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सरकारी आवासों पर कब्जा करने वाले 106 पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुई एफआईआर

सरकारी आवासों पर कब्जा करने वाले 106 पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुई एफआईआर

बरेली। ऐसा लगता है कि पुलिसवालों में सीएम योगी का कोई खौफ नहीं है। बरेली में सैंकड़ो पुलिसकर्मी सरकारी आवासों पर सालों से कुंडली जमाये बैठे है। सरकारी आवासों पर कब्ज़ा करने के कारण 106 पुलिस वालों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इतनी बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

एसएसपी मुनिराज की फटकार के बावजूद भी जब पुलिसकर्मियों ने सरकारी आवास खाली नहीं किये। जिसके बाद एसएसपी ने एसपी सिटी को आदेश दिया कि वो ऐसे पुलिसवालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करे। जिसके बाद एसपी सिटी की तरफ से सात अलग अलग थानों में 106 पुलिसवालों पर एफआईआर दर्ज की गई है। किला, सुभासनगर, प्रेमनगर, इज़्ज़तनगर, कोतवाली, बारादरी और कैंट थाने में 106 पुलिसवालों पर एफआईआर दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटो में बरेली के अलग अलग थानों में इतनी बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज होने से पुलिसकर्मी काफी डरे हुए हैं।

इन सभी पुलिसवालों का सालों पहले ट्रांसफर हो चुका है। लेकिन ये पुलिस वाले सरकारी आवासों का मोह त्याग नहीं सके। जिस वजह से इन सभी पुलिसवालों पर एफआईआर दर्ज की गई है। एसपी सिटी अभिनन्दन सिंह ने बताया कि जिन 106 पुलिसवालों पर मुकदमा दर्ज हुआ है। उन सभी को पहले कई बार नोटिस दिए गए लेकिन पुलिसवालों ने सरकारी आवास खाली नहीं किये। पानी सर से ऊपर हो जाने की वजह से आईपीसी की धारा 447 और 29 पुलिस एक्ट के तहत शहर के 7 थानों में पुलिसवालों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
 

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बरेली(यूपी): कोरोना संकट में बच्चों के लिए पत्नी के बार-बार पड़ोसियों और रिश्तेदारों से मदद मांगना महंगा पड़ गया. शर्मिंदगी के चलते पति ने इस कदर अपना आपा खोय कि उसने पहले तो पत्नी की जनकर पिटाई की और उसके बाद उसे तीन तलाक देकर बच्चों के साथ घर से निकाल दिया. एजाज नगर गौटिया में रहने वाली एक युवती की शादी करीब दस साल पहले इलाके के एक युवक से हुई थी. 

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परिचितों से मदद मांगना पति को अच्छा नहीं लगता था:
युवती के अनुसार पति मेलों में झूले लगाने का काम करता हैं. युवती के अनुसार लॉकडाउन में धंधा ठप होने की वजह से परिवार पालने में परेशानियां हो रही थीं. बच्चों को भूखा देखकर उसने पिछले दिनों कई बार रिश्तेदारों और पड़ोसियों से मदद मांगी थी. ऐसे में परिचितों से मदद मांगना पति को अच्छा नहीं लगता था. इसी के चलते वह कई बार उससे गालीगलौज भी कर चुका था. 

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पति ने गुस्से में तीन तलाक दे दिया:
बुधवार रात भी घर में जब राशन खत्म हो गया था. रात तो किसी तरह काट ली लेकिन सुबह वह पड़ोस में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार के यहां राशन मांगने चली गई थीं. वहां से लौटी दरवाजे पर खड़े पति ने उसे पीटना शुरू कर दिया. शोर सुनकर आसपास के लोगों ने बीच बचाव किया तो पति ने गुस्से में तीन तलाक दे दिया और बच्चों के साथ धक्का देकर घर से निकाल दिया. इसके बाद वह अगली गली में ही रने वाली अपने बहन के घर चली गई. 

रामपुर में आतंकी हमले के मामले में 12 साल बाद बेकसूर गुलाब की हुई रिहाई

रामपुर में आतंकी हमले के मामले में 12 साल बाद बेकसूर गुलाब की हुई रिहाई

बरेली: देश के सबसे चर्चित रामपुर सीआरपीएफ कैम्प पर 2007 में हुए आतंकी हमले के मामले में गुलाब खान को अपनी बेगुनाही साबित करने में तकरीबन 12 बरस लग गए. अदालत ने कल गुलाब के साथ एक और आरोपी कौसर को भी बरी कर दिया. गुलाब बरेली की सेंट्रल जेल में कैद थे और उसकी रिहाई का परवाना अदालत से जेल भेजने के बाद हुई. 

