नई दिल्ली: समलैंगिक विवाह: विदेशी मूल के जीवनसाथी को OCI आवेदन की अनुमति देने की याचिका पर अदालत ने केंद्र से मांगा जवाब

समलैंगिक विवाह: विदेशी मूल के जीवनसाथी को OCI आवेदन की अनुमति देने की याचिका पर अदालत ने केंद्र से मांगा जवाब

समलैंगिक विवाह: विदेशी मूल के जीवनसाथी को OCI आवेदन की अनुमति देने की याचिका पर अदालत ने केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने मंगलवार को केंद्र और न्यूयॉर्क स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास (Consulate General of India) से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें भारतीय विदेशी नागरिकता (ओसीआई) कार्डधारक के विदेशी मूल के जीवनसाथी को उसके लैंगिक या यौन अभिमुखता की परवाह किये बगैर ओसीआई पंजीकरण की अनुमति देने की मांग की गई है.

याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि सम लैंगिक विवाह (gay marriage) को कानूनी मान्यता देने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 14,15,19 और 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है भले ही व्यक्ति का लिंग, लैंगिक या यौन अभिमुखता कुछ भी हो. इसमें कहा गया है कि भारत में प्रभावी कानून, नियमों और नीतियों के तहत समलैंगिक विवाहों को कानूनी रूप से मान्यता दी जानी चाहिए.

कोर्ट ने 27 अगस्त तक टाली मामले की सुनवाई:
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया है. पीठ इस मामले में उन अन्य याचिकाओं के साथ 27 अगस्त को सुनवाई करेगी जिनमें हिंदू, विशेष और विदेशी विवाह अधिनियमों के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग की गई है.

याचिकाकर्ता समलैंगिक दंपत्ति - जॉयदीप सेनगुप्ता (ओसीआई) और अमेरिकी नागरिक रसेल ब्लेन स्टीफंस - और भारतीय नागरिक मारियो डी. हैं. मारियो समलैंगिक अधिकार विद्वान और कार्यकर्ता हैं जो अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं.

सेनगुप्ता और स्टीफंस करीब 20 सालों से रिश्ते में:
अधिवक्ता करुणा नंदी, रुचिरा गोयल,उत्सव मुखर्जी, रागिनी नागपाल और अभय चित्रवंशी के जरिये दायर अपनी याचिका में तीनों ने अदालत को बताया कि सेनगुप्ता और स्टीफंस करीब 20 सालों से रिश्ते में हैं और छह अगस्त 2012 को उन्होंने न्यूयॉर्क में शादी भी कर ली थी जिसे अमेरिका, फ्रांस और कनाडा में मान्यता प्राप्त है. दंपत्ति अब अपनी पहली संतान की तैयारी कर रहा है और जुलाई 2021 में उसके जन्म की उम्मीद है.

स्टीफंस अपने लिए ओसीआई दर्जा चाहता है और ऐसे में कानूनी स्थिति जानने के लिये उन्होंने सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून का इस्तेमाल किया. लेकिन जब मंत्रालयों से उन्हें इस बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की.

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