इस मंदिर से किसान मानसून आने का लगा लेते है सटिक अनुमान

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/07/05 10:46

कानपुर(उत्तर प्रदेश)। प्राचीन काल से भारत के किसान मौसम की जानकारी के लिए तरह-तरह के उपायों का इस्तेमाल करते चले आ रहे है। आज भी गांवो में रसखान के सवैयों से मौसम की जानकारी हासिल की जाती है जैसे :- " लाल पियर जब होए आकासा ( आकाश ), तब जानो वर्षा की आसा( आशा) " करते है। इसके आलावा गांवो के बड़े बुजुर्गों के अनुभवों से भी किसान मौसम की जानकारी करते है। इसी तरह कानपुर महानगर के एक  गाँव 'बेहटा' में स्तिथ एक प्राचीन मंदिर से किसान मानसून आने का सटीक अनुमान लगा लेते है और उसी के अनुसार अपने खेतों में काम पर लग जाते है। 

कानपुर महानगर के घाटमपुर तहसील में पड़ने वाले 'बेहटा' गांव का यह प्राचीन जगन्नाथ भगवान् का मंदिर इस क्षेत्र के किसानो के लिए एक वरदान है। लगभग ५००० साल पुराने इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां पर मानसून आने से १५ दिन पहले ही मंदिर की छत से पानी टपकने लगता है और पानी टपकने की दर से पता चल जाता है कि, वर्षा कम,मध्यम या प्रचुर  मात्रा में होगी। जितनी ज्यादा मात्रा में मंदिर से पानी टपकता है उतनी ही तेज़ बारिश होती है। यही नहीं इस मंदिर से ५० किलोमीटर के दायरे में वर्षा का प्रभाव रहता है जिसके चलते ३५ गांवो के किसान इससे फायदा उठाते चले आ रहे हैं। 

हालांकि 21वीं सदी के लोग शायद ही इस बात पर विश्वास करे पर यह सच है और इतना सच की बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी चकरा जाएं। आज जहां विज्ञान के लिए मौसम की सटीक भविष्यवाणी कर पाना भी संभव नहीं है वही ये ५००० साल पुराना मंदिर बारिश की इतनी सटीक भविष्यवाणी करता है। जिसके चलते किसान अपने खेत को जोतने का समय निश्चित करके पहले से ही बीज,खाद आदि का प्रबंध  कर लेते है। 

आपको बतादे की मौजूदा समय मे भारत के आधे हिस्से में जहां अच्छी बारिश से जहा सराबोर है तो वही बुंदेलखंड लगा हुवा यह मंदिर और छेत्र अभी भी अच्छी बारिश का अनुमान ही लगा रहा है।

 "भारत संभावनाओं का देश है" इस देश में अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जिसकी खोज होनी बांकी है। आस्था , विश्वास और परम्पराओं वाले इस देश में आश्चर्यों की कमी नहीं है।
 

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