पढ़ने के लिए भेजा स्कूल, बच्चियां काट रही है लकड़िया

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/08 02:26

जैसलमेर। जिले में एक तरफ जहां केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना के तहत सैंकड़ों महिलाओं को धुएं से मुक्त होकर रसोई से बेफिक्र होने का लाभ मिला है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ जिले के सरकारी विद्यालयों में यह स्थिति है कि पिछले 7 दिनों से रसोई गैस का वितरण नहीं होने से बालिकाओं को वन में जाकर वहां से लकड़ी काटकर लानी पड़ रही है। नाचना के कस्तुरबा गांधी बालिका आवासी विद्यालय व राजकीय शारदा आवासीय विद्यालय में रसोई गैस का वितरण नहीं होने से करीब 200 बालिकाओं को वन से लकड़िया काटकर लानी पड़ रही है। उसके बाद इन दोनों आवासीय विद्यालयों में खाना पकता है, जिसके बाद बालिकाएं खाना खा सकती है।

पढ़ने के लिए भेजा स्कूल, बच्चियां काट रही है लकड़िया
अभिभावकों ने सरकार के अनुसार बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने के उद्देश्य से बालिकाओं को आवासीय विद्यालय में दाखिल करवाया है। लेकिन सरकारी अधिकारियों की उदासीनता व स्थानीय स्टाफ की लापरवाही के कारण आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत बालिकाएं लकड़ियां काटने को मजबूर है। नाचना में रसोई गैस के वितरक की मनमानी के चलते पूरे कस्बे में पिछले सात दिन से रसोई गैस का वितरण नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही इन दोनों विद्यालयों में कार्यरत स्टाफ भी पूरी तरह से लापरवाह है। जिससे बालिकाओं को वन में जाकर वहां लकड़ियां काटने को मजबूर है। जिसके बाद ही इन दोनों आवासीय विद्यालयों में रहवासी बालिकाओं को खाना खाने से पहले भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

तो आखिर कौन है जिम्मेदार
बच्चियों द्वारा लकड़िया काटकर लाने के बाद उन्हें खाना परोसा जा रहा है। इसमें पूरी तरह से छात्रावास का स्टाफ ही लापरवाही का कारण है। हालांकि गैस सिलेंडर का वितरण भी परेशानी का कारण है। लेकिन इतने समय तक रसोई गैस की आपूर्ति किस प्रकार हो रही थी व छात्रावासों में सिलेंडर खाली होने के बाद ही अधिकारियों ने पूरा दोष गैस वितरक पर डाल दिया। लेकिन गैस वितरक व छात्रावास के स्थानीय स्टाफ की लापरवाही के कारण ही बच्चियों को लकड़ियां काटनी पड़ रही है। इस संबंध में पहले भी कई बार बच्चियों द्वारा इस प्रकार के काम करने की शिकायते प्राप्त हुई है लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा भी इस संबंध में ना तो कोई ठोस कदम उठाएं जा रहे है और ना ही सिलेंडर की व्यवस्था की जा रही है।

वितरक की मनमानी से ग्रामीणों में रोष
नाचना में गैस वितरण की एकमात्र एजेंसी होने से वितरक की मनमानी हावी हो गई है। इससे ग्रामीणों में भी वितरक की मनमानी के प्रति रोष व्याप्त हो गया है। ग्रामीण पिछले कई दिनों से रसोई गैस के लिए एजेंसी के चक्कर लगा रहे है। लेकिन उन्हें वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। 

उच्चाधिकारी भी गंभीर नहीं
जब फर्स्ट इंडिया ने इस संबंध में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी से बात की तो उन्होंने कैमरे के सामने आते हुए मोबाइल में बात करते हुए कहा की लकड़ियां काटकर लाना व उस पर खाना बनाना सही बता दिया। गौरतलब है कि हाल ही में हुए शिक्षा विभाग में परिवर्तन के बाद जैसलमेर में उपनिदेशक स्तर के अधिकारी बैठने शुरु हो गए है। जब उच्चाधिकारी ही बालिकाओं के लकड़ियां काटने की बात से गंभीर नहीं है तो इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि छात्रावास में बालिकाओं को और कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा होगा। गैस सिलेंडर की अापूर्ति नहीं हो रही है तो कोई बात नहीं। लकड़ी पर खाना तो बन रहा है, ऐसा तो नहीं है कि भोजन ही नहीं मिल रहा। छात्रावासों में भोजन बनना चाहिए, चाहे कैसे भी बने। लकड़ी से बना भोजन भी खराब नहीं होता, पहले भी लोग लकड़ियां काटकर लाते थे, उन पर भोजन बनाकर खाते थे। यह तो सिलेंडर मिल रहा है, अगर नहीं मिलेगा तो फिर क्या करेंगे।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in