नई दिल्ली किसान यूनियनों ने कहा- हम सरकार से बातचीत के लिए तैयार, कानूनों को निरस्त किए जाने से कम कुछ भी स्वीकार नहीं

किसान यूनियनों ने कहा- हम सरकार से बातचीत के लिए तैयार, कानूनों को निरस्त किए जाने से कम कुछ भी स्वीकार नहीं

किसान यूनियनों ने कहा- हम सरकार से बातचीत के लिए तैयार, कानूनों को निरस्त किए जाने से कम कुछ भी स्वीकार नहीं

नई दिल्ली: प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने शनिवार को कहा कि वे सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उसे नया प्रस्ताव लेकर आना चाहिए क्योंकि नए कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल तक के लिए निलंबित रखने का सरकार का मौजूदा प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं है. किसान यूनियनों ने हालांकि, स्पष्ट किया कि वे तीनों नए कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे.

किसान संगठनों ने गेंद सरकार के पाले में डालीः
यहां सिंघू बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन में संयुक्त किसान मोर्चे के वरिष्ठ नेता दर्शनपाल ने कहा कि गेंद अब सरकार के पाले में है. उन्होंने कहा कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं. गेंद सरकार के पाले में है. हमने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि पिछला प्रस्ताव (कानूनों को एक से डेढ़ साल तक निलंबित रखने) हमें स्वीकार्य नहीं है. अब उन्हें नए प्रस्ताव के साथ आना चाहिए.

 देशभर में किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ एकजुटः
शनिवार के ‘चक्का जाम’ के बारे में उन्होंने दावा किया कि इसे पूरे देश में समर्थन मिला जिससे एक बार फिर ‘‘साबित’’ हो गया कि देशभर में किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ एकजुट हैं. उल्लेखनीय है कि शनिवार को कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने चक्का जाम किया था. इस दौरान पूरे देश में उन्हे समर्थन मिला था. वहीं कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने किसानों के चक्का जाम को अपना समर्थन दिया था. 

राकेश टिकैत ने दो अक्टूबर तक धरने पर बैठने के लिए कहाः
अधर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार द्वारा विवादास्पद कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने वाला कानून बनाने के बाद ही किसान घर लौटेंगे. उन्होंने कहा कि हम दो अक्टूबर तक यहां बैठेंगे. गत नवम्बर से दिल्ली-मेरठ राजमार्ग के एक हिस्से पर अपने समर्थकों के साथ आंदोलन कर रहे टिकैत ने कहा कि अगर सरकार यह समझ रही है, तो किसानों से बात करें. एमएसपी पर एक कानून बनाएं, तीन कानूनों को वापस लें, उसके बाद ही किसान अपने घरों को लौटेंगे.
सोर्स भाषा
 

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