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Budget 2020: देश के आम बजट में इस बार खेती किसानी रही प्राथमिकता पर, जानिए किसानों के लिए क्या कुछ रहा खास

Budget 2020: देश के आम बजट में इस बार खेती किसानी रही प्राथमिकता पर, जानिए किसानों के लिए क्या कुछ रहा खास

जयपुर: देश के आम बजट में इस बार खेती किसानी प्राथमिकता पर रही. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भूमि पूत्रों पर खासी मेहरबानी दिखाई और किसान को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया. सियासी मकसद जो भी लेकिन केंद्र सरकार इस बात को अच्छे से जानती है कि वोट लेने से लेकर अर्थव्यवस्था की पटरी तक किसान की भूमिका भारत में सबसे अहम है. यही कारण है कि मंदी के दौर में भी किसान को आत्मनिर्भर बनाने पर फोकस रहा है.

सरकार का लक्ष्य किसानों की आय दोगुना करना: 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार की ओर से कृषि विकास योजना को लागू किया गया है, पीएम फसल बीमा योजना के तहत करोड़ों किसानों को फायदा पहुंचाया गया. सरकार का लक्ष्य किसानों की आय दोगुना करना है. किसानों के लिए बड़ा ऐलान करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारी सरकार किसानों के लिए 16 सूत्रीय फॉर्मूले का ऐलान करती है, जिससे किसानों को फायदा पहुंचाएगा. कृषि भूमि पट्टा आदर्श अधिनियम-2016, कृषि उपज और पशुधन मंडी आदर्श अधिनियम -2017, कृषि उपज एवं पशुधन अनुबंध खेती, सेवाएं संवर्धन एवं सुगमीकरण आदर्श अधिनियम-2018 लागू करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा सीतारमण के बजट भाषण में किसानों के क्या कुछ खास रहा है. 

- मॉर्डन एग्रीकल्चर लैंड एक्ट को राज्य सरकारों द्वारा लागू करवाना.
- 100 जिलों में पानी की व्यवस्था के लिए बड़ी योजना चलाई जाएगी, ताकि किसानों को पानी की दिक्कत ना आए.
- पीएम कुसुम स्कीम के जरिए किसानों के पंप को सोलर पंप से जोड़ा जाएगा. इसमें 20 लाख किसानों को योजना से जोड़ा जाएगा. इसके अलावा 15 लाख किसानों के ग्रिड पंप को भी सोलर से जोड़ा जाएगा.
 - फर्टिलाइजर का बैलेंस इस्तेमाल करना, ताकि किसानों को फसल में फर्टिलाइजर के इस्तेमाल की जानकारी को बढ़ाया जा सके.
 - देश में मौजूद वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज को नबार्ड अपने अंडर में लेगा और नए तरीके से इसे डेवलेप किया जाएगा. देश में और भी वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएंगे। इसके लिए PPP मॉडल अपनाया जाएगा. जिन किसानों के पास बंजर जमीन है, उस पर उन्हें सौर बिजली इकाइयां लगाने और अधिशेष बिजली सौर ग्रिड को बेचने में मदद की जाएगी.
 - महिला किसानों के लिए धन्य लक्ष्मी योजना, जिसके तहत बीज से जुड़ी योजनाओं में महिलाओं को मुख्य रूप से जोड़ा जाएगा.
 - कृषि उड़ान योजना को शुरू किया जाएगा. इंटरनेशनल, नेशनल रूट पर इस योजना को शुरू किया जाएगा.
- दूध, मांस, मछली समेत खराब होने वाली योजनाओं के लिए रेल भी चलाई जाएगी.
- किसानों के अनुसार से एक जिले, एक प्रोडक्ट पर फोकस किया जाएगा.
- जैविक खेती के जरिए ऑनलाइन मार्केट को बढ़ाया जाएगा.
- किसान क्रेडिट कार्ड योजना को 2021 के लिए बढ़ाया जाएगा.
- दूध के प्रोडक्शन को दोगुना करने के लिए सरकार की ओर से योजना चलाई जाएगी.
- मनरेगा के अंदर चारागार को जोड़ दिया जाएगा.
- ब्लू इकॉनोमी के जरिए मछली पालन को बढ़ावा दिया जाएगा. फिश प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जाएगा.
- किसानों को दी जाने वाली मदद को  दीन दयाल योजना के तहत बढ़ाया जाएगा.
- जल्द खराब होने वाले उत्पादों की ढुलाई के लिये किसान ट्रेन का प्रस्ताव. 

