्यस्तता होने के बावजूद कुछ समय आपको अपने फैमिली मेंबर्स को भी देना चाहिए और उनके करियर आदि के विषय में चिंता करनी चाहिए. तभी आपको अपने बड़े होने का संतोष प्राप्त होगा.

कुंभ( Aquarius): - अपने पुराने किस्म के कामकाज की दशा सुधारने के लिए आपको आज कुछ नया सोचना है। कुछ परफैक्शन की कमी भी नजर आएगी. हो सकता है कि आज आप इस कमी को दूर करने में सफल हो जाएं.

मीन( Pisces): - भविष्य को देखते हुए कुछ ऐसे काम करें जिससे आपको समय पर आर्थिक सहायता मिल सके. वैसे तो, ऐसा समय अभी नजदीक नहीं है फिर भी थोड़ा-थोड़ा करने से आगे चलकर सुरक्षा निश्चित होगी.

सौजन्य - राज ज्योतिषी पंडित मुकेश शास्त्री

25 अक्टूबर 2020: जानिए आज का पंचांग, ये रहेगा शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

25 अक्टूबर 2020: जानिए आज का पंचांग, ये रहेगा शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

जयपुर: पंचांग का हिंदू धर्म में शुभ व अशुभ देखने के लिए विशेष महत्व होता है. पंचाम के माध्यम से समय एवं काल की सटीक गणना की जाती है. यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभ मुहूर्त, शुभ तिथि, नक्षत्र, व्रतोत्सव, राहुकाल, दिशाशूल और आज शुभ चौघड़िये आदि की जानकारी देते हैं. तो ऐसे में आइए पंचांग से जानें आज का शुभ और अशुभ मुहूर्त और जानें कैसी रहेगी आज ग्रहों की चाल... 

शुभ मास-  द्वितीय आश्विन (शुद्ध  ) मास  शुक्ल  पक्ष:
शुभ तिथि नवमी रिक्ता संज्ञक तिथि प्रातः 7  बजकर 42  मिनट तक रहेगी. नवमी तिथि को विवाह आदि मांगलिक विवाह कार्य इत्यादि कार्य शुभ माने जाते हैं. नवमी तिथि मे जन्मे जातक  धनवान भाग्यवान ,गुणवान,पराक्रमी होते है.
धनिष्ठा "चर -ऊर्ध्व मुख " संज्ञक नक्षत्र रात्रि 4 बजकर 23  मिनट तक रहेगा.धनिष्ठा नक्षत्र मे मुंडन ,जनेऊ ,देव प्रतिष्ठा ,वास्तु,वाहन क्रय करना,विवाह ,व्यापर आरम्भ,बोरिंग,शिल्प ,विद्या आरम्भ इत्यादि कार्य विशेष रूप से सिद्ध होते है. धनिष्ठा  नक्षत्र मे जन्म लेने वाला जातक धनी ,साहसी, प्रसिद्ध , शौकीन , धनवान, बुद्धिमान होता है.

चन्द्रमा - दोपहर 3- 26 तक मकर राशि में तत्पश्चात  कुम्भ राशि में संचार करेगा  
व्रतोत्सव -    महानवमी, अपराजिता पूजन ,शमी पूजन,आयुध पूजन,दशहरा
राहुकाल -सायंकाल 4.30 बजे से 6 बजे तक
दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा मे दिशाशूल रहता है. यात्रा को सफल बनाने लिए घर से घी-दलिया खा कर निकले.
आज के शुभ चौघड़िये - प्रातः 8.00 से दोपहर 12-11 तक चर,लाभ व् अमृत , दोपहर 1-35 से दोपहर 2-58 तक शुभ का चौघड़िया  

सौजन्य - राज ज्योतिषी पंडित मुकेश शास्त्री

दशहरे पर रावण दहन नहीं उनकी पूजा-अर्चना करते हैं यहां के लोग

दशहरे पर रावण दहन नहीं उनकी पूजा-अर्चना करते हैं यहां के लोग

मथुरा: भारत में दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर जाना जाता है और इस दिन पूरे देश में रावण के पुतले का दहन किया जाता है.लेकिन जब दशहरे पर देश में रावण का दहन होता है उसी दिन कुछ लोग इनकी उपासना भी करते हैं.
 
दशहरे के दिन होती है रावण की पूजा-अर्चनाः
दशहरे के अवसर पर देश भर में बुराई का प्रतीक माने जाने वाले रावण का पुतला जलाया जाता है, लेकिन भगवान कृष्ण की नगरी में एक वर्ग ऐसा भी है जो रावण का पुतला जलाने का विरोध करता है और उस दिन रावण की पूजा-अर्चना करता है. ब्राह्मण समाज के सारस्वत गोत्र के लोगों ने रावण के प्रति अपनी आस्था दर्शाने के लिए लंकेश भक्त मंडल का गठन कर रखा है जो पिछले दो दशक से रावण के पुतले दहन करने का विरोध करता आ रहा है. 

