VIDEO: नहीं रहे पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा, लंबे समय से थे कैंसर से पीड़ित, पूरे मारवाड में छाई शोक की लहर

VIDEO: नहीं रहे पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा, लंबे समय से थे कैंसर से पीड़ित, पूरे मारवाड में छाई शोक की लहर

जोधपुर(राजीव गौड़): राजस्थान सरकार में पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महिपाल मदेरणा का आज सुबह जोधपुर में उनके निवास पर निधन हो गया. वे लंबे अर्से से कैंसर से पीड़ित थे. महिपाल मदेरणा कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष परसराम मदेरणा के पुत्र है. महिपाल मदेरणा की पुत्री दिव्या मदेरणा अभी औंसिया से विधायक है. महिपाल मदेरणा का निधन आज सुबह हुआ. उनके निधन के बाद जहां पूरे मारवाड में शोक की लहर है. मारवाड के कद्दावर नेता महिपाल मदेरणा पूर्व में गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे थे. वे पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में जल संसाधन मंत्री थे. मदेरणा परिवार का राजस्थान की राजनीति से लंबा नाता रहा है. 

5 मार्च, 1952 का जोधपुर जिले के फलौदी में श्रीलक्ष्मणनगर में परसराम मदेरणा के परिवार में जन्में महिपाल मदेरणा ने जोधपुर विश्वविद्यालय से बी.ए., एल.एल.बी तक शिक्षा प्राप्त की है. मदेरणा का 8 दिसम्बर, 1982 को लीलादेवी के साथ विवाह हुआ. व्यवसाय से कृषक मदेरणा 5 दिसम्बर, 2003 को 12वीं राज्य विधानसभा के लिए भोपालगढ क्षेत्र से निर्वाचित हुए. वर्ष 2000-05 तक जनलेखा समिति के सदस्य रहे. ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज क्षेत्र में सक्रिय रहे मदेरणा वर्ष 1981, 88, 94, 2000 में लगातार चार बार जोधपुर जिला परिषद के जिला प्रमुख बने. मदेरणा केन्द्रीय सहकारी बैंक जोधपुर, मार्केटिंग सोसायटी, भोपालगढ, ग्राम सहकारी समिति, चाडी, तहसील फलौदी के अध्यक्ष भी रहे. मदेरणा तेरहवीं विधानसभा के लिए औसियां क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे. मदेरणा को 19 दिसम्बर, 2008 को राजभवन में महामहिम राज्यपाल ने गहलोत मंत्रिमंडल में कबीना मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई थी. मदेरणा को जल संसाधन, इंदिरा गाँधी नाहर, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, भूजल, सिंचित क्षेत्र विकास विभाग का मंत्री बनाया गया था.

दिवंगत पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा भी लंबे समय प्रदेश की राजनीति का सक्रिय हिस्सा रहे हैं. अपने पिता दिग्गज कांग्रेसी परसराम मदेरणा से राजनीतिक गुर सीखने के बाद महिपाल मदेरणा भी राजनीति में आए. वर्ष 1982 में पहली बार जिला प्रमुख बने. इसके बाद यह स्थिति वर्ष 2003 तक चली. इसके बाद महिपाल मदेरणा ने विधानसभा का चुनाव लड़ा था. किसी वक्त परसराम मदेरणा और उनके बेटे महिपाल मदेरणा का प्रदेश की राजनीति में दबदबा हुआ करता . साल 1980 में परसराम विधायक व मंत्री थे और तो उनके बेटे 1982 में पहली बार जिला प्रमुख बने थे. 1998 की गहलोत सरकार में परसराम मदेरणा विधानसभा अध्यक्ष थे.

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