गहलोत सरकार के लिए 'सेहत' का महकमा सबसे बड़ी चुनौती 

Vikas Sharma Published Date 2018/12/18 09:39

जयपुर (विकास शर्मा)। राजस्थान में कांग्रेस की नई सरकार के लिए "सेहत" का महकमा बड़ी चुनौती लेकर आएगा। हालांकि, अभी सूबे के चिकित्सा मंत्री की घोषणा होना शेष है, लेकिन राजस्थान में चल रही गहलोत सरकार की पुरानी योजनाएं और भाजपा सरकार की योजनाओं के बीच तालमेल बैठाकर नए सीरे से काम करना बड़ा टॉस्क माना जा रहा है। इसके साथ ही पूर्ववर्ती सरकार की अधूरी योजनाओं को पूरा करना भी बड़ी जिम्मेदारी रहेगी। आखिर क्या है सूबे के चिकित्सा विभाग की मौजूदा तस्वीर और नई सरकार के लिए क्या-क्या रहेंगी चुनौतियां। खास रिपोर्ट-

राजस्थान के सेहत महकमे की हालात किसी से छिपी नहीं है। फिर चाहे मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों की तस्वीर हो या दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सेवाओं की। हालांकि, पूर्ववर्ती सरकार ने गहलोत सरकार की नि:शुल्क दवा-जांच योजना को चालू रखा, लेकिन दवाओं के विस्तार की अभी तक जरूरत बरकरार है। ऐसे में गहलोत के फिर से सीएम बनने से यह तय माना जा रहा है कि नि:शुल्क दवा-जांच योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा। फिलहाल इस योजना के दायरे में 600 के आसपास दवाएं है, लेकिन जानकारों की माने तो अभी भी काफी दवाओं की दरकार है। इसके साथ ही भामाशाह बीमा योजना के सुचारू संचालन, दवा योजना में दवाओं की अनुपलब्धता की समस्या को दूर करना, मेन पॉवर बढ़ाना, चिकित्सक-फार्मासिस्टों की संख्या बढ़ाना भी बड़ी टॉस्क रहेगा। 

निशुल्क दवा व जांच योजना

वर्ष 2009 में गहलोत सरकार ने योजना शुरू की। लाखों लोगों को फायदा मिलने के बावजूद पिछले पांच सालों में इस योजना के दायरे को बजट में ही बढ़ाया गया। फील्ड की बात की जाए तो गहलोत सरकार में 600 के आसपास दवाएं योजना में रखी गई थी, वो भी अभी तक जारी है। इसके साथ ही दवाओं की आपूर्ति में भी कमी के चलते आज भी काफी मरीजों को पर्ची पर अनुपलब्धता की मुहर की पीड़ा झेलनी पड़ रही है। ऐसे में चुनौती यह रहेगी कि न सिर्फ निशुल्क दवा योजना में सभी दवाएं लोगों को मिले, बल्कि इन दवाओं का दायरा भी बढ़ाया जाए। 

BSBY योजना

योजना में किसी भी अस्पताल में तीन लाख रुपए तक का निशुल्क इलाज भामाशाह कार्ड धारकों को मिल रहा है। लेकिन योजना के क्रियान्वयन में खामी और बीमा कम्पनी के रवैये के चलते लोगों को आज भी इसका फायदा उठाने में दिक्कतें आ रही है। ऐसे में कांग्रेस की नई सरकार के सामने यह चुनौतीभरा फैसला रहेगा कि BSBY को यथावत रखते हुए निशुल्क दवा योजना को कैसे प्रोत्साहित किया जाए। 

आरयूएचएस हॉस्पिटल

आरयूएचएस से सम्बद्ध 500 बेड का आरयूएचएस हॉस्पिटल लगभग बनकर तैयार है....नई सरकार के मंत्रिमंडल के गठन के साथ ही इसका उदघाटन होगा और मरीजों को लाभ मिलना शरू होगा। 

स्टेट कैंसर इंस्टीटयूट

प्रताप नगर में 500 करोड़ के लागत से 500 बेड का कैंसर इंस्टीटयूट निर्माणाधीन है। पहले चरण में 131 करोड़ की लागत से ओपीडी, ट्रीटमेंट सेन्टर सर्जिकल ऑकोलोजी सेन्टर, 100 बैड का इंडोर बनना है। बिल्डिंग का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन अभी भी मशीनरी और स्टॉफ की नियुक्ति की जरूरत है। 

इन प्रोजेक्टस के अलावा ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेन्टर की जल्द शुरूआत भी बढ़ी चुनौती माना जा रहा है। केन्द्र अनुदानित इस प्रोजेक्ट का काम शुरू तो हो चुका है, लेकिन अभी तक इसे बनने में एक साल से अधिक समय लगेगा। इन सभी कामों के लिए बजट की उपलब्धता भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। अगर समय पर बजट नहीं मिला, तो ये सभी प्रोजेक्ट लेटलतीफी की भेंट चढ़ सकते है। ऐसे में उम्मीद यही की जा रही है कि सरकार आमजन से सीधे जुड़े सेहत के महकमे पर विशेष फोसक रखेगी, ताकि लोगों को अधिक से अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा सके। 
 

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in