असली दस्तावेजों से फर्जी कंपनियां, सामने आई 400 करोड़ की जीएसटी चोरी

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/21 06:53

सुमेरपुर-पाली (मांगीलाल परमार)। जीएसटी चोरी के लिए गांवों में अनपढ़ व बेरोजगार युवाओं के दस्तावेज जुटाकर उनके नाम फर्जी कंपनी खोल फर्जी बिलिंग के जरिए करोड़ों रुपए की कर चोरी का खुलासा केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर विभाग की टीम ने किया है। 

राजस्थान के अलावा देश के पांच राज्यों गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मास्टरमाइंड ने इन युवाओं को व्यापार का झांसा देकर 54 से अधिक फर्जी कंपनियां खोलकर उनमें 3500 करोड़ से ज्यादा ट्रांजेक्शन किया है। इसके तार सुमेरपुर, रानी और तखतगढ़ से भी जुड़े हैं। जहां विभाग ने कार्रवाई करते हुए करीब 46 करोड़ रुपए की कर चोरी पकड़ी है। दावा किया जा रहा है कि इन सभी के पीछे एक ही मास्टर माइंड है। जिसके तार पाली से जुड़े हैं, उसकी तलाश जारी है। इस नेटवर्क के जरिए 400 करोड़ की कर चोरी का खुलासा होने की संभावना है। 

जानकारी के अनुसार पाली के केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर विभाग की ओर से कुछ महीने पूर्व जीएसटी का लेकर डेटा एनालाइसिस किया गया। इसमें सामने अाया कि पाली समेत देश के कई ऐसे शहरों के छोटे-छोटे गांव हैं जहां पर करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन किया जा रहा है। जब विभाग को संदेह हुआ तो सुमेरपुर, रानी और तखतगढ़ में छापे मारे। सामने अाया कि जीएसटी से बचने के लिए यहां पर किसी ने फर्जी फर्म खोल दी और जिन लोगों के नाम यह फर्म या यूनिट है उनके नाम के खाते खोलकर जीएसटी में फर्जी तरीके से पंजीयन कराया। उनके बैंक खाते से करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन किया गया। इस नेटवर्क के जरिए करीब अकेले सुमेरपुर, रानी और तखतगढ़ से 300 से 400 करोड़ के फर्जी बिल पकड़े हैं। इस पर जब इन लोगों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्हें इसके बारे में जानकारी तक नहीं है कि उनके दूसरे खाते से करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन हो रहा है। जिले के सुमेरपुर से एक बैंक खाते से 44 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन सामने आया। 

हैरानी की बात यह है कि जिसके खाते से यह करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ है उसे इसकी जानकारी तक नहीं। इसी संदेह के आधार पर रानी और तखतगढ़ में भी दो अन्य यूनिट के खाते खंगाले गए। इन तीनों को मिलाकर करीब 100 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ। इस पर विभाग 46 करोड़ रुपए की कर चोरी का आकलन किया है। 

माना कि किसी व्यापारी ने 100 रुपए के माल पर 5 रुपए टैक्स लगा उसे 105 रुपए में किसी अन्य व्यापारी को बेच दिया। यह 5 रुपए सरकार के खाते में न जाए इसके लिए मास्टरमाइंड ने फर्जी कंपनी के नाम फर्जी बिल तैयार कर दिए। ऐसे में जो 5 रुपए टैक्स वसूला वह सरकार के खाते में न जाकर व्यापारी के पास ही रह गए। इसके बाद उसी फर्जी बिलिंग के जरिए दूसरे व्यापारी बिलिंग कर माल बेचते हैं। फर्जी बिल में भले ही टैक्स बताया जाता है लेकिन वह सरकार तक पहुंचता ही नहीं। यह सब इनपुट टैक्स क्रेडिट को पासऑन करने के लिए किया गया। जानकारों की मानें तो इन सभीके पीछे एक ही मास्टर माइंड के होने की संभावना है। 

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