VIDEO: भूतिया कमाई का जरिया बनी स्वंय सेवी संस्थाएं, मृत लोगों के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/14 09:37

दौसा: दौसा में एनजीओ की आड़ में फर्जीवाड़ा करने, मृत लोगों के फर्जी हस्ताक्षर कर संस्था चला कर लाभ कमाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. आज जयपुर के आरटीआई समूह ने दौसा पहुंच कर प्रेसवार्ता कर फर्जीवाडे का दावा किया, तो दूसरी ओर आरोपित हो रहे पक्ष ने भी आज सामने आकर आरटीआई कार्यकर्ताओं की मंशा पर सवाल उठाए. कहा कि ये संस्था की सम्पति को हड़पने का स्टंट है. एक रिपोर्ट:

बड़ी धांधली होने का दावा:
दौसा में एक एनजीओ रधुकुल शिक्षण संस्थान में बड़ी धांधली होने का दावा करते हुए हुए आरटीआई कार्यकर्ता समूह ने आरोप लगाए कि इस संस्थान ने 2013 में मर चुके लोगों के नाम पर संस्था को चलाया और 80 लाख रुपये की बैलेंस सीट बनाई. आरटीआई कार्यकर्ता अशोक कुमार ने दावा किया कि एक शख्स गंगाधर को भी पदाधिकारी बना कर रखा. जबकि गंगाधर दावा कर रहे है कि वे कभी पदाधिकारी ही नहीं रहे. आरटीआई कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि ऐसी संस्था पर कार्यवाही होनी चाहिये. 

दूसरा पक्ष भी आया सामने:
आरटीआई कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि इस संस्था में बडे घपले हुए है और इसे उजागर करना उन का फर्ज है. जबकि प्रेसवार्ता के बाद दूसरा पक्ष भी सामने आया और आरटीआई कार्यकर्ता की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए. संस्था के पदाधिकारी मन्त्री ने दावा किया कि संस्था में जिस घपले का जिक्र किया जा रहा है, वो खुद आरटीआई कार्यकर्ता गंगाधर के अध्यक्षीय कार्यकाल में ही हुआ. इस लिए वे दावा कर रहे हैं कि वे संस्था के कभी पदाधिकारी ही नहीं रहे. जबकि संस्था द्वारा खरीदी गई भुमि की रजिस्ट्री गंगाधर के नाम है, जिसकी उन्होंने लीज डीड भी करवाई है, जो कि छूठी नहीं हो सकती. साथ ही आरोप लगाए कि जिस 89 लाख का जिक्र किया जा रहा है, उस भुमि व भवन पर भी उन्होंने कब्जा कर रखा है. जिसकी पुलिस थानों में तीन एफआईआर दर्ज है और पूरा विवाद उसी सम्पति को लेकर है, जिसे गंगाधर हथियाना चाहते हैं. 

प्रकरण पुलिस थाने में भी दर्ज:
दरअसल इस संस्था में बंटवारे का विवाद इस कदर गहराया हुआ है कि दोनों पक्ष एक दूसरे की शिकायतें कर रहे है और प्रकरण पुलिस थाने में भी दर्ज हो चुके है. शिकायत के आधार पर उप रजिस्ट्रार दौसा की ओर से जांच की गई. इस जांच रिपोर्ट से ये तो साफ है कि इस संस्था में मृत पदाधिकारियों के नाम का जमकर दुरूपयोग किया गया. फर्जी हस्ताक्षर से चुनाव संपन्न हुए व कार्यवाही अंकित की गई, लेकिन जांच का विषय ये भी है कि ये फर्जीवाडे किन पदाधिकारियों के द्वारा किए गए और अब इन पर क्या कार्रवाई की जाए. 

लाभ कमाने का एक बड़ा जरिया:
बहरहाल इस संस्था में उपजे विवाद और जांच रिपोर्ट के बाद ये साफ है कि एनजीओ, जो बिना लाभ कमाए सामाजिक कार्य के लिए पंजीकृत की जाती है, वे आज फर्जीवाडे व बेहताशा आय कमाने का जरिया बन गई है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि जिन्हें स्वयं सेवी संस्था नाम दिया जाता है और कानूनी लाभ दिए जाते हैं, वे फर्जीवाड़ा करने व लाभ कमाने का एक बड़ा जरिया बन चुकी है. अब देखना ये है कि इन पर क्या कार्रवाई की जाती है.  

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