सरकार ने फल और सब्जी जैसे जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों की ढुलाई के लिये किसान रेल का प्रस्ताव किया है. इसके तहत इन उत्पादों को रेफ्रिजरेटेड डिब्बों में ले जाने की सुविधा होगी. विशेष किसान रेलगाड़ियां सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत चलाने का प्रस्ताव है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए किसानों के लाभ के लिए कई उपायों का प्रस्ताव किया.

आम बजट में खेती किसानी पर खासा फोकस रखा गया:
उन्होंने कहा कि जल्द खराब होने वाले सामान के लिए राष्ट्रीय शीत आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण को रेलवे पीपीपी मॉडल में किसान रेल बनाएगी. इससे ऐसे उत्पादों की ढुलाई तेजी से हो सकेगी. उन्होंने कहा कि सरकार का चुनिंदा मेल एक्सप्रेस और मालगाड़ियों के जरिये जल्द खराब होने वाले सामान की ढुलाई के लिये रेफ्रिजरेटेड पार्सल वैन का भी प्रस्ताव है. जल्द खराब होने वाले फल, सब्जियों, डेयरी उत्पादों, मछली, मांस आदि को लंबी दूरी तक ले जाने के लिये इस तरह की तापमान नियंत्रित वैन की जरूरत है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आम बजट में खेती किसानी पर खासा फोकस रखा गया है. इसके पीदे जो भी सियासी मकसद हो लेकिन केंद्र सरकार भली भांती जानती है कि किसान को सशक्त बनाकर ही अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है. 


 

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नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बीच मोदी कैबिनेट ने सोमवार को अहम फैसले लिए है.  केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश के सभी सांसदों के वेतन में एक साल तक 30 प्रतिशत की कटौती का फैसला किया गया. इसके साथ ही सांसद निधि के लिए दी जाने वाली राशि भी 2 वर्ष तक के लिए टाल दी गई है. इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि इस कटौती से सरकार को एक वर्ष में करीब 8 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी. 

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30 प्रतिशत योगदान देने का फैसला:
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपालों ने स्वेच्छा से सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में वेतन कटौती का फैसला किया है. यह राशि भारत के समेकित कोष में दर्ज की जाएगी. इसके तहत सांसद निधि को दो साल के लिए टाल दिया गया. वहीं राष्‍ट्रपति, उपराष्‍ट्रपति, राज्‍यपाल सहित तमाम सांसदों ने भी अपने वेतन का 30 प्रतिशत योगदान देने का फैसला किया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद अधिनियम, 1954 के सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन के अध्यादेश को मंजूरी दे दी. 1 अप्रैल, 2020 से एक साल के लिए भत्ते और पेंशन को 30 फीसद तक कम किया जाएगा.

केंद्रीय मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग:
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को केंद्रीय मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की. पीएमओ ने बताया कि इस दौरान पीएम मोदी ने मंत्रियों के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि उनकी तरफ से लगातार दी गई फीडबैक कोविड-19 से निपटने के लिए रणनीति बनाने में प्रभावी रही है.

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VIDEO: कोरोना संकट के चलते राजस्थान में टूरिज्म इंडस्ट्री को 500 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान

जयपुर: प्रदेश में कोरोना संकट के दौरान किए गए लॉक डाउन से अभी तक टूरिज्म इंडस्ट्री को 500 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है. पर्यटन और उससे जुड़े तमाम उद्योग ठप हैं ऐसे में रोजाना ट्रैवल ट्रेड को 50 करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है. आशंका इस बात की है कि हालात जल्द नहीं सुधरे तो कम से कम इस वर्ष प्रदेश में पर्यटन व्यवसाय हाशिए पर ही रहेगा जिसके बुरे प्रभाव आने वाले 2 वर्षों तक दिखाई दे सकते हैं. प्रदेश में 18 मार्च से ही सभी किले, महल, स्मारक, नेशनल पार्क, सफारी, मेले और उत्सव बंद हैं. अब 14 अप्रैल तक कम से कम इनमें कोई भी पर्यटक गतिविधि नहीं होगी. 

