नई दिल्ली: किसान नेता टिकैत की केंद्र को चेतावनी: पकड़े गए संगठन के लोगों को या तो तिहाड़ जेल भेजों या उपराज्यपाल से मुलाकात कराओ

किसान नेता टिकैत की केंद्र को चेतावनी: पकड़े गए संगठन के लोगों को या तो तिहाड़ जेल भेजों या उपराज्यपाल से मुलाकात कराओ

किसान नेता टिकैत की केंद्र को चेतावनी: पकड़े गए संगठन के लोगों को या तो तिहाड़ जेल भेजों या उपराज्यपाल से मुलाकात कराओ

नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों को लेकर जारी गतिरोध अभी थमता नजर नहीं आ रहा है. दिल्ली में उपराज्यपाल से मिलने जा रहे किसानों को कथित तौर पर पुलिस द्वारा पकड़े जाने की खबरों के बीच गाजीपुर बॉर्डर पर डटे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आज एक बार फिर केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमारे लोगों को उपराज्यपाल से मिलने नहीं दिया गया तो हम दिल्ली कूच करेंगे. हम कैसे जाएंगे इस पर हम अभी बैठक कर रहे हैं. हम उपराज्यपाल के पास जाएंगे.

संयुक्त किसान मोचा मना रहा है खेती बचाओ-लोकतंत्र बचाओ दिवस:
किसान आंदोलन के सात महीने पूरे होने पर आज देशभर में संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा खेती बचाओ-लोकतंत्र बचाओ दिवस (Kheti Bachao, Loktantra Bachao Diwas) मनाया गया. इस दौरान कृषि कानूनों के खिलाफ के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए किसान राज्यपालों से मिलकर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन भी दिया.

पकड़े गए पदाधिकारियों को या तो तिहाड़ जेल भेजो या फिर राज्यपाल से मिलवाओ:
टिकैत ने कहा कि हमारे जिन पदाधिकारियों को पकड़ा गया है उन्हें या तो तिहाड़ जेल भेजो या फिर राज्यपाल से इनकी मुलाकात कराओ. हम आगे बताएंगे कि दिल्ली का क्या इलाज करना है. उन्होंने कहा कि दिल्ली बगैर ट्रैक्टर के नहीं मानती है. लड़ाई कहां होगी, स्थान और समय क्या होगा यह तय कर फिर से बड़ी क्राांति होगी.

9 और 24 जुलाई को भी होंगी ट्रैक्टर रैली:
किसान नेता ने कहा कि आज की बैठक में हमने अपने आंदोलन को मजबूत करने का फैसला किया है. हमने दो और रैलियां करने का फैसला किया है. 9 जुलाई को ट्रैक्टर रैली होगी जिसमें शामली और भागपत के लोग मौजूद रहेंगे और 10 जुलाई को सिंघु बॉर्डर पहुंचेंगे. वहीं, दूसरी ट्रैक्टर रैली 24 जुलाई को होगी, इसमें बिजनौर और मेरठ के लोग शामिल होंगे. 24 जुलाई की रात वे मेरठ टोल पर रुकेंगे और 25 जुलाई को रैली गाजीपुर बॉर्डर पहुंचेगे.

संसद तो किसानों का अस्पताल है:
राकेश टिकैत ने कहा कि संसद तो किसानों का अस्पताल हैं. वहां हमारा इलाज होगा. हमें पता चला है कि किसानों का इलाज एम्स से अच्छा तो संसद में होता है. हम अपना इलाज वहां कराएंगे. जब भी दिल्ली जाएंगे, हम संसद में जाएंगे. 

उन्होंने कहा कि सरकार जब चाहे तब बातचीत शुरू कर सकती है. जब तक किसानों की मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा. महीने में दो बार लोग यहां बड़ी संख्या में ट्रैक्टर के साथ आएंगे. इस बार सहारनपुर और मुजफ्फरनगर से ट्रैक्टर आए हैं. 

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