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बाबा रामदेव मेले को लेकर श्रद्धालुओं के सिर चढ़कर बोल रही आस्था, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

बाबा रामदेव मेले को लेकर श्रद्धालुओं के सिर चढ़कर बोल रही आस्था, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जोधपुर: कल से भरने वाले बाबा रामदेव मेले को लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह,श्रद्धा और आस्था सिर चढ़कर बोल रही है. यही नतीजा है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र,बिहार और अन्य राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मसूरिया स्थिल बाबा रामदेव मंदिर में दर्शन कर चुके है और श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है. पुलिस कमिश्नर प्रफुल्ल कुमार लगातार व्यवस्थाओं पर नजर रखे हुए है. 

बाबा रामदेव का प्राकट्य दिवस कल मनाया जाएगा: 
सामाजिक समरसता और साम्प्रदायिक एकता के प्रतीक लोकदेवता बाबा रामदेव का प्राकट्य दिवस भादवा सुदी बीज कल मनाया जाएगा. मसूरिया स्थित बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथ के समाधि मंदिर में कल सुबह 4.15 बजे 108 ज्योत से शृंगार आरती की जाएगी. मसूरिया बाबा रामदेव मंदिर का संचालन करने वाले पीपा क्षत्रिय समस्त न्याति सभा ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्र चौहान के नेतृत्व में मंदिर तमाम आवश्यक तैयारिया पूरी कर ली गई है,15 दिन पहले ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो चुका है. मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों से लेकर सफाई इत्यादी व्यवस्थाएं जहां ट्रस्ट उपाध्यक्ष शिवप्रसाद दइया देख रहे है वही मंदिर परिसर में निगरानी और किसी भी अप्रिय घटना रोकने के लिए 55 सीसी टीवी कैमरे आरंभ किए गए हैं.

यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था: 
मंदिर में जातरुओं को सुगम दर्शन के लिए करीब 250 स्वयंसेवक ट्रस्ट द्वारा तैनात किए गए है. मसूरिया बाबा बालीनाथ मंदिर में गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित राजस्थान से पैदल, दुपहिया वाहनों और लोडिंग टैक्सियों, ट्रेक्टरों में यात्रियों के पहुंचने का क्रम 24 घंटे निरंतर जारी है. वही मेले को लेकर मसूरिया स्थित बाबा रामदेव मेले को लेकर आस-पास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है. दल्ले खां की चक्की चौराहे से 12वीं रोड चौराहे तक वाहनों का आवागमन बंद है. यातायात पुलिस के अनुसार आठ सितम्बर तक यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है. इस दौरान वैकल्पिक मार्गों से वाहनों को निकाला जा रहा है. मंदिर परिसर का जायजा लेने के बाद पुलिस कमिश्नर प्रफुल्ल कुमार और डीसीपी प्रीति चंद्रा ने बताया कि वदी के अलावा सादे वस्त्रों में अधिकारी और जवान तैनात है. किसी भी प्रकार से कोई अव्यवस्था नही हो और कोई चूक ना हो उसके लिए पूरी सावधान बरती जा रही है.  

सुरक्षा और गुफ्तचर एजेंसिया चाक चौबंद: 
गौरतलब है कि कुछ सालों पहले जोधपुर के मेहरानगढ़ किले में नवरात्रा के दौरान भगधड़ मचने से हुए हादसे में 216 लोगों की जान चली गई थी उसके बाद चौपड़ा आयोग की अध्यक्ष जस्टिस चौपड़ा ने प्रदेश के सभी भीड़ वाले मंदिरों का जायजा लेकर उसी अनूरूप व्यवस्था करवाई थी जिसमें मसूरिया स्थित बाबा रामदेव मंदिर भी शामिल था. चूंकि मसूरिया स्थित बाबा रामदेव मंदिर में अब तक पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालु आ चुके है और अभी दस से 15 लाख श्रद्धालु और आने है उस लिहाज से सभी सुरक्षा और गुफ्तचर एजेंसिया चाक चौबंद है.  

