VIDEO: किसानों के लिए गहलोत सरकार समर्पित, 3 सालों से लगातार उनके हित में काम, देखिए ये खास रिपोर्ट

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जयपुर: धरती पुत्र किसान जन-जन का पेट भरने के लिए दिन रात मेहनत कर फसल उपजाता है. प्रकृति कई बार चाहे अतिवृष्टि हो या अनावृष्टि के द्वारा किसान की परीक्षा लेती है, लेकिन वह जीवटता के साथ अपने कार्य में लगा रहता है. कठिन एवं विपरीत परिस्थतियों में किसान की मेहनत के साथ यदि उसका संबल बढ़ाया जाता है तो वह दुगुने उत्साह के साथ अपने कार्य को अंजाम देता है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत किसानों के सशक्तीकरण के लिए सहकारिता को कृषि साख, वित्तीय समावेशन, कृषि आदान, सामाजिक सुरक्षा, जवाबदेही एवं पारदर्शिता, भंडारण क्षमता में वृद्धि, सहकारी समितियों को स्वावलम्बी बनाने जैसे सात मुख्य आधार स्तम्भों से जोड़कर कार्य कर रहे है.

किसान के संबल एवं उसकी राह को आसान करने का कार्य मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार लगातार तीन वर्षों से कर रही है. सरकार लोक कल्याण की नीति को सहकारिता के द्वारा लक्ष्य बनाकर पूरा करने का प्रयास कर रही है. राज्य सरकार ने तीन वर्ष की अवधि के दौरान किसानों के समावेशी विकास की दिशा में कई योजनाएं प्रारंभ की है. इसमें राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना-2019, सहकारी फसली ऋण ऑनलाइन पंजीयन एवं वितरण योजना-2019, पन्द्रह लाख नए सदस्य किसानों को सहकारी फसली ऋण से जोड़ना, राज सहकार पोर्टल से पारदर्शिता को बढ़ावा देना, एकीकृत किसान सेवा पोर्टल की शुरूआत, ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर ई-मित्र केन्द्रों की शुरूआत, यूरिया एवं डीएपी का बफर स्टॉक, बायोमैट्रिक प्रणाली से समर्थन मूल्य पर ऑनलाइन खरीद, ऑनलाइन वेयरहाउस ई-रिसिप्ट सेवा, नई ग्राम सेवा सहकारी समितियों का गठन, कस्टम हायरिंग सेन्टरों की स्थापना, ब्याज दर को कम करना, सहकारी समितियों में गोदाम निर्माण, पैक्स एवं लेम्पस को मल्टी सर्विस सेन्टर बनाना जैसी योजनाएं एवं निर्णय लागू कर अधिक से अधिक किसानों को सहकारिता के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है. 

वर्तमान सरकार के कार्यकाल का दूसरा एवं तीसरा वर्ष अधिकांशतः कोविड-19 के संकट से गुजरा है.इस संकट के दौरान मुख्यमंत्री गहलोत के नेतृत्व वाली इस सरकार ने सहकारी समितियों के कार्यों में बदलाव की पहल कर किसानों एवं आमजन को राहत देने का विशेष कार्य किया है. संकट की इस घड़ी में सहकारी अल्पकालीन फसली ऋण चुकाने की अवधि को बढ़ाना, समर्थन मूल्य पर खरीद केन्द्रों में बढ़ोतरी, किसानों से सीधी खरीद के लिए ग्राम सेवा सहकारी समितियों एवं क्रय विक्रय सहकारी समितियों को निजी गौण मंडियों का दर्जा देना, सहकारी अल्पकालीन फसली ऋण वितरण में वृद्धि करना, खाद एवं बीज का अग्रिम भंडारण, दीर्घकालीन कृषि ऋण की पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान योजना की अवधि बढ़ाना, 3 प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि उपज रहन ऋण, अवधिपार ऋणी किसानों के लिए एकमुश्त समझौता योजना सहित अन्य निर्णय लेकर धरती पुत्र का हौसला बढ़ाया है. 