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- ट्रैवल ट्रेड को लॉक डाउन से अभी तक 500 करोड़ का नुकसान
- रोजाना करीब 50 करोड रुपए का हो रहा नुकसान
- पर्यटन स्थल बंद होने से चरमराया ट्रैवल ट्रेड का ढांचा
- प्रदेश के 700 से अधिक सितारा, बजट व छोटे होटल बंद
- प्रदेश के 2000 से अधिक अधीकृतरेस्टोरेंट व क्लब भी बंद
- होटल, फॉरेन एक्सचेंज, गाइड, टैक्सी ऑपरेटर 
- जिप्सी ऑपरेटर, हैंडीक्राफ्ट, वेंडर, हॉकर सभी को भारी नुकसान
- प्रदेश में 18 मार्च से बंद हैं पर्यटन स्थल व नेशनल पार्क
- पुरातत्व विभाग को अभी तक 2 करोड़ से अधिक का नुकसान

कोरोना के कहर से प्रदेश का पर्यटन व्यवसाय वेंटिलेटर पर चला गया है. टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े तमाम लोगों की रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है. अकेले राजस्थान की बात करें तो करीब 10 लाख से ज्यादा लोग अचानक बेरोजगार हो गए हैं. रोजाना 50 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है और अभी तक की बात करें तो पर्यटन उद्योग को 500 से 700 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. कोरोना की बढ़ती दहशत के बीच राज्य सरकार ने 18 मार्च को लॉक डाउन अवधि तक के लिए प्रदेश के सभी किले, महल, स्मारक, नेशनल पार्क, सफारी, मेले, उत्सव और तमाम इवेंट बंद कर दिए थे. इस फैसले के बाद प्रदेश में पर्यटकों की गतिविधि पूरी तरह से ठप हो गई है और जो देशी और विदेशी सैलानी राजस्थान में थे उनमें से 90 फ़ीसदी से अधिक  अपने वतन लौट चुके हैं. जो आमेर, जंतर मंतर और हवा महल पर्यटकों की चहल-पहल से रोशन रहते थे  आज उनमें सन्नाटे का चीत्कार उठ रहा है. 

प्रदेश में छोटे-बड़े 700 से अधिक होटल वीरान:
पुरातत्व विभाग को भी अभी तक राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के तमाम स्मारक और संग्रहालय बंद होने से 10 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है. टूर ऑपरेटर, ट्रैवल एजेंट्स ने इस वर्ष 31 दिसंबर तक जो इवेंट तैयार किए थे उन सब को रद्द करना पड़ा है.  मैरिज टूरिज्म, रिलिजियस टूरिज्म, रूरल टूरिज्म, मेडिकल टूरिज्म सहित करीब डेढ़ हजार से दो हजार इवेंट रद्द करने पड़े हैं. प्रदेश में छोटे-बड़े 700 से अधिक होटल और दो हजार से अधिक अधिकृत क्लब व रेस्टोरेंट वीरान पड़े हैं. रणथंभौर, सरिस्का, मुकंदरा, भरतपुर में घना, कुंभलगढ़, चित्तौड़, झालाना लेपर्ड सफारी को भी बंद है. 

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लाखों लोग बेरोजगार:
प्रदेश में पर्यटक गतिविधि बंद किए जाने से ट्रैवल ट्रेड को भारी नुकसान हुआ है पर्यटकों के परिवहन से जुड़े टैक्सी ड्राइवर, जिप्सी संचालक और हाथी गांव में पल रहे हाथी और महावतों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. जो वेंडर और होकर छोटे-छोटे सामान बेचकर अपने घर पर 2 जून की रोटी का इंतजाम करते थे उनके चेहरे पर निराशा के भाव साफ देखे जा सकते हैं. दरअसल पर्यटन पर कोरोना का कहर इस कदर टूटा है कि लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं, अरबों रुपए का व्यवसाय चौपट हुआ है और ऐसी कोई उम्मीद नहीं कि अगले 1 साल में भी पर्यटन उद्योग वापस अपने पैरों पर खड़ा हो पाएगा. 