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जम्मू कश्मीर: बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए खुशखबरी है. जी हां बाबा अमरनाथ यात्रा शुरू होने वाली है. जानकारी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा 21 जुलाई से शुरू होकर 3 अगस्त को तक चलेगी. ये 15 दिनों की अवधि की होगी. यह जानकारी श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने दी. यात्रा के लिए प्रथम पूजा शुक्रवार को आयोजित की गई थी. कोरोनावायरस महामारी की वजह से इस बार यात्रा की अवधि में कटौती की गई है.

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इन नियमों का करना होगा पालन:
साधुओं को छोड़कर अन्य तीर्थयात्रियों में 55 साल से कम उम्र के श्रद्धालुओं को ही अनुमति होगी. साधुओं को छोड़कर सभी तीर्थयात्रियों को यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा. यात्रा करने वाले सभी लोगों के पास कोरोना वायरस का निगेटिव प्रमाणपत्र होना जरूरी है. श्रद्धालुओं को जम्मू-कश्मीर में यात्रा शुरू करने की अनुमति देने से पहले उनको वायरस के लिए क्रॉस-चेक होगा. स्थानीय मजदूरों की कमी और बेस कैंप से गुफा मंदिर तक ट्रैक में कठिनाइयों के चलते हेलिकॉप्‍टर का इस्तेमाल होगा. 

उत्तरी कश्मीर बालटाल मार्ग से होकर निकलेगी यात्रा:
तीर्थ यात्रा में गांदरबल जिले में बालटाल बेस कैंप से गुफा तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर का यूज होगा. अमरनाथ यात्रा केवल उत्तरी कश्मीर बालटाल मार्ग से होकर निकलेगी. इस वर्ष किसी भी तीर्थयात्री को पहलगाम मार्ग से यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी. अधिकारियों ने यह भी तय किया गया है कि 15 दिनों के दौरान सुबह और शाम गुफा मंदिर में की जाने वाली ‘आरती’ का देशभर के भक्तों के लिए सीधा प्रसारण होगा. 

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नौ ग्रहों में सबसे ताकतवर शनिदेव की कृपा पाने के लिए करें यह उपाय, दूर होंगी सभी समस्याएं

नौ ग्रहों में सबसे ताकतवर शनिदेव की कृपा पाने के लिए करें यह उपाय, दूर होंगी  सभी समस्याएं

जयपुर: शनिवार का दिन शनिदेव के पूजन का दिन है. मान्यता है की इंसान के जीवन में करे गए अच्छे और बुरे कामों का फल शनिदेव ही देते है. सभी नौ ग्रहों में सबसे ताकतवर शनि को ही माना जाता है, ऐसे में ज्योतिष अनुसार जिसकी कुंडली में शनि ग्रह की स्तिथि ठीक नहीं होती उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन वही यह ग्रह सही दशा में हो तो हर क्षेत्र में सफलता मिल सकती है. तो आइये आपको बताते हे शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय यह उपाय शनिवार को ही किये जाने चाहिये.

आज के दिन दान जरूर करें आज काले तिल, काला कपड़ा, कंबल, लोहे के बर्तन, उड़द की दाल का दान करें इससे शनिदेव खुश होंगे और फल भी देंगे.

शास्त्रों के अनुसार सरसों के तेल का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है यह शनिदेव की प्रिय चीजों में से एक है जिन लोगों को शनि की दशा के कारण सफलता नहीं मिल पा रही है यदि वे शनिवार के दिन लोहे के बर्तन में सरसों का तेल और उसमें एक सिक्का डालकर किसी निर्धन व्यक्ति को दान करें तो उन्हें सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती है. 

बंदर हनुमान जी का रूप होते हैं तो ऐसे में बंदरों को गुड़ और चने खिलाए प्रत्येक शनिवार हनुमान चालीसा का पाठ करें हनुमान जी का पूजन करने से व्यक्ति को शनि दोषों का सामना नहीं करना पड़ता.