रावण, भगवान महादेव के परम भक्त थे और बहुत ही विद्वान थे इसलिए लोग करते हैं नमनः 
लंकेश भक्त मंडल के संयोजक ओमवीर सारस्वत का कहना है कि संगठन के लोग हर वर्ष दशहरे के मौके पर मथुरा के सदर क्षेत्र में यमुना किनारे स्थित एक शिव मंदिर में रावण की पूजा करते हैं. इस वर्ष भी लंकेश भक्त मंडल के सदस्य रविवार को दोपहर बारह बजे रावण की पूजा करेंगे. उन्होंने कहा कि महाराज रावण भगवान महादेव के परम भक्त थे और बहुत ही विद्वान थे, इसीलिए वे लोग उनका नमन करते हैं. प्रकांड विद्वान होने के नाते किसी को भी उनका पुतला दहन नहीं करना चाहिए, इसलिए वे उनके पुतले जलाए जाने का विरोध करते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा करना किसी भी विद्वान के अनादर के समान है और एक ब्राह्मण के मामले में तो यह ‘‘ब्रह्महत्या’’ सरीखी है.

हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार मृत व्यक्ति का पुतला दहन करना उसका अपमान करने जैसाः 
सारस्वत ने कहा कि वैसे भी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार मृत व्यक्ति का पुतला दहन करना अपमान करने समान है जिसकी कानून भी इजाजत नहीं देता. सारस्वत ने कहा कि हमारे संविधान में भी किसी की भी धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचाना दंडनीय अपराध है, समाज का एक वर्ग दशानन के पुतले दहन कर दूसरे वर्ग की धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाता है और इसे रोका जाना चाहिए.
सोर्स भाषा

Durga Ashtami 2020: राजस्थान में यहां देवी ने खुद प्रकट होने की जताई थी इच्छा, आज भी हजारों लोगों को मिल रहा रोजगार

Durga Ashtami 2020: राजस्थान में यहां देवी ने खुद प्रकट होने की जताई थी इच्छा, आज भी हजारों लोगों को मिल रहा रोजगार

डीडवाना(नागौर): नवरात्र पर्व का आज अंतिम दिन है बीते नौ दिनों से आदि शक्ति के अलग अलग रूपों की पूजा कर देवी की आराधना कर नवरात्रि पर्व मनाया जा रहा है. नागौर जिले के डीडवाना स्थित नमक झील में बने महिषासुर मर्दिनी के ऐतिहासिक मंदिर में भी देवी मां की बीते नौ दिनों से भक्ति और आराधना चल रही है. डीडवाना के पाढ़ाय माता मंदिर के निर्माण और देवी के प्रकट होने को लेकर आज हम आपको बताएंगे कहानी...

देवी ने यहां खुद प्रकट होने की इच्छा जताई: 
आज से ठीक 1200 वर्ष पूर्व यहां जंगल और मैदान था और यहां एक केर का झाड़ था उसमें देवी मां आठ नौ साल की बच्ची के रूप में रहती थी. शहर के सेठ भैरवलाल सारड़ा की गाए चराने यहां एक ग्वाला गाये चराने आता था देवी मां यहां गायों का दूध पी जाती थी. जब सेठ को पता चला कि एक आठ नौ साल की बच्ची गायों का दूध पी जाती है तो खुद अपना घोड़ा लेकर देखने आए. और देवी स्वरूप बच्ची से संवाद किया तो देवी ने यहां प्रकट होने की इच्छा जताई. किवदंती है कि देवी ने कहा तुम जितनी दूर यहां से अपनी गाय और घोड़ा लेकर दौड़ोगे उतनी दूर में चांदी की खान बन जाएगी लेकिन पीछे मुड़कर मत देखना पीछे से केर से देवी गर्जना के साथ प्रकट हुई तो सेठ ने गर्जना सुनकर डर के मारे पीछे देखा कहा जाता है कि जंगल चांदी की खान में बदल गया.  सेठ ने देवी से प्राथना की कि देवी मां यहां चांदी के लिए दुनिया लड़ लड़ कर मर जाएगी और राजा मुझे जेल में डाल देंगे. सेठ ने कहा कि देवी मा यहां लाखों लोगों को रोजगार मिले ऐसा कोई काम कर दो तो देवी मां ने आशीर्वाद दिया कि कच्ची चांदी के रूप में यहां नमक की खाने बन जाएगी जो आज नमक झील के रूप में विधमान है और हजारों लोग यहां मजदूरी कर अपना पेट पालते हैं. 

