चुनाव में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का निधन

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/11/11 15:11

नई दिल्ली भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का रविवार को चेन्नई में निधन हो गया. शेषन ने 1990 के दशक में देश में चुनाव सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वे 86 वर्ष के थे. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूर्व चुनाव आयुक्त का स्वास्थ्य पिछले कुछ सालों से ठीक नहीं था. दिल का दौरा पड़ने से रविवार को रात करीब साढ़े नौ बजे उनका निधन हो गया.चुनाव आयोग को मौजूदा रुतबा दिलाने वाले टीएन शेषन का रविवार को निधन. 86 वर्ष की उम्र में हुआ. शेषन पिछले कई सालों से बीमार चल रहे थे और चेन्नई में रह रहे थे.शेषन को अबतक का सबसे कड़क चुनाव आयुक्त माना जाता है.उनके कार्यकाल में चुनाव आयोग को सबसे ज्यादा शक्तियां मिली.चुनाव सुधार भी लागू हुए. मतदाताओं के लिए मतदान पत्र अनिवार्य हुए.आचार संहिता का सख्ती से पालन शुरू हुआ. अपनी स्पष्टवादिता के लिए प्रसिद्ध शेषन बढ़ती उम्र के कारण पिछले कुछ सालों से सिर्फ अपने आवास पर रह रहे थे. 

उनका बाहर आना-जाना लगभग ना के बराबर हो गया था.शेषन की बदौलत फर्जी मतदान पर रोक लगी और लोकतंत्र की नींव और ज्यादा मजबूत हुई. पार्टियों और प्रत्याशियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए पर्यवेक्षक तैनात करने की प्रक्रिया का सख्ती से पालन हुआ. शेषन ने ही चुनाव में राज्य मशीनरी का दुरुप्रयोग रोकने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती को और ज्यादा मजबूत बनाया. इससे नेताओं की दबंगई कम हुई.

तिरुनेलै नारायण अइयर शेषन यानी टी.एन. शेषन भारत के 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त थे.उनके कार्यकाल से पहले तक चुनाव में बेहिसाब पैसा खर्च होता था और पार्टी एवं प्रत्याशी इसका हिसाब भी नहीं देते थे. उन्होंने आचार संहिता के पालन को इतना सख्त बना दिया कि कई नेता शेषन से खार खाते थे.इनमें लालू प्रसाद यादव प्रमुख थे.यह शेषन की ही देन है कि अब चुनावों में राजनीतिक दल और नेता आचार संहिता के उल्लंघन की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। उनके कार्यकाल के दौरान ही पहचान पत्र बने. 12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर 1996 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर रहे. 

 शेषन को चुनाव में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए याद किया जाता है..चुनाव में वोट डालने के लिए वोटर आईडी कार्ड का इस्तेमाल होने लगा. इससे फर्जी मतदान पड़ने कम हुए. यह भी कहा जाता है कि शेषन जब चुनाव आयुक्त थे उस वक्त वोट देने के लिए शराब बांटने की प्रथा एकदम खत्म हो गई थी.चुनाव के दौरान धार्मिक और जातीय हिंसा पर भी रोक लगी थी.टी.एन. शेषन को भारत का सबसे प्रभावशाली मुख्य चुनाव आयुक्त माना जाता था. 

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in