शनिदेव की पसंदीदा चीजों में से एक है काली उड़द की दाल शनि के प्रभाव के कारण जिन लोगों को धन संबंधी परेशानियां होती है उन्हें काली उड़द की दाल या काले तिल का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जरूर करना चाहिए इस तरह किए गए दान से आर्थिक समस्याएं समाप्त हो जाती है.

लोहा शनिदेव का बहुत अधिक प्रिय है इसलिए शनिदेव के लिए किए जाने वाले दान में लोहे के बर्तन का दान खास महत्व रखता है, शनि की दशा के प्रभाव को कम करने के लिए लोहे के बर्तनों का दान करना शुभ माना जाता है शनिवार के दिन शाम के समय किसी जरूरतमंद व्यक्ति को लोहे का बर्तन दान करना चाहिए.

काला रंग शनिदेव को बहुत अधिक प्रिय है शास्त्रों के अनुसार जो लोग शनिदेव की कृपा पाना चाहते हैं उन्हें काले रंग की वस्तुएं अर्पित करने से जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं शनिवार को काले रंग के पशु-पक्षियों को भोजन कराने और काली चीजों का दान करने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है.   

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जयपुर: आज रात साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने वाला है. यह ग्रहण वास्तविक चंद्र ग्रहण ना होकर एक उपछाया चंद्र ग्रहण होगा. इस ग्रहण का कोई अशुभ प्रभाव नहीं माना गया. इसके साथ ही उप छाया ग्रहण का कोई सूतक भी नहीं लगता है. आज लगने वाला उपछाया चंद्र ग्रहण रात में 11 बजकर 11 मिनट से शुरू होगा और रात में 2 बजकर 34 मिनट पर खत्म होगा. ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जो चंद्रग्रहण के बाद करना शुभ माने जाते हैं.

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- चंद्रग्रहण के बाद मंदिर को साफ-सुथरा करके यदि आपके घर में भगवान की प्रतिमा है तो उन्‍हें गंगाजल से स्नान करके नए वस्त्र पहनाएं. उसके बाद पूजा करके भोग लगाएं और खुद भी अन्न और जल ग्रहण करें. 

- चंद्रग्रहण के बाद सफेद वस्‍तुओं का दान करना मंगलकारी होता है. ग्रहण के बाद गुरुजनों, ब्राह्मणों और पुरोहितों एवं जरूरतमंदों को दान करना चाहिए. 

- राणों में चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण के बाद स्‍नान को बेहद आवश्‍यक बताया गया है. एक बात का ध्‍यान रखें कि स्‍नान कपड़े पहनकर करें. शास्‍त्रों में नग्‍न होकर स्‍नान करना वर्जित बताया गया है. 

- ग्रहण के बाद घर में हर जगह गंगाजल का छिड़काव करें. साथ ही पूजा स्‍थल को भी पवित्र करें और सभी मूर्तियों पर गंगाजल छिड़कें. 

- चंद्रग्रहण के बाद रात के बचे हुए पके भोजन को न खाएं. आप चाहें तो इसे सुबह पशुओं को खिला सकते हैं. 

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गुरुवार को भूलकर भी नहीं करने चाहिए ये 4 काम, जानिए क्यों?

गुरुवार को भूलकर भी नहीं करने चाहिए ये 4 काम, जानिए क्यों?

जयपुर: घर के बड़े बुजुर्ग कुछ काम गुरुवार के दिन नहीं करने की सलाह देते है, ब्रह्मांड में स्थित नौ ग्रहों में से गुरु वजन में सबसे भारी ग्रह है इसलिए गुरुवार का विशेष महत्व है. इस दिन हर वो काम जिससे कि शरीर या घर में हल्कापन आता हो, ऐसे कामों को करने से मना किया जाता है क्योंकि ऐसा करने से गुरु ग्रह हल्का होता है. तो आइये जानते है कोनसे हे वो 4 काम जो गुरुवार को कतई नहीं करने चाहिए...

बाल धोना: बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है. शास्त्रों में गुरुवार को महिलाओं को बाल धोने से इसलिए मनाही की गई है क्योंकि महिलाओं की जन्म कुंडली में बृहस्पति पति का कारक होता है साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक होता है. बृहस्पतिवार को सिर धोने से बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी होती है. 

