दौसा: सियासी फुटबॉल की पिच बना किसान भूमि मुआवजा प्रकरण, बयानबाजी शुरू

दौसा: सियासी फुटबॉल की पिच बना किसान भूमि मुआवजा प्रकरण, बयानबाजी शुरू

दौसा: जिले में एक्सप्रेस-वे के लिए किसानों की अवाप्त भूमि सियासी नेताओं के लिए सियासी फुटबॉल की पिच बन गई है. कोई इस फुटबाल को केन्द्र सरकार के पाले में डाल रहा है तो कोई इसे प्रदेश सरकार के पाले में फेंक रहा है. आलम ये है कि किसानों के नाम पर शुरू हुआ सियासी फुटबाल का मैच इतना संगीन हो गया है कि जनप्रतिनिधि किसानों के दिल में जगह बनाने के लिए आमने सामने हो गये हैं.

जसकौर मीणा बता रही है निजी तौर पर तैयार आंदोलन:
प्रकरण उस समय और गर्मा गया जब राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीना किसानों के हित की लड़ाई बताते चार दिनों से आंदोलन कर रहे हैं. सांसद का आरोप है कि इस सब के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है और सांसद जसकौर किसानों के जले पर ये कह कर नमक छिड़क रही है की झाड़ों के लाखों मिल रहे हैं ये कम नहीं है. बस क्या था सांसद ने अपना बयान जारी कर खुद को किसान हितेशी बताते आरोपों को बकवास बताया और आंदोलन को सांसद किरोड़ीलाल का निजी आंदोलन बता दिया.

परसादी लाल मीणा ने केंद्र सरकार को ठहराया जिम्मेदार:
सियासी इस फुटबाल में उद्योग मंत्री परसादीलाल मीना भी किक लगाने में पीछे नहीं रहे. उन्होंने कम मुआवजा निर्धारण के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार बताते किरोड़ीलाल मीना को संदेश दिया कि प्रदेश सरकार के दरवाजे हल के लिए हमेशा खुले हैं. अब नजर प्रदेश स्तर पर संभावित वार्ता पर है कि इस वार्ता में हल निकल पाता है या किसान मुआवजा रूपी ये फुटबाल बाउण्ड्री पार हो जाती है. इस सब बयानबाजी का सिर्फ एक ही मतलब है... वाह रे सियासत...!

आज होगी सरकार से बातचीत:
वहीं दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस हाइवे के लिए अधिग्रहण की गई भूमि के मुआवजे को लेकर किसानों के इस आंदोलन को लेकर सरकार ने आज एक प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है. आंदोलनरत किसानों का एक प्रतिनिधि दल सुबह जयपुर के लिए रवाना हुआ जो राजधानी में मुख्य सचिव की मौजूदगी में सरकार के साथ वार्ता करेगा. राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा भी इस वार्ता में शामिल होंगे.

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