जयपुर एक बार फिर सियासी भंवर में फंसी कांग्रेस के लिए संकटमोचक बने गहलोत, तारणहार की भूमिका में दे रहे दिखाई

एक बार फिर सियासी भंवर में फंसी कांग्रेस के लिए संकटमोचक बने गहलोत, तारणहार की भूमिका में दे रहे दिखाई

एक बार फिर सियासी भंवर में फंसी कांग्रेस के लिए संकटमोचक बने गहलोत, तारणहार की भूमिका में दे रहे दिखाई

जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर सियासी भंवर में फंसी कांग्रेस के लिए संकटमोचक बन कर सामने आए है. पहले महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार बनवाने का मामला हो या फिर अब मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार बचाने का मौका. कांग्रेस के लिए हर बार उम्मीद की किरण राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत में ही नजर आती है. 

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आलाकमान ने अशोक गहलोत पर भरोसा जताया: 
देश की सबसे पुरानी सियासी पार्टी कांग्रेस इन दिनों संकटकाल से गुजर रही है. कभी किसी प्रदेश में तो कभी किसी मे परेशानी खड़ी हो जाती है. अब ताजा सियासी संकट गहराया है मध्यप्रदेश में. मध्य प्रदेश कांग्रेस सरकार पर संकट के बाद छा रहे है, ऐसे में आलाकमान ने एक बार फिर राजनीति के जादूगर अशोक गहलोत पर भरोसा जताया है. कारण साफ है, संकट मोचक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत में अपनी कुशल रणनीति के जरिए ना केवल पार्टी को संकट के भंवर से निकाला, बल्कि आगे की राह को भी आसान बनाया है. 

गहलोत फिर तारणहार की भूमिका में दिखाई दे रहे: 
करीब पांच महीने पहले जब महाराष्ट्र में चुनाव हुए थे तब किसने सोचा था कि गुलाबी नगरी महाराष्ट्र कांग्रेस की सियासत का सेंटर बन जाएगा. महाराष्ट्र में कांग्रेस की भूमिका की पूरी पटकथा जयपुर में गहलोत और उनके विश्वस्त साथियों के सहयोग से लिखी गई थी. आंकड़ों में कमजोर महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायक जब उम्मीदें छोड़ रहे थे तब गहलोत ने केवल उनका मनोबल बढ़ाया गया था, बल्कि पार्टी को सत्ता में भागीदार भी बनवाया. अब मध्यप्रदेश में कांग्रेस संकट में है और गहलोत फिर तारणहार की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं. सियासत की वहीं कहानी जयपुर में दोहराई जा रही है. अंतर इतना है कि तब सरकार बनाने की जुगत थी, अब सरकार बचाने का संघर्ष है. 

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कमलनाथ सरकार गिरने की नौबत: 
दरअसल कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ भाजपा जॉइन करने और कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफा देने से कमलनाथ सरकार गिरने की नौबत आ गयी है. खुद कांग्रेसियों को लगने लगा कि अब नाव डूबने वाली है और सभी ने उम्मीद छोड़ दी तब पार्टी को फिर से सूबे के मुखिया अशोक गहलोत की याद पार्टी को आई है. 

गहलोत के विश्वस्त लोगों की टीम सक्रिय:
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के आग्रह पर पार्टी आलाकमान ने अशोक गहलोत को पूरे मसले की कमान संभालने के लिए कहा तो जयपुर में उनकी टीम एक बार फिर से सक्रिय हो गई है. मध्य प्रदेश के करीब 90 विधायकों को जयपुर के दो अलग-अलग रिसोर्ट में ठहराया गया है. गहलोत के विश्वस्त लोगों में शामिल मुख्य सचेतक महेश जोशी, उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी, विधायक रफीक खान, अमीन कागजी, मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास व धर्मेंद्र राठौड़ सहित दर्जन नेताओं की टीम सक्रिय हो गयी. रातों रात विधायकों को ठहराने व सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था की गई. 

हॉर्स ट्रेडिंग का लगाया आरोप:
आलाकमान द्वारा दी गयी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए CM गहलोत खुद एयरपोर्ट गए और विधायकों की अगुवानी की. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया की हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है. इसलिए विधायको को यहां लाना पड़ा. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक और हरीश रावत भी जयपुर पहुंच गए है और मुख्यमंत्री ने विधायकों के साथ रिसोर्ट पहुंचकर वासनिक व रावत के साथ बैठक आगे की रणनीति तैयार की. सीएम ने दोनों रिजॉर्ट में विधायकों के साथ संवाद किया है. सीएम ने ना केवल उनसे फीडबैक लिया बल्कि पार्टी आलाकमान का संदेश भी उन तक पहुंचाया है. मुख्यमंत्री गहलोत की कोशिश है कि बेंगलुरु में बगावत के बाद जो विधायक ठहरे हुए हैं उन्हें फिर से वापस लाया जाए साथ ही मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के सहयोग से निर्दलीय विधायकों को भी पार्टी के साथ जोड़कर सियासी संकट की स्थिति से उभारा जा सके.

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गहलोत के किले में सेंधमारी संभव नहीं:
सवा साल पहले जब विधानसभा चुनाव हुए थे तब राजस्थान और मध्यप्रदेश में कांग्रेस के पास नाम मात्र का बहुमत था. एमपी में स्थिति सुधरी नही, लेकिन राजस्थान में राजनीति के जादूगर ने बसपा और निर्दलीय विधायकों को साथ जोड़कर कांग्रेस के कुनबे को मजबूत कर लिया. बसपा के 6 विधायक तो गहलोत के नाम पर कांग्रेस में ही शामिल हो गए. गहलोत का किला इतना मजबूत हो चुका है कि यहां किसी तरह की कोई सेंधमारी संभव नहीं हो सकती. 

गहलोत के चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलक रहा:
फिलहाल गहलोत के अनुभव और कुशल रणनीति की जरूरत मध्यप्रदेश कांग्रेस को है. गहलोत के चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलक रहा है. गहलोत का दावा है कि मध्यप्रदेश में भाजपा अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाएगी. अब देखना यह है कि गहलोत की जादूगरी से किस तरह मध्यप्रदेश में कांग्रेस का संकट टलेगा. 

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