नेल कटिंग और शेविंग: शास्त्रों में गुरु ग्रह को जीव कहा गया है, जीव मतलब आयु. गुरुवार को नेल कटिंग और शेविंग करना गुरु ग्रह को कमज़ोर करता है, जिससे की आपकी आयु पर असर पड़ता है. 

घर में किए गए कार्य: बृहस्पति का प्रभाव घर और शरीर दोनों पर रहता है. वास्तु के अनुसार घर में ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है, ईशान कोण का संबंध परिवार के बच्चो से होता है. ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है, घर में अधिक वजन वाले कपड़ो को धोना, कबाड़ घर से बहार निकालना या घर को धोना ईशान कोण को कमजोर करता है. 

रुक सकती है तरक्की: जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से कामयाबी के रास्ते आसानी से खुलते है. किसी भी जन्म कुंडली में दूसरा और ग्यारहवां भाव धन के  स्थान होते हैं. गुरु ग्रह इन दोनों ही स्थानों का कारक ग्रह होता है, गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है. ऐसे में आपको सिर धोना, नेल कटिंग, शेविंग, अधिक वजन वाले कपड़ो को धोना, पोछा लगाने ऐसे कामो से बचना चाहिए.  

बुधवार के दिन करें यह 5 उपाय, दूर होंगे आपके सारे दोष

बुधवार के दिन करें यह 5 उपाय, दूर होंगे आपके सारे दोष

जयपुर: बुधवार का दिन बुध देव को समर्पित है और यदि इस दिन भगवान गणेश की भी पूजा की जाए तो अत्‍यंत लाभ की प्राप्‍ति होती है. गणेश जी सभी देवता में प्रिय देवता माने जाते है.  प्रथम पूज्य गणेशजी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है, तो ऐसे में आप भी बुधवार के दिन ये 5 विशेष उपाय करके अपने सारे दोष दूर कर जीवन में सकारात्‍मकता ला सकते है. आइये जानते हे उन 5 विशेष उपाय के बारे में...

पहला उपाय: 
गाय को पूजनीय और पवित्र माना गया है. बुधवार के दिन गाय माता को हरी घास खिलानी चाहिए. माना जाता है कि गौ माता की सेवा से सभी देवी-देवताओं प्रसन होते है और उनकी कृपा बनी रहती है.

दूसरा उपाय: 
अगर आप जिस काम को करने की कोशिश करते हैं या फिर हर काम में आपको असफलता मिलती है, तो बुधवार के दिन गणेश के मंत्र 'ओम गं गणपतये नमः' का जाप विधि विधान से करें आपको सभी कष्टों से निजात मिल जायेगा.

तीसरा उपाय: 
किसी जरूरतमंद व्यक्ति को या किसी मंदिर में हरे मूंग का दान करें, मूंग बुध ग्रह से संबंधित अनाज है, इसका दान करने से बुध ग्रह के दोष शांत होते हैं. इसे आपके जीवन में समृद्धि आती है. 

चौथा उपाय: 
गणेश जी को मोदक बहुत ही प्रिय है, बुधवार को गणपति बप्पा की पूजा में मोदक का भोग अवश्य लगाए आपकी हर मनोकामना पूरी होगी.

पांचवा उपाय:
धन संबंधित समस्या के लिए बुधवार के दिन श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा करने के बाद गुड़ और घी का भोग लगाएं और थोडी देर बाद यह भोग गाय को खिला दें. इससे आपको काफी फायदा मिलेगा.

निर्जला एकादशी पर बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार, भक्तों के लिए पट रहे बंद

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सीकर: आज निर्जला एकादशी का पर्व है, लेकिन कोरोना संकट के बीच सारे उत्सव रद्द है, तो ऐसे में लोग निर्जला एकादर्शी का पर्व घरों में ही मना रहे है. निर्जला एकादशी पर बाबा श्याम की विशेष पूजा आराधना हुई. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पुजारियों ने बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार के आराधना की. लेकिन श्याम प्रेमी इस बार निर्जला एकादशी पर दर्शन नहीं कर पाये. 