2008 में एटीएस की टीम ने किया गिरफ्तार:
बहेड़ी के मोहल्ला शाहगढ़ के निवासी गुलाब खान को 8 फरवरी 2008 को एटीएस की टीम ने सवेरे 6 बजे उसके घर से ही उठाया था. एटीएस के साथ बहेड़ी कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर भी थे. गुलाब को घर से उठाते वक़्त पुलिस की टीम ने उसके बरेली में झगड़ा होने की बात बताते हुए बहेड़ी थाने ले जाने की बात बताई थी, घर वाले जब थाने पहुंचे तो बताया गया कि उसको रामपुर एटीएस ले गई है. गुलाब के भाई कमल के मुताबिक वह कई दिन तक रामपुर में भटकते रहे, लेकिन उनको किसी ने कुछ नहीं बताया. बाद में पता चला कि गुलाब को सीआरपीएफ पर हुए आतंकी हमले में आरोपी बनाया गया है. कमल ने कहा कि हमें जब यह पता चला तो हमारे होश उड़ गए. हमने कहा कि हमारा भाई बेकसूर है, इस बात को लेकर परिवार व क्षेत्र में दहशत का माहौल छा गया. उस वक्त गुलाब पर आरोप लगाया गया था कि गुलाब का साला शरीफ हथियार लेकर हमारे घर आया था और उसने यहां हथियार रखे थे. कमल ने कहा कि यह आरोप सरासर गलत था. हम चीख चीख कर यह बात कहते रहे. अपनी बात कहने को धरना-प्रदर्शन भी किए, लेकिन हमारी कुछ नहीं सुनी गई. कमल ने कहा कि फिर हमने अदालत में अपने भाई के निर्दोष होने की बात रखी और हमें खुशी है कि हमारी बात पर अदालत ने मोहर लगा दी. 

6 दिन बाद पता चली गिरफ्तारी की वजह:
गुलाब खान का कहना है जब मुझे घर से ATS ने उठाया था तो उन्हें यह नहीं बताया गया कि किस केस में पकड़ा गया है. सिर्फ इतना ही कहा गया कि आपका बरेली में झगड़ा हुआ, उस केस में तुम्हें चलना है और पूछताछ करके छोड़ देंगे. फिर मुझे बहेड़ी थाने लाया गया. रात में रामपुर तक कई जगह रोका और बन्द रखा फिर बरेली जेल में लाकर बंद कर दिया. मैंने कई बार पूछा कि मेरा जुर्म तो बताओ कि मैने क्या किया है, मुझे फिर भी नहीं बताया गया कि मैने क्या जुर्म किया है. फिर 6 दिन बाद पता चला तो मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई कि उसको रामपुर में हुए आतंकी हमले में गिरफ्तार किया गया है. गुलाब ने बताया कि उस वक्त 8 महीने का लड़का, 3 साल और 5 साल की लड़की, 3 मासूम बच्चें थे.

गुलाब ने सरकार से की आर्थिक सहायता की मांग:
गुलाब ने कहा कि मैं सरकार से मांग करता हूं कि मेरा 12 बरस में सब कुछ बर्बाद हो गया और मुझे आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए, जिससे मैं अपने बच्चों को पड़ा लिखा सकूं और पालन पोषण करने का कोई ज़रिया बना सकूं. 

रामपुर न्यायालय ने आतंकवादियों को सुनाई सज़ा:
रामपुर न्यायालय एडीजी 3 ने 4 आतंकियों को सज़ा सुनाई, जिसमें आतंकी मौहम्मद शरीफ, मौहम्मद फारूक, सलाउद्दीन, इमरान शहज़द को फाँसी की सज़ा सुनाई गई है. जबकि जंग बहादुर को आजीवन कारावास और फहीम अंसारी को 10 वर्ष की सज़ा सुनाई गई. 

1. इमरान शहजाद - धारा 148, 149, 302, 307, 333, 121, 3 /4 लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 16,20 यूएपी एक्ट, 27 (3) शस्त्र अधिनियम. 
2. मुहम्मद फारुख - धारा 148, 149, 302, 307, 333, 121, 3 /4 लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 16,20 यूएपी एक्ट, 27 (3) शस्त्र अधिनियम.  
3. जंग बहादुर बाबा - धारा 148, 149, 302, 307, 333, 121, 3 /4 लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 16,20 यूएपी एक्ट. 
4. मुहम्मद शरीफ उर्फ सुहेल - धारा 148, 149, 302, 307, 333, 121, 3 /4 लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 16,20 यूएपी एक्ट, 27 (3) शस्त्र अधिनियम, 5 (बी) विस्फोटक पदार्थ अधिनियम. 
5. सलाउद्दीन- धारा 148, 149, 302, 307, 333, 121, 3 /4 लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 16,20 यूएपी एक्ट, 27 (3) शस्त्र अधिनियम. 
6. फहीम अंसारी - धारा 420, 467, 468, 471, 200 आइपीसी, 25 (1) (ए) शस्त्र अधिनियम. 

... बरेली से अयाज़ खान की रिपोर्ट


 

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