लॉक डाउन के बीच फीकी रही नए वित्त वर्ष की शुरुआत, राजस्व लक्ष्य रहे अधूरे

लॉक डाउन के बीच फीकी रही नए वित्त वर्ष की शुरुआत, राजस्व लक्ष्य रहे अधूरे

जयपुर: कोरोना संकट के दौर में प्रदेश में लॉक डाउन के चलते वित्त वर्ष 2020-21 की फीकी शुरुआत हुई. सरकारी खजाने को उम्मीद रहती है कि वित्त वर्ष अंतिम महीने मार्च में मोटी रकम प्राप्त होगी लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और बुरी स्थिति तब हो गई जब लॉक डाउन के चलते वित्त वर्ष की शुरुआत भी फीकी रही. ऐसे में अब राज्य सरकार के सामने चुनौती रहेगी कि वे किस तरह से नए वित्त वर्ष में योजनाओं का वित्तपोषण कर पाएगी. 

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- लॉक डाउन के बीच नए वित्त वर्ष की शुरुआत
- पुराने राजस्व लक्ष्य रहे अधूरे, नए प्राप्त करने के लिए भी जुटना होगा
- लेकिन अभी 14 अप्रैल तक है लॉक डाउन
- ऐसे में टैक्स हैड वाले विभागों के लिए चुनौती भरा रहेगा नया वर्ष
- आबकारी, खान, परिवहन सहित कई विभाग जुड़े हैं सीधे राजस्व अर्जन से
- प्रदेश में खनन बंद, होटल, resto-bar बंद, शराब दुकानें बंद
- ऐसे में लॉक डाउन अवधि में प्रभावित रहेगा राजस्व अर्जन का कार्य

राजस्व लक्ष्य अर्जित करने को लेकर सरकार भले ही गंभीर दिखी लेकिन जिस तरह वित्त वर्ष के अंतिम माह में कोरोना का कहर टूटा उससे राज्य सरकार की उम्मीद है भी धराशाई हो गई. सरकार को उम्मीद थी कि कर राजस्व से जुड़े महकमें सरकारी खजाने को संबल प्रदान करेंगे लेकिन हुआ ठीक उल्टा कोरोना के चलते वित्त वर्ष का अंतिम महीना सूखा निकला और नए वित्त वर्ष की शुरुआत भी बिल्कुल फीकी रही. मोटे तौर पर अभी टैक्स हेड वाले महकमें इस बात का गुणा भाग करने में लगे हैं कि 31 मार्च को समाप्त हुए वित्त वर्ष 2019-29 में राजस्व अर्जन की स्थिति क्या रही..? इधर वित्त विभाग के अफसरों की माने तो बीते वित्त वर्ष में सरकार की उम्मीदों के विरुद्ध 70 से 75 फ़ीसदी ही राजस्व लक्ष्य अर्जित हो पाए हैं.

सरकारी खजाने में उम्मीद के मुताबिक धन नहीं पहुंचा: 
इसका सीधा मतलब है कि सरकारी खजाने में उम्मीद के मुताबिक धन नहीं पहुंचा और बीते वित्त वर्ष में सरकार को कर राजस्व में करीब 10,000 करोड रुपए का नुकसान उठाना पड़ा. दरअसल वित्त वर्ष के अंतिम महीने यानी मार्च में परिवहन विभाग जहां एडवांस टैक्स का कलेक्शन करता है वहीं आबकारी विभाग भी नया बंदोबस्त करता है. खान विभाग भी नए ठेकों के लिए एडवांस राशि का कलेक्शन करता है जिससे सरकारी खजाने में शतप्रतिशत से कहीं ज्यादा राजस्व पहुंच जाता है. परंतु इस बार कोरोना वायरस के कहर के सामने सब मटिया मेट हो गया. आबकारी विभाग जहां लक्ष्य से 2000 करोड़ रुपए पीछे रहा वही खान विभाग भी करीब 800 करोड रुपए अर्जित नहीं कर पाया. यही नहीं परिवहन विभाग, पंजीयन एवं मुद्रांक, विद्युत व अन्य कर राजस्व से जुड़े महकमें भी राजस्व लक्षणों से पिछड़ गए. अब सरकार के सामने मुश्किल इस बात की है कि नए वित्त वर्ष में जनता से जुड़ी हुई योजनाओं का किस तरह से वित्त पोषण किया जाएगा. पिछले दिनों मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के बजट में जो घोषणाएं की थी वह कैसे पोषित हो पाएंगी. राज्य सरकार की वार्षिक योजना की बात करें तो उसके लिए धनराशि कहां से आएगी. ऐसे सैकड़ों सवाल हैं जो चुनौती के रूप में राज्य सरकार के सामने खड़े हैं.

