VIDEO: प्रशासन शहरों के संग अभियान में होंगे नए काम, बरसों से तकनीकी पेच में उलझे मामलों में पट्टा देने की कवायद

VIDEO: प्रशासन शहरों के संग अभियान में होंगे नए काम, बरसों से तकनीकी पेच में उलझे मामलों में पट्टा देने की कवायद

जयपुर: इस बार प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार की ओर से शुरू किए जाने वाले प्रशासन शहरों के संग अभियान में कई नए काम भी हाथ में लिए जाएंगे ताकि अब तक जिन लोगों को पिछले अभियानों का फायदा नहीं मिला, वे भी लाभान्वित हो सकें. पिछली अशोक गहलोत सरकार में चलाए प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत तीन लाख पट्टे बांटे गए थे, लेकिन इस बार नियमन का दायरा बढ़ाया जाएगा और इसे बढ़ाते हुए सरकार का लक्ष्य है कि इस अभियान में 10 लाख पट्टे बांटे जाएं. यह पट्टे प्रदेश के सभी 14 नगर सुधार न्यास तीन विकास प्राधिकरण 10 नगर निगम और 196 नगर परिषद एवं नगर पालिकाओं में बांटे जाएंगे. आपको बताते हैं कि सरकार ने इन 10 लाख पट्टों का लक्ष्य किस प्रकार निर्धारित किया है.

जानिए, किस प्रकार किया पट्टों का लक्ष्य निर्धारित:
- वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में आवासों की कुल संख्या 47 लाख 74 हजार 309 हैं.
-मौजूदा समय में इन आवासों की संख्या करीब 55 लाख है.
- सरकार का मानना है कि इनमें से करीब 10 लाख आवास ऐसी भूमि पर बने हुए हैं जिनका पट्टा अभी तक जारी नहीं किया गया है.
- इनमें से कृषि भूमि पर विकसित कॉलोनियों के करीब 2 लाख पट्टे हैं.
-पुरानी आबादी क्षेत्र और स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत करीब 7 लाख पट्टे दिए जा सकते हैं.
-इसी प्रकार कच्ची बस्ती क्षेत्र में 50 हजार और अन्य मामलों में 50 हजार पट्टे जारी किए जा सकते हैं.

2 अक्टूबर से शुरू होगा प्रशासन शहरों के संग अभियान:
प्रशासन शहरों के संग अभियान इस वर्ष 2 अक्टूबर से शुरू होगा जो कि 31 मार्च 2022 तक चलेगा. इसके बाद मंत्री शांति धारीवाल के स्तर पर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकेगी. इस बार के अभियान में बांटे जाने वाले पट्टों की संख्या का लक्ष्य पिछले अभियान की तुलना में 3 गुना से अधिक बढ़ाया गया है. इसके पीछे सरकार की सोच है कि तकनीकी पेच में बरसों से उलझे मामलों में कैबिनेट स्तर पर निर्णय लेकर उनमें पट्टा देने की राह आसान की जाए. आपको बताते हैं कि इस बार के अभियान में भूखंड के नियमन या पट्टा देने के लिए ऐसे कौन से नए मामले शामिल किए जा सकते हैं.

ऐसे कौन से नए मामले किए जा सकते हैं शामिल:
- ऐसे मामलों में नियमन किया जा सकता है जिनमें भू राजस्व अधिनियम की धारा 91 के तहत स्वप्रेरणा से कार्यवाही की जा सकती है.
- इनमें शहरों की पुरानी बसावट वाले इलाकों का नियमन शामिल है.
-मंदिर माफी की भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन के लिए नियमन शुल्क से प्राप्त राशि में से देवस्थान विभाग को मुआवजा देकर नियमन का फैसला किया जा सकता है.
- इसके अलावा शहरी निकायों की ओर से लघु अवधि के लिए किराए पर दी गई संपत्तियों का किरायेदारों के पक्ष में ही 99 वर्ष का पट्टा जारी किया जा सकता है.
-शहरी क्षेत्र में शामिल हुए ग्रामीण क्षेत्रों के पूर्व में जारी पट्टों को निकायों को समर्पित कराकर निकायों से उन भूखंडों के लिए निशुल्क पट्टा जारी किया जा सकता है.
-एक लाख से कम आबादी वाले ऐसे शहर जिनमें जोनल डेवलपमेंट प्लान बनाने की अनिवार्यता नहीं है, उनमें कॉलोनियों का नियमन किया जा सकता है.
- इससे अधिक आबादी वाले बड़े शहरों में जोनल डेवलपमेंट प्लान के अनुसार पट्टे दिए जा सकते हैं.

निकायों को 5000 करोड़ आय की भी उम्मीद:
नियमन में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से अभियान के तहत बनाए एक्शन प्लान के मुताबिक इस वर्ष जुलाई तक कैबिनेट को इन मामलों में नीतिगत निर्णय के लिए प्रस्ताव भिजवा दिए जाएंगे. इस बार के अभियान में शहरों का ड्रोन सर्वे कराने, आईटी एप्लीकेशन तैयार करने व अन्य कार्यों में सरकार की ओर से करीब 100 करोड रुपए खर्च किए जाने का अनुमान है. वही इस अभियान में 10 लाख पट्टे बांटने से निकायों को 5000 करोड़ आय की भी उम्मीद है.

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