 

मुख्यमंत्री के पद की 17 दिसम्बर, 2018 को शपथ लेने के 48 घंटो के भीतर ही अशोक गहलोत ने किसानों की ऋण माफी पर निर्णय लेते हुए राजस्थान के किसानों को फसली ऋण माफी की सौगात दी. योजना के तहत सहकारी बैंकों से जुड़े अल्पकालीन फसली ऋण लेने वाले किसानों के 30 नवम्बर, 2018 की स्थिति में समस्त बकाया फसली ऋण को माफ किया गया. अब तक 20.69 लाख किसानों को बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद ऋण माफी प्रमाण-पत्र वितरित कर 7802.21 करोड़ रूपए का फसली ऋण माफ किया गया. किसानों के चेहरों पर मुस्कान लाते हुए फसली ऋण माफी 2018 एवं 2019 के पात्र किसानों के ऋण माफी के तहत लगभग 15500 करोड़ रुपए माफ किए गए. राजस्थान कृषक ऋण माफी योजना-2019 में फसली ऋण के साथ-साथ (केन्द्रीय सहकारी बैंक एवं भूमि विकास बैंक) सहकारी बैंकों के मध्यकालीन एवं दीर्घकालीन कृषि ऋण सीमान्त एवं लघु श्रेणी के किसानों के माफ किए गए. इसमें 30 नवम्बर, 2018 की स्थिति में अवधिपार खातों के 2 लाख रूपए के बकाया ऋणों को माफ कर किसानों को राहत दी गई. 

इस योजना से अब तक 29421 किसानों को 294.71 करोड़ रूपए का ऋण माफ किया गया है. इन किसानों की 1.55 लाख बीघा कृषि भूमि पुनः उनके नामे हो चुकी है. गहलोत की सोच के कारण राजस्थान ने देश में पहली बार सहकारिता के क्षेत्र में सहकारी फसली ऋण ऑनलाइन पंजीयन एवं वितरण योजना, 2019 की शुरूआत कर किसानों के हित में कदम उठाया गया. इस योजना से फसली ऋण वितरण में किसान से भेद-भाव को समाप्त किया गया है. इसमें बायोमैट्रिक सत्यापन (आधार आधारित) से वास्तविक किसान को लाभ मिला है. इस नई शुरूआत से खरीफ एवं रबी फसली ऋण से 30.24 लाख से अधिक किसानों को फसली ऋण से जोड़ा जा चुका है. 15.18 लाख नए सदस्य किसानों को फसली ऋण से जोड़कर 3020.33 करोड़ रूपए का फसली ऋण देकर पहली बार लाभान्वित गया है. राज्य सरकार के उत्तरदायित्व एवं पारदर्शी व्यवस्था के तहत राज सहकार पोर्टल बनाया गया है. यह एक एकीकृत प्लेटफार्म है इस प्लेटफार्म के द्वारा सहकारिता विभाग के अधिकारी, सहकारी संस्थाएं एवं आम नागरिक विभाग की विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं यथा अल्पकालीन फसली ऋण आवेदन, न्यूनतम समर्थन मूल्य के आवेदन, न्यूनतम समर्थन मूल्य के भुगतान, नई सहकारी संस्थाओं के पंजीयन, क्लबों/एन.जी.ओ./नागरिक संस्थाओं का पंजीयन के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की खेल समितियों के पंजीयन एवं इससे संबंधित समस्त कार्य को  ऑनलाइन करने की शुरूआत की गई है. 

