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VIDEO: सरकारी खजाने में खर्चे ने बढ़ाया घाटा, सदन में पेश ऑडिटर जनरल रिपोर्ट में हुआ खुलासा 

VIDEO: सरकारी खजाने में खर्चे ने बढ़ाया घाटा, सदन में पेश ऑडिटर जनरल रिपोर्ट में हुआ खुलासा 

जयपुर: राज्य सरकार के खजाने में सर्वाधिक योगदान देने वाले विभागों सहित सरकारी कोष के प्रबंधन को लेकर राज्य के महालेखा परीक्षक ने कल अपनी रिपोर्ट पेश की. राज्य विधानसभा में पेश इस रिपोर्ट की शुरुआत राजकोषीय घाटे पर की गई टिप्पणी से की गई है. इसमें राजकोषीय घाटा तीन फीसदी के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में बढ़कर 3.02 फीसदी होने व राजस्व घाटे में लगातार बढ़ोतरी पर चिंता जताई गई.

राजस्व प्राप्तियों की तुलना में बढ़ा खर्च:
AG रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 में 18 हजार 535 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा रहा. रिपोर्ट में फिस्कल लाइब्लिटी की बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई गई और बताया कि वर्ष 2013-14 में यह राशि एक लाख 29 हजार 910 करोड रुपए के स्तर से बढ़कर दो लाख 81 हजार 182 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया. खास बात यह भी रही कि वित्तीय वर्ष 2016-17 की तुलना में यह राशि दस फीसदी बढ़ी. सरकारी राजस्व आय में वृद्धि के साथ सरकारी खर्च में हुई बेतहाशा वृद्धि पर भी महालेखाकार कार्यालय ने टिप्पणी की है. 

सरकारी कर्मचारियों के वेतन भत्ते पर फिर बढ़ा खर्च:
रिपोर्ट के अनुसार सरकारी कर्मचारियों के वेतन और भत्तों पर किए गए खर्च में भी एक साल में बढ़ोतरी का रुख रहा. 2016-17 में यह खर्च कुल राजस्व खर्च का 26.30% था, जो 2017-18 में बढ़कर 29.50% के स्तर पर पहुंच गया. AG ने अधूरी पड़ी परियोजनाओं पर किए गए भारी-भरकम खर्च की राशि पर भी टिप्पणी की और बताया कि कुल पूंजीगत खर्च का 12% अर्थात 20 हजार 176 करोड़ रुपए ऐसी 247 परियोजनाओं में खर्च हुआ, जो वित्त वर्ष में अधूरी रही. राज्य सरकार की ओर से अपनी विभिन्न 49 सरकारी उपक्रमों में निवेश किए गए 44 हजार 281.63 करोड़ रुपए की राशि में से केवल 8 कम्पनियों ने लाभांश दिया. सरकार को लाभांश के रूप में 64.46 करोड़ रुपए मिले, जिनके बदले की गई निवेश की राशि 573.71 करोड़ रुपए थी. निवेशित राशि का करीब 91 फीसदी राशि पॉवर सैक्टर में हैं, जहां से सरकार को निवेश प्रतिफल के नाम पर कुछ नहीं मिला.

... संवाददाता विमल कोठारी की रिपोर्ट 

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