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श्याम प्रेमियों को नहीं हुए दर्शन:
निर्जला एकादशी पर जहां बाबा श्याम के दरबार में लाखों लोगों की भीड़ रहती थी, लेकिन कोरोना के चलते इस बार श्याम के भक्तों को निराश रहना पडा .मंगलवार को बाबा श्याम के भक्त दीदार नहीं कर पाए, कोरोना संक्रमण के चलते बाबा का दरबार बंद रहा. निर्जला एकादशी के दिन पुजारियों ने सिर्फ बाबा श्याम की सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजा आराधना की और पट बंद कर दिए. 

निर्जला एकादशी का पौराणिक बड़ा महत्व:
निर्जला एकादशी का पौराणिक बड़ा महत्व है, आज के दिन बाबा श्याम के दरबार में लाखों भक्त अपनी हाजिरी लगाते हैं. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और मंदिर 3 माह से पूरी तरह बंद चल रहा है. राज्य सरकार के आदेश के बाद ही भक्तों के लिए मंदिर खोला जाएगा. पहली बार ऐसा हुआ है कि निर्जला एकादशी के दिन बाबा श्याम के दर्शन भक्तों को नहीं हुए. 

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निर्जला एकादशी पर आज दिन भर चलेगा दान-पुण्य का कार्यक्रम, महिलाओं में भारी उत्साह

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जैसलमेर: निर्जला एकादशी के लिए सीमावर्ती जिले जैसलमेर में धूम-धाम से मनाया जा रहा है.  विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा बाजारों में मीठे पानी की छबीलें लगे हुए हैं. साल की सभी चौबीस एकादशियों में से निर्जला एकादशी सबसे अधिक महत्वपूर्ण एकादशी है. कोरोना के कारण आज एकादशी के अवसर पर सोनार दुर्ग पर स्तिथ लक्ष्मीनाथ जी मंदिर और रामदेव जी मंदिर, गणेश जी का मंदिर  सत्यनारायण भगवान, सहित सभी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का आज तांता नहीं लगा.

RCA अध्यक्ष वैभव गहलोत का जन्मदिवस आज, अन्य जिलों की तरह जोधपुर में भी आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम

निर्जला एकादशी पर आज श्रद्धालु उपवास कर रहे:  
निर्जला एकादशी पर आज श्रद्धालु उपवास कर रहे हैं. कोरोना के कारण पहली बार मंदिरों के पट बंद रहने से भक्त ग्यारस माता के दर्शन कर कथाएं नहीं सुन पाए.  इस दिन माताजी को ठंडे जल से भरी मटकी, फल आदि अर्पित किए जाते गए, लेकिन इस बार मन्दिर खोलने की अनुमति नहीं होने से श्रद्धालुओं को घर मे ही रहना पड़ा. इस अवसर पर लोगों ने परंपरागत रूप से सिंगाड़े की सेव, आम, मावे के पेठे, खजूर की पंखियां, ठण्डाई व मटकियों का वितरण कर दान पुण्य किया जा रहा है.

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महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा:
इस पर्व को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है. निर्जला एकादशी के अवसर पर दान-पुण्य की परम्परा में बहन-बेटियों के ससुराल में ‘फळियार भेजने की परम्परा रही है. ‘फळियार में पांच किलोग्राम से लेकर इक्कीस किलोग्राम तक मिठाईयां शर्बत की बोतले, आम, ओळा, सेंवईया, चीनी, मटकी, स्टील बर्तन इत्यादि भेजने की परम्परा के क्रम में ‘फळियार  पहुंचने शुरू हो गए है. शहर में महिलाएं व युवतियां सामूहिक रूप से हर गली-मौहल्ले शहर में ‘फळियार के साथ निकल रही हैं. बच्चे सरबत पीकर खूब मजे कर रहे है और तेज गर्मी से लोगों को शरबत पीकर गर्मी से निजात नही मिल रहा है. 

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