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कोरोनावायरस ने सबसे ज्यादा पर्यटन और खनन कमर तोड़ दी: 
अब खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपने वित्त की टीम से यह उम्मीद है कि वह कोरोना संकट के बीच इस तरह का फार्मूला लेकर आएंगे जिससे सरकारी खजाने को भी संभल मिलेगा और आमजन से जुड़ी योजनाएं भी वित्त पोषित हो पाएंगी. कोरोनावायरस संकट में ऐसा नहीं है कि सिर्फ सरकारी राजस्व में कमी की हो बल्कि प्रदेश और देश के अंदर विभिन्न सेक्टर में जो रोजगार था उसकी भी कमर तोड़ दी है. राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर्यटन और खनन पर काफी हद तक आधारित है और कोरोनावायरस ने सबसे ज्यादा कमर इन 2 सेक्टर की ही थोड़ी है. पर्यटन सेक्टर की बात करें तो प्रदेश के तमाम पर्यटन स्थल, स्मारक, संग्रहालय बंद पड़े हैं. इसके नतीजे में ट्रैवल ट्रेड से जुड़े टैक्सी ड्राइवर, गाइड, जिप्सी संचालक, होटल, मोटल कैफे, रेस्टोरेंट सब कुछ बंद पड़ा है. छोटे-छोटे होकर और वेंडर जो हस्तशिल्प और अन्य सामग्री को बेचकर अपनी रोजी-रोटी चलाते थे वह भी बेरोजगार हो गए हैं. ऐसे में चुनौती सिर्फ यही नहीं है कि सरकारी योजनाओं का वित्तपोषण कैसे होगा वरन चुनौती इस बात की भी है कि कोरोनावायरस देर सवेर दूर हो जाएगा लेकिन इससे पस्त हुए प्रदेश के रोजगार धंधों को किस तरह से उठाया जाएगा. यह बड़ी चुनौती होगी. अब देखना है कि सूबे की सरकार कोरोना संकट से निपटने और इसके बाद के हालात की चुनौती से निपटने के लिए किस तरह खुद को तैयार करती है.  

Coronavirus: मंदी में चली जाएगी वैश्विक अर्थव्यवस्था, भारत और चीन हो सकते हैं अपवाद- यूएन

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संयुक्त राष्ट्र: यूएन की ताजा व्यापार रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस महामारी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था इस साल मंदी में चली जाएगी, लेकिन चीन और भारत इसके अपवाद हो सकते हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान खरबों डॉलर का नुकसान होने की संभावना है इससे विकासशील देशों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. 

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विकासशील देशों में करीब दो तिहाई लोग आर्थिक संकट का सामना कर रहे: 
रिपोर्ट में हालांकि इस बात की विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है कि भारत और चीन इसका अपवाद कैसे बनेंगे. यूएन के अनुसार कोरोना वायरस संकट के चलते विकासशील देशों में रह रहे दुनिया के करीब दो तिहाई लोग आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और इन देशों के लिए 2500 अरब डॉलर के राहत पैकेज की सिफारिश भी की गई है.