ग्राम सेवा सहकारी समितियों से लेकर क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में खरीद केन्द्रों की स्थापना कर प्रदेश में मूंग, उड़द, सोयबीन, मूंगफली, गेहूं, सरसों एवं चना के समर्थन मूल्य पर 29.52 लाख मीट्रिक टन की उपज खरीदी गई. जिसका मूल्य 12 हजार 805 करोड़ रूपए है. रिकार्ड खरीददारी कर लाखों किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया गया. ग्रामीण क्षेत्र में किसानों को उनकी मांग के अनुसार कृषि आदान यथा-खाद, बीज, कीटनाशक आदि उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण क्षेत्र में किसानों की उपज के भण्डारण के लिये गोदामों का होना आवश्यक है. प्रदेश में सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों सहित क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में गोदामों के निर्माण को सुनिश्चित किया जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में भंडारण सुविधा में वृद्धि करने के लिए रिकार्ड 740 (700 जीएसएस व 40 केवीएसएस) गोदाम निर्माण की स्वीकृति जारी कर दी गई है. इससे राज्य की भंडारण क्षमता में 82500 मीट्रिक टन की वृद्धि होगी. 

राज्य सरकार की ओर से ई-मित्र केन्द्रों द्वारा प्रदान की जा रही 400 से अधिक सेवायें उपलब्ध हो सके, इसके लिये महात्मा गांधी के 150वें जयन्ती वर्ष 2 अक्टूबर, 2019 से अभियान चलाकर सभी 6500 ग्राम सेवा सहकारी समितियों को ई-मित्र केन्द्रों की सुविधा से जोड़ने की शुरूआत की गई है. प्रदेश के किसानों को ऋण का चुकारा करने में हो रही परेषानियों के मद्देनजर राहत देने के लिए प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैकों के अवधिपार ऋणी किसानों के लिए एक मुश्त समझौता योजना लागू की है. योजना के तहत ऋण का चुकारा करने पर बैंकों द्वारा 50 प्रतिषत ब्याज माफ किया गया है. योजना में ऋणी किसानों का दण्डनीय ब्याज एवं वसूली खर्च की राषि को 100 प्रतिशत माफ किया गया है. ऐसे अवधिपार ऋणी किसान जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके परिवार को किसान की मृत्यु तिथि से सम्पूर्ण बकाया ब्याज, दण्डनीय ब्याज एवं वसूली खर्च को पूर्णतया माफ किया गया है. 

किसानों को उसकी उपज का सही मूल्य मिल सके एवं मजबूरी में  उपज को नहीं बेचना पड़े और उन्हें साहूकारों/बिचैलियों के चंगुल में फसने से बचाया जा सके एवं किसान की तात्कालिक वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने के उद्देश्य से कृषि उपज रहन ऋण योजना के तहत किसानों को ऋण 11 प्रतिशत की ब्याज दर के स्थान 3 प्रतिशत ब्याज दर पर दिया जा रहा है. इस योजना में 840 से अधिक ग्राम सेवा सहकारी समितियों द्वारा लगभग 2 हजार किसानों को 3 प्रतिशत ब्याज दर पर 20.46 करोड़ रूपए का ऋण उपलब्ध कराया गया है.  किसानों ने 1 लाख 14 हजार क्विंटल से अधिक की फसल गोदामों में गिरवी रखी है जिसका मूल्य लगभग 32 करोड़ रूपए है. किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने तथा खरीद की प्रक्रिया को गति देने के लिए राज्य सरकार ने किसानों से सीधी खरीद करने के लिए 550 ग्राम सेवा सहकारी समितियों एवं क्रय विक्रय सहकारी समितियों को निजी गौण मण्डी के रूप में अधिसूचित किया है. जिससे किसानों को अपने खेत एवं गांव के नजदीक ही उपज बेचान की सुविधा के साथ-साथ कृषि उपज मंडियों के अनुरूप ही कृषि जिन्सों को खुली नीलामी में बेचकर प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य की सुविधा मिल रही है. इससे 31 हजार 877 किसानों को लाभ मिला है और उनकी 7 लाख 64 हजार 737 क्विंटल उपज (16 फसल) की खरीद हुई है. जिसकी राशि 200.45 करोड़ रूपए है.

