सरकारी अफसरों के लिए फ्लैट्स के प्रोजेक्ट पर लटकी तलवार !

Dr. Rituraj Sharma Published Date 2019/01/12 10:43

जयपुर (ऋतुराज शर्मा)। 8700 व उससे ज्यादा की ग्रेड वाले सरकारी अफसरों के लिए फ्लैट्स के प्रोजेक्ट पर इस सरकार में तलवार लटक गई है। इस प्रोजेक्ट के लिए ऐन दीपावली के मौके पर ओल्ड MREC केंपस में आवंटियों को बेदखल करने की कार्रवाई टालने के बाद अब यह योजना को लटकाए रखा जा सकता है। खास रिपोर्ट-

बड़े अफसरों के लिए ओल्ड एमआरईसी के आवास तोड़कर फ्लैट बनाने की योजना ठंडे बस्ते में जाती हुई लग रही है। इसकी फाइल जहां सीएमओ ने मंगाई है, वहीं पिछली सरकार के अंतिम छह माह के निर्णय की समीक्षा के दायरे में यह निर्णय भी हो सकता है। 

आइये जानते हैं कि क्या है आवास की समस्या और क्या आ रही है अड़चन

सरकारी कर्मचारियों के लिए जयपुर में काम करने पर सरकारी आवास मिलना पहले भी मुश्किल था और अब समस्या बढ़ती जा रही है। सौ से पांच सौ तक की वेटिंग के चलते राज्य में अलग-अलग सेवा के अफसरों और ऑल इंडिया सेवा अधिकारियों के लिए ओल्ड एमआरईसी के 39 आवास तोड़कर फ्लेट्स बनाने की योजना बनाई गई, लेकिन इस योजना में शुरू से ही संकट के बादल मंडराते रहे। 

आइए जानते हैं कि क्या-क्या कठिनाइयां आईं

जीएडी की ओर से अलग-अलग श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों,अधिकारियों,स्टेट सेवा के अफसरों और ऑल इंडिया सेवा के अधिकारियों को सरकारी आवास मुहैया कराए जाते हैं, लेकिन इनकी वेटिंग बड़ी होने से अक्सर आईएएस अधिकारियों तक को सरकारी आवास मुहैया नहीं हो पाते हैं। तबादले और प्रशासनिक जरूरत के मुताबिक कई बार आईएएस या ऑल इंडिया सेवा अफसरों को आउट ऑफ टर्न आधार पर आवास आवंटन का रास्ता अपनाना पड़ता है। इसके मद्देनजर 2016 में तत्कालीन सीएस की अध्यक्षता में बैठक में ओल्ड एमआरईसी केम्पस के 39 मौजूदा आवास को तोड़कर बहुमंजिला फ्लेट्स बनाना तय हुआ। 

क्या थी यह प्लानिंग

18 सितंबर 2017 को तत्कालीन सीएस की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हुआ कि 6 ब्लॉक्स में 298 फ्लैट्स बनने हैं। टाइप वन श्रेणी का क्षेत्र 2200-2500 स्कवायर फीट होगा। इसके निर्मााण के लिए राज्य सरकार और NBCC को मिलाकर REDCC एजेंसी बनाई है। इससे पिछली सरकार ने फ्लेट निर्माण का एग्रीमेंट किया था। दो ब्लॉक्स या 2 टॉवर्स का आरईडीसीसी बेचान करेगी यानि उसका उपयोग व्यावसायिक होगा। अफसरों के लिए सरकार गांधी नगर स्थित ओल्ड एमआरईसी कैंपस के 39 आवासों को तोड़कर टाइप वन श्रेणी के 250 फ्लैट तैयार करेगी। इसके जरिये आईएएस,आरएएस और डॉक्टर्स और उनके ही समकक्ष ग्रेड पे वाले अफसरों की आवास समस्या दूर होनी है।

लेकिन यह आ गया संकट

दरअसल जिस भूमि पर फ्लेट्स बनना प्रस्तावित किया गया उसका लेंड टाइटल क्लियर नहीं था। ऐसे में तत्कालीन सीएस ने पहले लेंड टाइटल यानि मिल्कियत के विवाद को दूर करने के निर्देश दिए। 18 सितंबर 2017 की बैठक में निर्णय हुआ कि MREC ओल्ड कैम्पस में जिस जमीन पर बड़े साहबों के लिए करीब 298 फ्लैट्स बनने हैं उस जमीन का पहले टाइटल क्लियर कराकर सरकार को अपने कब्जे में लेना होगा। इसके तहत जेडीए अब कमेटी बनाकर पहले लैण्ड टाइटल के मुद्दे को दूर करने को कहा था। 

दरअसल इस पूरी जमीन का टाइटल तो MREC के नाम पर है लेकिन जिस क्षेत्र विशेष में फ्लैट्स बनना प्रस्तावित है उसका लैण्ड टाइटल अलग से नहीं है।ऐसे में सीएस ने निर्देश दिया है कि अगली बैठक में जेडीए लैण्ड टाइटल को लेकर साफ स्थिति बयान करेगा तो बात आगे बढ़ेगी। इस लैण्ड टाइटल क्लियर कराने में 1 वर्ष से ज्यादा समय लग गया। यह मसला अगस्त 2018 के बाद हल हुआ और आखिरकार जब लेंड टाइटल क्लियर हुआ और प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो यह संकट सामने आया। कुल 39 में से 18 आवास पहले से ही खाली पाए गए। वहीं 16 पहले और दो आवंटियों को बाद में आवास खाली करने का नोटिस दिया गया। इनमें से बाद के दो आवंटी वे थे जो रिटायर्ड हो गए थे फिर भी आवास खाली नहीं कर रहे थे। बाकी 3 आवास वरिष्ठ पत्रकारों के थे जिनके मामले अदालत में होने से कार्रवाई नहीं हो पा रही है। 

इस पर अब जीएडी ने यह एक्शन लिया है

कुल 39 आवंटियों को पहले वैकल्पिक आवास दिए गए और फिर खाली करने का नोटिस दिया गया। इनमें से 18 आवास खाली हो चुके हैं। 3 पत्रकारों को छोड़कर बाकी 18 आवंटियों को 25 अक्टूबर तक आवास खाली करने का नोटिस दिया था। फिर इन्हें पानी-बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी देकर नोटिस दिया गया। यहां तक कि पीडब्ल्यूडी इंजीनियर्स को पानी-बिजली कनेक्शन काटने के लिए कह भी दिया था। इस पर ओल्ड एमआरईसी से जुड़ी सोसाइटी के सदस्यों ने सीएस डीबी गुप्ता से मुलाकात की और दीपावली तक कार्रवाई रोकने की मांग की। तब नई सरकार तक मामला टल गया था। अब नई सरकार में इससे जुड़ी फाइल सीएमओ में है और यह पिछली सरकार के अंतिम 6 माह के निर्णयों की समीक्षा में भी शामिल हो सकता है क्योंकि कैबिनेट ने इसके लिए किए गए एग्रीमेंट को 8 अक्टूबर 2018 को मंजूरी दी है। 

इसे लेकर 1 वरिष्ठ अधिकारी ने भी आपत्ति की थी।साथ ही अभी तक के रुख से यही लग रहा है कि इस सरकार में यह मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है।
 

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