जयपुर VIDEO: चुनावी साल के आखिरी बजट के लिए वित्त विभाग ने शुरू की तैयारियां, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: चुनावी साल के आखिरी बजट के लिए वित्त विभाग ने शुरू की तैयारियां, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: चुनावी साल के आखिरी बजट के लिए वित्त विभाग ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. यह बजट पूरी तरह चुनावी रंग में रंगा नजर आने के आसार हैं. वहीं इस बार बड़े वोट बैंक यूथ पर फोकस करते हुए बड़ी घोषणाएं होने के आसार हैं जो सरकार का विजन पेश करेंगी. सीएम गहलोत के युवाओं पर केन्द्रित बजट होने की घोषणा के बाद संबंधित विभाग सक्रिय हो गए हैं. सीएम गहलोत के मार्गदर्शन और सीएस उषा शर्मा के निर्देश के बाद भरोसे और काबिल पीएसएफ अखिल अरोरा ने इसे लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं.

ये की गईं हैं अभी तक तैयारियां:
-विधायकों और जनप्रतिनिधियों से उनके क्षेत्र से जुड़े काम मांगे गए
-विभागों की ओर से भी संभावित आम लोगों के हित वाली संभावित घोषणाओं की बनाई जा रही सूची
-2021-22 के संशोधित अनुमानों और 2022-23 के आय-व्यय अनुमानों की सूचनाएं लेने का काम शुरू
-लक्ष्यों और संशोधित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के हैं निर्देश
-ताकि अगले बजट के लिए उसी हिसाब से तय किए जा सकें लक्ष्य 
-जिनमें काम शुरू नहीं हुए हों ऐसी बजट घोषणा या स्वीकृत योजना हो तो उसके संशोधित अनुमान का मांगा विवरण
-2022-23 में जरूरी राशि का मांगा ब्योरा
-बीएफसी बैठकों का दौर हो रहा शुरू
-विभागवार संचालित योजनाओं का पूरा विवरण,संसाधन का स्त्रोत,फंडिंग पैटर्न लिया जा रहा
-अब तक मिली राशि,वित्तीय संस्था या भारत सरकार से बकाया राशि के ब्योरे को लिया जा रहा
- चालू वित्तीय वर्ष और अगले वर्ष में संभावित प्राप्तियों का मांगा विवरण
-मौजूदा योजनाओं/कार्यक्रमों के प्रतिबद्ध दायित्वों की पूर्ति के लिए भी मांगे गए संशोधित अनुमान

सीएस उषा शर्मा के स्तर पर यह की जा रही मॉनिटरिंग:
-यह सुनिश्चित किया जा रहा कि पिछली बजट की घोषणाओं को किया जाए जल्द पूरा 
-उसके लिए बजट और अन्य कमी आ रही है तो तुरंत की जाए अड़चन दूर
-शुरू हो चुके कामों को समय पर कैसे पूरा किया जाए, इसके लिए मैकेनिज्म बनाकर काम पूरा करने के निर्देश
-जिनमें केंद्र से या अन्य तरह से राशि मिली है उसमें राज्य का हिस्सा देकर प्राथमिकता से काम पूरा करने के निर्देश 
-योजनाओं पर बेहतर अमल के लिए सीएस ने लक्ष्यवार प्राथमिकताएं तय करके अमल करने को कहा

कोरोना से करीब-करीब उबरने के बाद किया जा सकता है यह:
-पिछली योजनाओं को तय समय पर कैसे पूरा किया जाए, इस पर रखा जाएगा ध्यान
--फिजिबल योजनाओं,कामों और प्रस्तावों को ही हाथ में लेने की हो सकती घोषणा
-वोटर्स पर असर डालने के लिए पूरी हो सकने वाली छोटी और किफायती योजनाओं पर रहेगा जोर
-ऐसी योजनाएं जिनमें केंद्र या अन्य तरह से आर्थिक सहायता मिल सकती है,उन्हें हाथ में लेने पर रह सकता जोर

नया कर लागू करने की संभावना बेहद कम:
-हालांकि पूर्व के करों में बढ़ोतरी संभव
- अलग अलग श्रेणियों में शराब,तंबाकू और उससे जुड़े अन्य पदार्थों की दरों को बढ़ाया जा सकता है
- भूमि  का अलग अलग श्रेणियों में हुआ था वर्गीकरण । इन श्रेणियों में बढ़ोतरी संभव है. साथ ही नई श्रेणियां भी बनाई जा सकती हैं.
-अलग अलग व्यापार के लिए स्टाम्प ड्यूटी में राहत देना संभव।
-कई उद्योगों को एमनेस्टी स्कीम के दायरे में लाकर उन्हें उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहन संभव.
-निवेश बढ़ने से सरकार का राजस्व बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

कृषि बजट:
-कृषि और उससे जुड़े विभागों की घोषणाओं को इकट्ठा करके उसके लिए अलग से बजट होगा
-निचले स्तर पर कृषि से जुड़े जितने भी हैं विभाग उन सभी को ड्राफ्ट तैयार रखने के हैं निर्देश
-पिछली घोषणाएं क्या पूरी हुईं, कितनी अधूरी रहीं, इसका ब्योरा देने के निर्देश
-अधूरी घोषणाओं को पूरी करने का रोडमैप देने के भी निर्देश

कोरोना से अर्थव्यवस्था उबर रही है और ऐसे में इस बार के बजट का आकार भी बढ़ेगा. पिछली बार बजट का आकार करीब 50 प्रतिशत बढ़ा था और यह बढ़कर 3 लाख 46 हजार 182 करोड हो गया था जिसमें मार्गोपाय एडवांस की राशि हटाने पर यह आंकड़ा 2 लाख 94 हजार करोड का था.

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