गवरी का हुआ समापन, गौरजा माता की निकाली सवारी 

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/05 02:04

कुराबड़ (उदयपुर)। मेवाड़ अंचल में खेले जानी वाली गवरी का नवरात्री आरम्भ होने से पूर्व विराम लगना आरम्भ हो गया है। इसी के तहत गिर्वा और मेवल क्षेत्र में गवरी वलावन कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर दुरस्थ क्षेत्र से आये आदिवासियों ने मेवाड़ की लौकिक संस्कृति का भरपूर आनन्द लिया। इस अवसर पर गांव से लेकर गवरी स्थल तक रास्ता लोगों से अटा रहा। सवा महीने तक चली गवरी में आज दोपहर में गौरजा माता की सवारी और ज्वारे के साथ शोभायात्रा निकाली गयी।

जिसमें मादल की थाप पर गवरी खेलने वाले थिरकते रहे साथ ही सरकारी स्कूल में भव्य आयोजन हुआ। लोगों ने गवरी नृत्य का आनन्द लिया। हाथी सवारी से निकली गौरजा माताजी का भव्य जागरण के साथ-साथ चोर और बंजारे का खेल हुआ। जिसमें दोनों खेल-खेल में हाथापाई, तलवार और भाले से वार करते हुए मादल की थाप पर एक-दूसरे से गुत्थम गुत्था करते देर शाम तक खेलते हुए नदी में पाती का विसर्जन हुआ। 
भाइयों ने बहन से पेरावनी को किया मना :
अमूमन गवरी समाप्ति पर बहनों द्वारा भाइयों को पेरावनी करवाई जाती है लेकिन समय के साथ अब पुरानी परंपरा को भाई कर्ज मानने लगे है। जिसमें पेरावनी को स्वीकार नहीं करके ग्राम पंचायत सरू में समाज की अलख जगाई है। एक समाज को अनूठा उदाहरण देकर भाइयो ने गुड़ या मिठाई लेना स्वीकार किया। यहां पर सवा महीने से चले आ रहे अनुष्ठान में भाइयो के व्रत बहनों ने मुंह मीठा कर व्रत खुलवाया।

उदयपुर है गवरी की जन्मस्थली :
राजस्थान की समृद्ध लोक परम्परा में कई 'लोक नृत्य' एवं 'लोक नाट्य प्रचलित' है। इन सबसे अनूठा है- 'गवरी' नामक 'लोक नृत्य-नाटिका'। यह भील जनजाति का नाट्य-नृत्य अनुष्ठान है। जो सैकड़ों वर्षों से प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के एक दिन पश्चात ठंडी राखी से प्रारंभ होता है और फिर सवा माह तक आयोजित होता है। इसका आयोजन मुख्यत: उदयपुर और राजसमन्द जिले में होता है। इसका कारण यह है कि इस खेल का उद्भव स्थल उदयपुर माना जाता है तथा आदिवासी भील जनजाति इस जिले में बहुतायत से पाई जाती है। 'गवरी' भीलों का सामाजिक व धार्मिक नृत्य है। गवरी का प्रचलन डूंगरपुर, भीलवाड़ा, उदयपुर व सिरोही आदि क्षेत्रों में प्रमुखता से देखने मिलता है। यह शिव पार्वती गौरी पूजा से संबंधित है। 

गौरजा माता से मिलती है पाती :
गवरी लोक कथाओं के अनुसार -"देवी गौरजा धरती पर आती है और भील परिवारों को खुशहाली का आशीर्वाद देकर जाती है। गौरजा भीलों की प्रमुख देवी है। भील परिवार मानते कि यह देवी ही सर्वकल्याण तथा उनके जीवन में खुशहाली लाने वाली देवी है। यह सभी प्रकार के संकटों से रक्षा करती है। विवादों-झगड़ों तथा दु:ख-दर्दों से मुक्ति दिलाती है। इसी देवी की आराधना में भील गवरी अनुष्ठान का संकल्प धारण करते है। भील लोग देवी गौरजा के मंदिर में जाकर गवरी लेने की इच्छा व्यक्त करते है और पाती मांगते हैं। 'पाती मांगना' एक परम्परा है, जिसमे देवी की मूर्ति के समक्ष एक थाली रखकर विनती की जाती है। यदि मूर्ति से फूल या पत्तियां गिर कर थाली में आ जाती हैं तो इसे देवी की आज्ञा माना जाता है। मंदिर में भोपा के शरीर में माता प्रकट होकर भी गवरी की इजाजत देती हैं। 

तब गांव के प्रत्येक भील के घर से एक व्यक्ति सवा माह तक पूरे संयम के साथ गवरी नाचने के लिए घर से निकल जाता है। गवरी के मुख्य खेलों में मीणा-बंजारा, हठिया, कालका, कान्ह-गूजरी, शंकरिया, दाणी जी, बाणियां चपल्याचोर, देवी अंबाव, कंजर, खेतुड़ी, बादशाह की सवारी जैसे कई खेल अत्यंत आकर्षक व मनोरंजक होते हैं। भीलों के अनुसार शिव आदिदेव है और इन्हीं से सृष्टि बनी है। पृथ्वी पर पहला पेड़ 'बड़' अर्थात 'वटवृक्ष ' पाताल से लाया गया था। देवी अंबा और उसकी सहेली व अन्य देवियों के साथ यह वृक्ष लाया गया और उसको बचाने के लिए युद्ध समेत कई खेल होते है लेकिन समय के साथ गवरी का स्वरूप बदलता गया है। 

कुराबड़ से संवाददाता नारायण मेघवाल की खबर 

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in

मक्का-मदीना की धार्मिक यात्रा पर पहुंचे सलमान खान

सपना चौधरी ने कांग्रेस में शामिल होने की खबरों का किया खंडन, कांग्रेस ने दिखाए सबूत
Face To Face With Justice MN Bhandari | Exclusive Interview
AIIMS के ट्रॉमा सेंटर में लगी भीषण आग, दमकल की 6 गाड़ियां मौके पर मौजूद
कांग्रेस ने 10 प्रत्याशियों की एक और लिस्ट की जारी
प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं राहुल गाँधी: Amit Shah
दो सीटों से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं राहुल गाँधी
सपना चौधरी ने कांग्रेस में जाने से किया इनकार