समर्थन केंद्र बंद होने के बाद किसानों की हालत बदतर

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/07/04 02:05

बूंदी। हाड़ौती के किसानों की समर्थन केंद्र बंद होने के बाद हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है। अब आए दिन लहसुन खराब होने की कगार पर पहुंच रहा है। ऐसे में लहसुन को अब किसान जानवरों को डालने को मजबूर है। 

वही जिले में समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए मिले टोकन के बावजूद भी किसानों के लहसुन की तुलाई नहीं हो पाई। इसके चलते किसान आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या परंपरा की ओर बढ़ रहे हैं। बात करें बूंदी जिले की तो बूंदी जिले कुल 3 हजार 5 सौ 61 किसानों ने पंजीयन करवाया था। जिसमे से बूंदी जिले में मात्र 2 हजार नौ किसानो का लहुसन ही बिक पाय है। जिसके चलते अब किसान कर्ज से परेशान होता जा रहा है। किसानों का कहना है कि बच्चों की फीस जमा नहीं हो रही वहीं दूसरी ओर बैंक वाले नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं। 

वहीं दूसरी ओर कर्ज  मांगने वाले रोज घर आ रहे हैं। लहसुन समर्थन केंद्र बंद होने के कारण प्राप्त टोकन का भी कोई लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है।  ऐसे में किसान आत्महत्या करने की बात कह रहे हैं। घरों में गोदाम व कमरों में भरे को किसान देख-देखकर चिंतित हैं। उनकी इस लहसुन को देखकर चिंता आए दिन बढ़ती जा रही है।  क्योंकि लहसुन एक कच्ची  फसल है जो कि आए दिन खराब होती चली जाएगी, इसके चलते किसान कर्ज और कर्ज में डूब जाएगा।  किसानों से जब हमने इस मामले में बात की तो उनका कहना था , कि अब लहसुन को मंडी में दो रूपऐ से 5 रुपय  किलो में बेचने पर लहसुन की मजदूरी भी नहीं निकल रही है। तो मुनाफा तो बहुत दूर की बात है। जिसके चलते आर्थिक तंगी से डूबने को गरीब  किसान मजबूर हैं। 

लेकिन अब केवल सरकार का ही सहारा है। किसानो का कहना है की सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और जिनके टोकन कटते हैं उन किसानों को समर्थन केंद्र खुलवाकर एक बार फिर से राहत प्रदान करनी चाहिए।  नहीं तो अब परेशान होकर आत्म  हत्या करनी पड़ेगी और घर मकानों में भरे  किसानो के लहसुन को किसानो को जानवरो व् नहरों तालाब में फेकना मजबूरी बनने लगा है। 
 

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