झुंझुनूं में तैयार हो रही शहादत की पूरी बटालियन

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/07/16 07:15

बिसाऊ (झुंझुनूं)। राजस्थान के कण कण में है देशभक्ति का जज्बा, जो बचपन में मली बदन पर उस माटी को नमन करूंगी,जिस पर कखग लिखा था उस पाटी को नमन करूं,दो दानी सेठों की धरती और वीरों की महतारी है,उस अपनी जन्‍म भूमि शेखावाटी को नमन करूं...जी हां हम आज शाने राजस्‍थान में इस स्‍लोगन को सार्थक करती उस वीर प्रसूता धरा से आपका परिचय करवा रहे है। जहां पर मातृभूमि को ही सब कुछ समझा जाता है1

बात अगर रोजगार की करें तो यहां के युवा रोजगार को दरकिनार करते हुए मातृभूमि की रक्षा में अपनी भूमिका को पहली प्राथमिकता देते है और यहीं वजह है कि शेखावाटी और पूरे राजस्थान ने देश को सर्वाधिक सैनिक और शहीद देने का गौरव हासिल किया है। गांव-ढाणियों में लगी हुई शहीदों की आदमकद प्रतिमाएं इस बात की गवाह है कि यहां की वीर प्रसूताएं मांए बच्‍चे को जन्‍म के साथ ही अपने दूध में देशभक्ति के गुण पिलाती है और लोरियों में देश रक्षा के गीत सुनाए जाते है। इसलिए मारवाड़ी (शेखावाटी की भाषा) में कहावत चरितार्थ है...पूत जणे तो एडा जण, जै माता के सूर, नहीं तो रिजे बांझडी, मत ना गंवाजे नूर...

शेखावाटी की वीर प्रसूताओं की कहानियां जो अनकहीं है और अजर अमर है। यही कारण है कारगिल से पहले और आजादी के बाद जो सैनिक इस देश की मिट्टी के लिए शहीद हो गए और इनकी वीर गाथाओं को किताबों तक ही सीमित रहना पड़ा उनकी वीर गाथाएं, कहानियां अब उनकी प्रतिमा बयां करेगी। कुछ यही सोचकर राजस्थान सरकार में सैनिक कल्याण सलाहकार समिति अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजौर शेखावत ने अब अपने खर्चे पर उन सभी वीर सैनिकों की प्रतिमा बनाने का बीड़ा उठाया है, जिन्होनें हंसते-हंसते देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये।

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के खुडानिया गांव में पिछले पांच माह से वीरेंद्र सिंह शेखावत शहादत की पूरी बटालियन ही तैयार कर रहे हैं। खास बात ये है कि इस बटालियन में सेना की विभिन्न यूनिट, बटालियनों के जवान एक साथ मौजूद हैं। इस बटालियन की पृष्ठभूमि में तिरंगा लहरा रहा है। अभी इस बटालियन में करीब पचास जवान, अधिकारी शामिल हो चुके हैं, लेकिन यह आंकड़ा पहले चरण में एक सौ से पार तथा बाद में कुल 1100 तक पहुंचने वाला है। चौंकिए मत ये न तो कोई कहानी है और न ही कोई रंगमंच है, जहां इतने सारे जांबाज एक साथ अलग-अलग ड्रेस में मौजूद हैं, ये इन शहीदों की प्रतिमाएं हैं जो प्रदेश के सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के चेयरमैन प्रेम सिंह बाजौर अपने खर्चे पर बनवा रहे हैं। 

ये प्रतिमाएं इन शहीदों के गांवों में बारी-बारी से लगाई जा रही हैं। बाजौर ने प्रदेश के करीब 1100 शहीदों की प्रतिमाएं बनवाने का बीड़ा उठाया है, इस पूरे काम पर कुल 25 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इसके बाद राजस्थान देश का ऐसा अकेला राज्य बन जाएगा जहां के तमाम शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित हो जाएंगी। इस काम को लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। 14 माह में 29 जिलों में पहुंची शहीद सम्मान यात्रा 1 लाख किलोमीटर का सफर कर चुके है, 1365 शहीदों के घर जा चुके  और 1.50 लाख रुपए खर्च आ रहा एक प्रतिमा पर साथ ही 50 प्रतिमाएं बन चुकी हैं 5 माह में अब तक 135 शहीदों के चित्र ही मिल पाएं हैं। 

सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर ने पिछले साल एक अप्रैल 2017 को झुंझुनूं जिले के धनूरी गांव से शहीद सम्मान यात्रा शुरू की थी। धनूरी से सर्वाधिक करीब दस शहीद हैं। इस दौरान बाजौर ने पाया कि करगिल युद्ध के बाद के अधिकांश शहीदों की प्रतिमाएं लग चुकी हैं, लेकिन 1999 से पहले के करीब 1100 शहीदों की प्रतिमाएं नहीं हैं, ऐसा इसलिए भी है क्योंकि पहले तो शहीदों की केवल ड्रेस आती थी। बाजौर ने तय किया कि वे ऐसे सभी शहीदों की प्रतिमाएं अपने खर्चे से बनवाएंगे। इसके बाद से बाजौर ने झुंझुनूं जिले के खुडानिया निवासी वीरेंद्र सिंह शेखावत को शहीदों की प्रतिमाएं बनाने का काम सौंपा। बाजौर ने बताया, "शहीद सम्मान यात्रा के दौरान शहीदों के घरों तक पहुंचा तो कई जगह शहीदों की बूढ़ी मांओं ने कहा, "म्हारै बेटे री मूरती तो लगवा दो बाजौर साब! बस उसी दिन फैसला कर लिया, हर शहीद की प्रतिमा लगवाऊंगा।"

देश के लिए कुर्बानी देने वाले को शेखावाटी अंचल में भगवान का दर्जा दिया जाने लगा है। भगवान का दर्जा देने के पीछे वजह है कि जो अपने देश और सच के लिए प्राणों की आहूति दे वह भगवान से कम नहीं है और यही वजह है कि अब शेखावाटी में शहीदों को लोक देवता के रूप में पूजा जाने लगा है।
शहीदों के प्रति सम्‍मान शेखावाटी के साथ पूरे राजस्थान में विशेष रूप से देखने को मिलता है और यहीं वजह है कि अब तो शहीदों को लोक देवता के रूप में पूजा जाने लगा है। शहीदों की पतिमाओं पर जहां मेले आयोजित होते है तो परंपरागत जात झडूले और नव विवाहिताओं के शादी की जात भी देने अब शहीदों की प्रतिमाओं पर आते है। 

शहीदों के सम्‍मान के लिए सरकार आमजन हर कोई सदैव तत्‍पर रहता है। आज आलम यह है कि सेना का नाम आते ही हर कोई दिल खोलकर सहयोग करता है और यही वजह है कि सेना में भर्ती होने का जज्‍बा यहां दिन दोगुना और रात चौगुना हो रहा है तो फौज में रंगरूट बनकर युवा देश की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहते है।
 

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in