{related}

गुर्जर प्रतिहार कालीन शैली का बना हुआ ऐतिहासिक मंदिर: 
यहां निर्मित मंदिर गुर्जर प्रतिहार कालीन शैली का बना हुआ ऐतिहासिक मंदिर है. जो पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित भी किया गया है. यह गुर्जर प्रतिहारों के शांतिकाल में बना हुआ मंदिर है मुख्य द्वार पर भगवान विष्णु की शयन मुद्रा में मूर्ति विराजित है. मंदिर के दक्षिण भाग में नृत्य गणेश की मूर्ति लगी हुई है. मंदिर परिक्रमा के पूर्व भाग में भगवान नटराज की नृत्य मुद्रा में विशाल प्रतिमा लगी हुई है. तो दक्षिण भाग में देवी माँ महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति लगी हुई है. मंदिर की मूर्तियां सब शांतिकाल और प्रसन्न मुद्रा की होने से यही कहा जाता है कि मंदिर शांतिकाल में बना हुआ है लेकिन औरंगजेब सहित कई आक्रांताओं ने यहां मन्दिर को तोड़ने का असफल प्रयास भी किया गया उसके निशान आज भी मंदिर की बाहरी मूर्तियों पर दिखाई देते है कई मूर्तियों को खंडित किया गया था. 

कोविड गाइडलाइन की पालना में आयोजन रद्द: 
मंदिर में सालभर में तरह तरह के आयोजन होते रहते हैं उनमें नवरात्र भी एक है. नवरात्र में यहां विशेष आयोजन होते रहते है. लेकिन इस बार कोविड की वजह से गाइडलाइन की पालना में आयोजन रद्द किए गए है. एक एक श्रद्धालु को ही अंदर दर्शन के लिए प्रवेश दिया जा रहा है.

...फर्स्ट इंडिया न्यूज के लिए डीडवाना (नागौर) से संवाददाता नरपत ज़ोया की रिपोर्ट

जोधपुर: कोरोना संक्रमण के प्रति जागरूकता का संदेश देता नजर आएगा रावण, बनेगा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक

जोधपुर: कोरोना संक्रमण के प्रति जागरूकता का संदेश देता नजर आएगा रावण, बनेगा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक

जोधपुर: कोरोना ने इस बार सदियों से चली आ रही रावण दहन की परम्परा पर विराम लगा दिया है. रावण के ससुराल जोधपुर में इस बार विजयादशमी के अवसर पर रावण का दहन नहीं किया जाएगा. मगर जोधपुर के गली और मोहल्लों की बात करे तो वहां पर रावण दहण को लेकर बच्चों से लेकर बड़ों में उत्साह देखा जा रहा है. जोधपुर के कमला नेहरू नगर हुडको क्वार्टर की बात करे तो वहां पर बच्चों ने मिलकर रावण दहन पर बेस्ट फ्रॉम वेस्ट आईटम्स से ना केवल रावण का पुतला बनाया है बल्कि कोरोना के चलते रावण को मास्क भी पहनाया गया है और कोरोना के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया है.

गली और मोहल्लों में जोर-शोर से चल रही रावण दहन की तैयारियां:  
कल विजयादशमी का पर्व है और ऐसे में रावण दहन को लेकर राजस्थान सरकार द्वारा किसी प्रकार की कोई गाइड लाइन फिलहाल जारी नहीं की गई है ऐसे में रावण दहन इस बार जोधपुर में नही मनाया जाएगा मगर गली और मोहल्लों की बात करे तो वहां पर रावण दहन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है. जोधपुर के कमला नेहरू नगर हुडको क्वार्टर स्थित मोहल्ले में बच्चों की टीम  ने तो बेस्ट फॉर्म वेस्ट आइटम्स से एक अनूठा 6 फिट का रावण तैयार किया है जो ना केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है बल्कि इसके साथ ही कोरोना संक्रमण के प्रति जागरूकता का भी संदेश देता नजर आएगा. यह रावण का पुतला बनकर तैयार हो गया है जिसमें बच्चों ने काफी मेहनत से बनाया है जिसपर छोटे छोटे कोरोना के सिम्बल लगाने के साथ ही कोरोना को हराना है देश को बचाना है का संदेश भी लिखा गया है. 

{related}

कोरोना के प्रति जागरूकता का संदेश देता नजर आएगा:
अब कल विजय दशमी के पर्व पर जब यह रावण जलेगा तो लोगों को कोरोना के प्रति जागरूकता का संदेश देता नजर आएगा. पुतला बनाने वाले बच्चों ने बताया कि जोधपुर में कोरोना के चलते इस बार रावण दहन नहीं होगा इसलिए हमारी पूरी बच्चों की टीम ने सोचा कि मोहल्ले में ही रावण का दहन करेंगे इसमें हमने बेस्ट फॉर वेस्ट से इस रावण को बनाया है. बेसट फॉर वेस्ट के तहत हमने इसमें कारबोट, मटकी, लकडी के अलावा ऐसे कई वेस्ट आइटम्स का इस्तेमाल करते हुए हमने यह 6 फिट का रावण बनाया है. कोरोना हमारे देश और विश्व से पूरी तरह खत्म हो जाए इसलिए हमने कोरोना की ड्राइंग करके इस रावण पर चिपकाया है जिससे रावण के साथ-साथ कोरोना भी खत्म होगा.