गहलोत सरकार ने दिया 850 से ज्यादा नव चयनितों को नियुक्ति का तोहफा

Dr. Rituraj Sharma Published Date 2019/07/01 02:57

जयपुर: गहलोत सरकार ने राजस्थान सिविल सेवा,स्टेट सेवा,अधीनस्थ सेवा मिलाकर 850 से ज्यादा नव चयनितों को नियुक्ति देकर बड़ा तोहफा दिया है. ये नव चयनित काफी समय से प्रक्रिया जल्दी करके नियुक्ति की मांग कर रहे थे और अब इस नियुक्ति से इन्हें बड़ी राहत मिली है. 

गहलोत सरकार ने 92 आरएएस सहित अलग अलग सेवाओं में 856 नव चयनितों को नियुक्ति दी है. इन सभी का परिवीक्षा काल 2 वर्ष रहेगा. 

- 92  ras,70 आरपीएस को नियुक्ति

- 352 राज्य सेवा के अधिकारियों को मिली नियुक्ति

- 408 अधीनस्थ सेवा अफसरों को मिली नियुक्ति जिसमें 220 आरटीएस यानि तहसीलदार सेवा के अधिकारी शामिल हैं.

 - 4 बीमा प्रावधायी निधि सेवा अफसरों को नियुक्ति

- 145 लेखा सेवा अफसरों को मिली नियुक्ति जिसके आदेश वित्त विभाग ने जारी कर दिए.

- नियुक्ति के साथ सरकार ने ras  के लिए ये दिशानिर्देश भी जारी कर दिए हैं

- सुप्रीम कोर्ट व अन्य कोर्ट में चल रहे मामलों के निर्णयों के अध्याधीन रहेगी नियुक्तियां

- सारे मूल दस्तावेजों की जांच के रहेंगी नियुक्तियां अधीन

- परीक्षा के आवेदन पत्र में जो जन्मतिथि है वही रहेगी

- RAS सेवा नियमों के नियम 30 अनुसार की गईं हैं 

- परिवीक्षा काल में उत्तीर्ण करनी होगी विभागीय परीक्षा

- परिवीक्षा में कार्य सन्तोषप्रद न हो या यह पाया जाए कि RAS अधिकारी की क्षमता नहीं तो सरकार कर सकेगी उन्हें सेवा से मुक्त.

- प्रोबेशन में इस्तीफा देने पर देनी होगी प्राप्त परिलब्धियों की दुगुना राशि

- सेवा ग्रहण करने से पूर्व  देना होगा बंधक पत्र

- 3 जुलाई को ओटीएस में प्रमाण पत्र के साथ आना होगा

- प्रतिकूल चरित्र सत्यापन रिपोर्ट मिली तो नियुक्ति निरस्त

- अभ्यर्थी का नियुक्ति दावा मान्य नहीं होगा

- विवाहित अभ्यर्थियों को विवाह पंजीयन सर्टिफिकेट देना होगा. 

- नियुक्ति पूर्व आपराधिक मामले न होने की करनी होगी स्व घोषणा

- 7 दिन तक रिपोर्ट न करने पर नियुक्ति आदेश स्वतः ही होंगे निरस्त

- 3 से ज्यादा सन्तान वाले नियुक्ति के पात्र नहीं, लेकिन पहले प्रसव से 1 ही सन्तान है और बाद के प्रसव से 1 से ज्यादा तो ऐसी सन्तान मानी जायेगी 1 ही इकाई. 

इन नियुक्तियों के लिए कार्मिक विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने पूरी रात काम किया. इसी कारण नया सप्ताह शुरू होने से पूर्व आदेश जारी करने थे.  
 

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