विदेशों में आने जाने वाला निवेश प्रभावित होने की संभावना: 
यूएन और विकास सम्मेलन के विश्लेषण के अनुसार दुनिया की दो-तिहाई आबादी प्रभावित होगी और अगले दो वर्षों के दौरान विकासशील देशों में करीब 2,000 अरब डॉलर से 3,000 अरब डॉलर के बीच विदेशों में आने जाने वाला निवेश प्रभावित होने की संभावना है. विकास सम्मेलन ने कहा कि कोरोना वायरस के लोकर विकसित अर्थव्यवस्थाओं और चीन ने काफी बड़े सरकारी पैकेज की घोषणा की है. जी-20 के अनुसार उनकी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ये पैकेज कुल 5,000 अरब डॉलर का होगा. 

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वैश्विक निवेश को अरबों-खरबों डॉलर का नुकसान होगा:
रिपोर्ट के अनुसार इस अभूतपूर्व संकट में अभूतपूर्व फैसले करने हैं. विकास सम्मेलन ने कहा कि इन राहत उपयों के बाद भी विश्व अर्थव्यवस्था इस साल मंदी के दौर में चली जाएगी और वैश्विक निवेश को अरबों-खरबों डॉलर का नुकसान होगा, जो विकासशील देशों के लिए गंभीर मुसीबन बन जाएगा.   

LPG सिलेंडर की कीमत में कटौती, लॉकडाउन के बीच लोगों को मिली राहत

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नई दिल्‍ली: कोरोना वायरस के लॉकडाउन के बीच एलपीजी सिलेंडर के दाम कर हो गए हैं. आम आदमी के लिए यह बड़ी राहत की खबर है. 14.2 किलोग्राम वाले गैर-सब्सिडाइज्‍ड एएनपीजी सिलेंडर के दाम दिल्‍ली में 61.5 रुपये प्रति सिलेंडर सस्‍ते हुए हैं. इसी तरह, नॉन सब्सिडी सिलेंडर की कीमत दिल्‍ली में 744 रुपये रह गई है जो 805.50 रुपये थी. इसी तरह, नॉन सब्सिडी सिलेंडर की कीमत कोलकाता में 774.50 रुपये, मुंबई में 714.50 रुपये और चेन्‍नई में 761.50 रुपये हो गई है जो क्रमश: 839.50 रुपये, 776.50 रुपये और 826 रुपये हुआ करती थी.

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लगातार दूसरे महीने में एलपीजी के दाम घटे:
लगातार दूसरे महीने में एलपीजी के दाम घटे हैं. आखिरी बार फरवरी में एलपीजी के दाम बढ़े थे. तब दिल्ली में  14 किलोग्राम के गैस सिलेंडर के दाम 144.50 रुपये बढ़ गए थे. वहीं कोलकाता में 149, मुंबई में 145 और चेन्नई में 146 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी. 

हम वायरस से लड़ रहे है जनता से नहीं: हाइकोर्ट

19 किलोग्राम कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी कटौती:
वहीं आज नॉन सब्सिडी के अलावा 19 किलोग्राम कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी कटौती की गई है जो पहली अप्रैल से प्रभावी है. दिल्‍ली में 19 किग्रा का रसोई गैस सिलेंडर 96 रुपये सस्‍ता हुआ है. दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर अब 1285 रुपये का पड़ेगा. वहीं चेन्नई में इस सिलेंडर का दाम 1402 रुपये है. वहीं पांच किलो वाला सिलेंडर भी 21.50 रुपये कम होने के बाद 286.50 रुपये का हो गया.
 

VIDEO: कोरोना लेकर आया एयरलाइंस के लिए आर्थिक संकट! भारतीय एयरलाइंस को 3 अरब डॉलर के नुकसान की आशंका

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जयपुर: कोरोना वायरस एयरलाइंस के लिए आर्थिक संकट लेकर आया है. देश-विदेश की सभी एयरलाइंस इस आर्थिक नुकसान की चपेट में आना शुरू हो गई हैं. इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भारतीय एयरलाइंस को पहली तिमाही में 3 अरब डॉलर के आर्थिक नुकसान की आशंका जताई है. दरअसल सभी एयरलाइंस पहले से ही आर्थिक फायदे की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन अब लॉकडाउन ने एयरलाइंस के लिए हालात और खराब कर दिए हैं.

