जैसलमेर: हाईटेंशन लाइन के करंट से मादा गोडावण की मौत, तीन साल में 6 मर चुके

जैसलमेर: हाईटेंशन लाइन के करंट से मादा गोडावण की मौत, तीन साल में 6 मर चुके

जैसलमेर: हाईटेंशन लाइन के करंट से मादा गोडावण की मौत, तीन साल में 6 मर चुके

जैसलमेर: राज्य पक्षी गोडावण पर बिजली की तारों का खतरा लगातार मंडरा रहा है. देगराय ओरण में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से एक मादा गोडावण की मौत हो गई. विभाग को घटना की जानकारी मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और गोडावण के शव को अपने कब्जे में ले लिया. मौके पर कई वनयजीव प्रेमी पहुंचे इस घटना पर रोष जताया. 

गोडावण संरक्षण के प्रयासों को बड़ा झटका: 
गौरतलब है कि लगातार कम हो रही गोडावण की संख्या के बीच इस तरह की घटनाएं गोडावण संरक्षण के प्रयासों को बड़ा झटका है. जिस जगह यह घटना हुई है वह डीएनपी क्षेत्र नहीं है. इस जगह से करीब 10 किमी दूर रासला में क्लोजर बना हुआ है जहां कई बार गोडावण देखे जा चुके हैं. इस बीच अब खतरा और भी मंडराने लगा है. आसपास के इलाके में हाईटेंशन तारों का जंजाल है और वर्तमान में चारों तरफ हरियाली होने से गोडावण के यहां आने की संभावना बनी रहती है. तारों की चपेट में आने से गोडावण जैसे लुप्त प्राय पक्षी की मौत ने गोडावण संरक्षण के प्रयासों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. पिछले कई चार दशकों से गोडावण संरक्षण को लेकर कई योजनाएं चल रही है और इस बीच गोडावणों की अकाल मौत विशेषज्ञों को चिंतित कर देने वाली साबित हो रही है. 2017 से लेकर अब तक 6 गोडावण तारों की चपेट में आ चुके हैं. जहां एक तरफ लगातार गोडावण की संख्या कम हो रही है वहीं इस बीच इस तरह से गोडावण के काल का ग्रास बनना और भी परेशान कर देने वाला है. 

जिम्मेदारों की लापरवाही से घटनाएं बढ़ती जा रही:
जानकारी के अनुसार तारों की चपेट में आने से गोडावण के मौत के मामले बढ़ने के बाद से यह चर्चा चल रही है कि या तो हाईटेंशन तारों को अंडरग्राउंड किया जाए या फिर बर्ड डायवर्टर लगाए जाए. लेकिन तीन चार सालों में जिम्मेदार किसी एक पर सहमत नहीं हो पाए हैं.  इस तरह की घटनाएं लगातार होती जा रही है. आखिरकार हाल ही में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि अंडरग्राउंड केबलिंग करना आसान नहीं होगा और साथ ही यह प्रोजेक्ट काफी महंगा साबित होगा. इतनी घटनाएं होने के बावजूद बर्ड डायवर्टर नहीं लगाए गए हैं और एक और गोडावण की मौत हो गई. जिम्मेदारों की लापरवाही से घटनाएं बढ़ती जा रही है. जानकारों के अनुसार समय रहते सभी हाईटेंशन लाइनों पर बर्ड डायवर्टर लगा दिए जाते तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था. 

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