जयपुर VIDEO: बम्पर बजट घोषणाओं का क्रियान्वन चुनौती, केंद्र सहायता प्राप्त योजनाओं का पैसा अटका, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: बम्पर बजट घोषणाओं का क्रियान्वन चुनौती, केंद्र सहायता प्राप्त योजनाओं का पैसा अटका, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: एक ओर जहां गहलोत सरकार की बंपर बजट घोषणाओं की क्रियान्विति चुनौतीपूर्ण लग रही है तो दूसरी ओर केन्द्रीय सहायता प्राप्त योजनाओं में राज्य के हिस्से की राशि अटकना भी सिरदर्द बना हुआ है. केन्द्र को बार-बार पत्र लिखने के बाद भी इस वित्तीय वर्ष के 3913 करोड अटके हुए हैं और ऐसे में अब सीएस ने विभागों के अधिकारियों को 1 माह तक का समय दिया है. साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ये निर्देश दिए हैं कि वे खुद दिल्ली जाकर भारत सरकार में सचिव,संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों से मुलाकात करके या अन्य जरिये से राशि जारी करवाएं. 

बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स में समय पर पर्याप्त राशि की उपलब्धता नहीं होने से विकास में बड़ी रुकावट आती है. गहलोत सरकार भी केन्द्र की मदद से जारी रहने वाली योजनाओं में राशि नहीं मिल पाने से खासी परेशान है. आलम यह है कि सीएस से मंत्री और सीएम स्तर पर बार-बार कहने और पत्र लिखने के बावजूद 10 विभागों की 3913 करोड की राशि अटकी हुई है. इनमें सबसे ज्यादा पंचायती राज विभाग से जुड़ी योजनाओं की करीब 1253 करोड की राशि अटकी हुई है. 

यह है विभागों की अटकी राशि का योजनावार ब्योरा:
पंचायतीराज विभाग:
-वित्त आयोग को ग्रामीण स्थानीय निकायों को 937.62 करोड की राशि की मदद करनी है. 
-इसी विभाग के स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मल भारत अभियान में केन्द्रीय पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय की ओर से 262.50 करोड की राशि जारी नहीं हुई है. 
-वहीं विभाग के इंटीग्रेटेड वाटरशेड एंड मैनेजमेंट प्रोग्राम के लिए  केन्द्रीय पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय की ओर से जारी की जानेवाली 52.86 करोड की राशि की बाट जोह रहा है. 

स्कूल शिक्षा:
-विभाग के समग्र शिक्षा अभियान के लिए HRD मंत्रालय से 839.11 करोड की राशि मिलनी बाकी है. 
-मिडडे मील स्कीम के लिए  HRD मंत्रालय ने 220.55 करोड अभी जारी नहीं किए हैं. 

चिकित्सा शिक्षा:
-चिकित्सा,स्वास्थ्य में मानव संसाधन के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय को 314.12 करोड की राशि जारी करनी है. 

पीडब्ल्यूडी:
-प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को 210 करोड जारी करने हैं. 
-सेंट्रल रोड फंड के लिए केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 200 करोड जारी करने की प्रतीक्षा है. 

ग्रामीण विकास:
-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से 133.20 करोड की राशि जारी नहीं हुई है. 

सामाजिक न्याय:
-एससी के डेवलपमेंट प्लान के लिए केन्द्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय की ओर से देय 127.07 करोड अटके हुए हैं.
-राष्ट्रीय सामाजिक सहायता प्रोग्राम के लिए केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय 110.10 करोड की राशि देगा. 
-अनुसूचित वर्ग के लिए अंब्रेला स्कीम के तहत केन्द्रीय सामाजिक न्याय/टीएडी की ओर से 69.94 करोड की राशि का इंतजार है. 

राहत व आपदा प्रबंधन विभाग:
-स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड में मदद के लिए केन्द्रीय वित्त आयोग राज्य को 77.80 करोड की राशि देगा. 

एलएसजी:
-स्मार्ट सिटी स्कीम के लिए केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से 73.50 करोड देने प्रस्तावित हैं. 
-इसी तरह शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए केन्द्रीय आवास व शहरी मामलात मंत्रालय राज्य को 50 करोड की राशि देगा. 

विधि विभाग:
-ज्यूडिशरी के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को राजस्थान को 70.75 करोड देने हैं. 

कृषि विभाग:
-नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशन के लिए केन्द्रीय कृषि व किसान मंत्रालय को 59.29 करोड जारी करने हैं. 
-नेशनल सस्टेनेबल एग्रीकल्चर मिशन के लिए इसी केन्द्रीय मंत्रालय को 53.81 करोड जारी करने हैं. 
-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए इसी केन्द्रीय मंत्रालय को 51.63 करोड जारी करने हैं. 
-इस तरह सभी दस विभागों की कुल 3913.84 करोड की राशि बकाया है. 

पिछले वित्तीय वर्ष की बकाया राशि का ब्योरा:
ग्रामीण विकास विभाग की पीएम हाउसिंग स्कीम ग्रामीण के लिए केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को 2143 करोड की राशि जारी करनी है.महिला बाल विकास विभाग की इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेस के लिए केन्द्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय को 198.56 करोड की राशि जारी करनी है. स्कूल शिक्षा विभाग की मिड डे मील स्कीम के लिए HRD मंत्रालय को 151.16 करोड जारी करने हैं. सामाजिक न्याय विभाग के नेशनल सोश्यल असिस्टेंट प्रोग्राम के तहत केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को 271 करोड की राशि जारी करनी है. कुल मिलाकर 2021-22 वित्तीय वर्ष के लिए  2763.72 करोड की राशि बकाया है. सही समय पर राशि नहीं मिलने से योजनाएं सही समय पर पूरी नहीं होतीं और उनकी लागत बढ़ती जाती है. इसका असर राज्य के सारे विकास पर पड़ता है. 

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