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देश के 6 प्रमुख एयरलाइन बेड़े में 631 विमान: 
देश में 6 प्रमुख एयरलाइन कम्पनियां हैं, जिनके बेड़े में 631 विमान हैं. इन एयरलाइंस के पास हर रोज एक समय में करीब 1 लाख सीट मौजूद रहती हैं. पिछले 1 सप्ताह से ये सभी सीटें खाली हैं. 24 मार्च से पहले भी एयरलाइंस को इंटरनेशनल फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ रही थीं. दरअसल फरवरी माह के दूसरे सप्ताह से ही कोरोना संकट के चलते एयरलाइंस को नुकसान होना शुरू हो गया था. आपको बता दें कि जयपुर एयरपोर्ट से भी रोजाना 63 फ्लाइट संचालित होती हैं, जिनसे करीब 14500 यात्रियों का आवागमन होता है, लेकिन कोरोना संकट के चलते पिछले एक सप्ताह से जयपुर एयरपोर्ट से भी फ्लाइट संचालन बंद हो चुका है. 

किस एयरलाइन के बेड़े में कितने विमान:
एयर एशिया - 22 विमान
एयर इंडिया - 171 विमान (एयर इंडिया एक्सप्रेस के 25, अलायंस एयर के 19 विमान शामिल)
गो एयर - 51 विमान
इंडिगो - 243 विमान
स्पाइसजेट - 112 विमान
विस्तारा - 32 विमान

कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग के मैदान में उतरे रोहित शर्मा, दान किए इतने रुपये 

- एक समय में इन एयरलाइंस के पास रहती हैं करीब 1 लाख सीट
- अकेले जयपुर एयरपोर्ट से रोज संचालित होती हैं 63 फ्लाइट
- इनमें 16000 सीटों पर यात्रा करते हैं करीब 14500 यात्री
- इंडिगो, गो एयर, स्पाइसजेट में लॉकडाउन में कर्मचारियों की बची हुई छुट्टियां काटी जा रही हैं
- छुट्टियां नहीं बचीं तो कर्मचारियों को बिना वेतन अवकाश दिया जाएगा

...फर्स्ट इंडिया के लिए जयपुर से काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

नहीं हुआ वित्त वर्ष में कोई बदलाव, 1 अप्रैल से ही शुरू होगा वित्त वर्ष

नहीं हुआ  वित्त वर्ष में कोई बदलाव, 1 अप्रैल से ही शुरू होगा वित्त वर्ष

नई दिल्ली: पूरे देशभर में कोरोना वायरस का प्रकोप जारी है. इसी के चलते पूरे देश को लॉकडाउन किया गया है. इमरजेंसी सेवाओं को छोडकर सभी बंद है. इस बीच एक खबर वित्त वर्ष को लेकर सामने आई है.  केंद्र सरकार ने अगले वित्त वर्ष 2020-21 शुरू होने की तारीख में बदलाव नहीं किया है. ये 1 अप्रैल से बदलकर 1 जुलाई नहीं की गई है. ये एक अप्रैल से ही शुरू होगा. 

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इंडियन स्टाम्प ऐक्ट की तारीख में बदलाव:
केन्द्र सरकार की तरफ से बयान जारी कर उस खबर को नकारा गया है जिसमें दावा किया जा रहा था कि वित्त वर्ष को 30 जून तक बढ़ाने का फैसला किया गया है. वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इंडियन स्टाम्प ऐक्ट की तारीख में बदलाव को वित्त वर्ष में बदलाव कहा जा रहा जो गलत रिपोर्ट है.

नोटिफिकेशन किया जारी:
केंद्र सरकार ने सोमवार को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें स्टॉम्प ड्यूटी कलेक्शन की तारीखों में बदलाव की जानकारी थी. एक अधिकारी ने बताया कि इस बदलाव के तहत स्टॉक एक्सचेंजों और डिपॉजिटरीज के माध्यम से सिक्युरिटी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स पर स्टॉम्प ड्यूटी कलेक्ट की जाएगी. पहले यह बदलाव एक अप्रैल 2020 से लागू होना था. लेकिन अब 1 जुलाई 2020 से लागू होगा. हालांकि आम लोगों के लिए कई सुविधाएं 30 जून तक बढ़ा दी गई हैं.

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