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए प्रदेश के किसानों को राहत देते हुए खरीफ-2019 के फसली ऋण चुकारा अवधि को 31 मार्च, 2020 से बढ़ाकर 30 जून, 2020 एवं खरीफ-2020 के फसली ऋण चुकारा अवधि को 31 मार्च, 2021 से बढ़ाकर 30 जून, 2021 किया गया. इसी प्रकार रबी -2019 के फसली ऋण चुकारा अवधि को 30 जून, 2020 से बढ़ाकर 31 अगस्त, 2020 एवं रबी-2020 के फसली ऋण चुकारा अवधि को 30 जून, 2021 से बढ़ाकर 31 अगस्त, 2021 किया गया. इससे राज्य के लाखों किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज सुविधा का लाभ मिला. 

केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा ग्राम सेवा सहकारी समितियों के सदस्य काश्तकारों को अल्पकालीन फसली सहकारी ऋण वितरित किए जाते हैं. राज्य सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान किसानों को बड़ी राहत देते हुए सहकारी भूमि विकास बैंकों से दीर्घ कालीन कृषि ऋण लेने वाले काश्तकारों को 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान योजना की अवधि को 31 मार्च, 2020 से बढ़ाकर 30 जून, 2020 तथा 31 मार्च, 2021 से बढ़ाकर 30 जून, 2021 किया गया. समय पर ऋण का चुकारा करने वाले काश्तकारों को 5 प्रतिशत ब्याज दर से कृषि ऋण का लाभ मिल रहा है. दीर्घ कालीन कृषि ऋण 10 प्रतिशत की ब्याज दर पर देय है तथा समय पर ऋण चुकता करने वाले कृषकों को 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान देकर उन्हें राहत प्रदान की गई है.

बहुउद्देश्य सेवा केन्द्रों के रूप में 461 ग्राम सेवा सहकारी समितियों को चिन्ह्ति किया जा चुका है. जिनमें से नाबार्ड को 324 पैक्स/लैम्पस के प्रस्ताव भेजे गये है. नाबार्ड द्वारा 51.03 करोड़ रुपए के 280 प्रस्ताव स्वीकृत किये जा चुके है. एग्री इन्फ्रा फंड योजना के तहत केन्द्रीय सहकारी बैंकों के द्वारा विभिन्न जीएसएस में 115 प्रोजेक्ट में से 92 प्रोजेक्ट के लिए 11.43 करोड़ रुपए का ऋण वितरण किया जा चुका है. इन समितियों के माध्यम से किसानो एवं आमजन को एक ही छत के नीचे उनको आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएगी. सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से पैक्स एवं लैम्पस के स्वावलंबन की दिशा में कदम बढाते हुए पहली बार ग्राम सेवा सहकारी समितियों को सौर ऊर्जा संयंत्रों से जोड़ने की शुरूआत की गई. इसके लिए 500 पैक्स एवं लैम्पस को चयनित किया गया. 

इन पैक्स एवं लैम्पस में 0.50 किलोवाट से 2 किलोवाट के संयंत्र स्थापित करने की शुरूआत की गई और सभी 500 पैक्स एवं लैम्पस में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके है. सरकार की इस पहल से पैक्स एवं लैम्पस की आय में बचत से व्यवसाय विविधिकरण के लिए सबंल मिला है तथा सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना से समिति द्वारा प्रदत्त सेवायें भी आसान हुई है. राज्य सरकार ने सहकारिता के माध्यम से लगातार निर्णय लेकर अन्नदाता का भरपूर साथ दिया है. जिसका प्रदेश के लाखों किसानों को लाभ मिल रहा है. किसानों के प्रति संवेदनशील मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेत़त्‍व वाली सरकार ने कोविड-19 जैसी आपदा में भी दूरदर्शिता पूर्ण निर्णय लेकर किसानों को राहत पहुंचाई है.

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