गहलोत सरकार 3 अक्टूबर को लागू करने जा रही नई सिलिकोसिस पॉलिसी 

Dr. Rituraj Sharma Published Date 2019/09/22 02:28

जयपुर: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 150वीं जयंती के 1 दिन बाद यानी 3 अक्टूबर को गहलोत सरकार नई सिलिकोसिस पॉलिसी लागू करके करीब 22000 सिलिकोसिस पीड़ितों को बड़ी राहत दी जा रही है. कैबिनेट के आयोजन के बाद इसे लागू करने की तैयारियां की जा रही है. बीओसीडब्ल्यू सहित खनन श्रमिकों के कल्याण के लिए सिलिकोसिस नीति लागू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन जाएगा. 

सिलिकोसिस सूची का अनुमोदन:
सर्कुलेशन के जरिए सिलिकोसिस सूची का अनुमोदन कर दिया है. जानकार सूत्रों की माने तो इस नीति में सिलिकोसिस ग्रस्त को 5 लाख की सहायता राशि के अलावा 4 हजार रुपए प्रतिमाह की पेंशन सहित अन्य परिलाभों का प्रावधान किया है. यह सहायता मौजूदा परिलाभों से कई गुना ज्यादा होगी. इस पॉलिसी से प्रदेश के करीब 17 जिलों में पत्थर तोड़ने और घिसने का काम कर सर्टिफाई सिलिकोसिस रोगी लाभांवित होंगे. सिलिकोसिस रोगियों को 1 लाख के बजाय 3 लाख मिलेंगे. वहीं जो मृतक हैं, उसके आश्रित पत्नी को 3500 रुपए प्रतिमाह फैमिली पेंशन मिलेगी. पीडि़तों की सुनवाई और समस्या समाधान व शिकायत के लिए जिला स्तर पर लीगल सेल बनेगी. बजट, जांच व बोर्ड आदि को लेकर मुख्य सचिव हर तीन माह में रिव्यू करेंगे. इसमें सिलिकोसिस रोकथाम, पुनर्वास, नियंत्रण के उपाय आदि पर फोकस किया गया है. 

पॉलिसी का ध्येय पूर्ण रोकथाम:
इस पॉलिसी का ध्येय सिलिकोसिस नियंत्रण, पूर्ण रोकथाम, व्यवसायिक स्वास्थ्य, सहायता व पुनर्वास करना है. धूल जन्य बीमारियों के खतरों को कम करना तथा न्यूकोनियोसिस से होने वाली मौतों पर रोकथाम लगाना है. डस्ट वाले रोगों में न्यूमोकॉनियोसिस, कॉल वर्कर्स, न्यूमोनिया, एस्बेस्टोसिस, बेरिटोसिस, सिड्रोसिस, स्टेनोसिस आदि हैं. इस न्यूकोनियोसिस नीति में योग्यता के लिए राज्य का कोई भी मजदूर या व्यक्ति प्रमाणित न्यूकोनियोसिस हो. 

इन जिलों में सिलिकोसिस के रोगी:
17 जिलों करीब 10 लाख लोग खानों में काम करते हैं. भीलवाड़ा, करोली, सिरोही, अजमेर, जोधपुर, दौसा, धौलपुर, भरतपुर, उदयपुर, नागौर, बूंदी, चितौड़, राजसमंद, जयपुर, टोंक, कोटा ओर बीकानेर. ये वो 17 जिले हैं, जिनमेें माइंस के काम के चलते सिलिकोसिस मजदूर ज्यादा है. अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों के कारण श्रमिक सिलिकोसिस जैसी असाध्य बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं. 

क्या है सिलिकोसिस:
सिलिकोसिस रोग का कोई इलाज नहीं है. दरअसल पत्थर तोड़ते और घिसाई करते वक्त सिलिस नाम की धूल शरीर में घुस जाती है, जो निकल नहीं सकती।जिस भी मजदूर को ये रोग लगा तो उसकी मौत निश्चित है. राज्य में सिलिकोसिस पोर्टल के अनुसार न्यूकोनियोसिस बोर्ड से 22 हजार प्रमाणित रोगी हैं।-इसमें करौली जिले में औसतन 4208 जीवित एवं 576 मृतक रोगियों का आंकड़ा है. हरियाणा व मध्यप्रदेश भी पूर्व में सिलिकोसिस पॉलिसी जारी कर चुके हैं, मगर वह सिर्फ भवन संनिर्माण श्रमिकों के लिए है, जबकि राजस्थान की पॉलिसी बीओसीडब्ल्यू सहित खनन श्रमिकों के लिए भी है. जो देशभर में सबसे अलग और पहली है. 

बजट भाषण में सिलिकोसिस नीति बनाने का जिक्र:
इस पॉलिसी के क्रियान्वयन में राज्य के श्रम, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, सूचना प्रोद्यौगिकी, माइन्स आदि विभागों की भूमिका रहेगी. प्रमाणित रोगियों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है. 10 जुलाई को बजट भाषण में मुख्यमंत्री ने बिंदु संख्या 112 पर नई सिलिकोसिस नीति बनाने का जिक्र किया है. जिसमें श्रमिकों के स्वास्थ्य हितों एवं सुरक्षा को दृष्टिगत रखकर खान मालिकों को उचित प्रबंधन के लिए पाबंद करने की प्रतिबद्धता भी है. इसके लिए जरूरत पड़ने पर सरकार नया कानून भी ला सकती है. इसको लेकर मुख्य सचिव डी.बी.गुप्ता की अध्यक्षता में कई बार सचिवालय में अधिकारी और सामाजिक संगठनों बैठकों का दौर चला था. 

... संवाददाता ऋतुराज शर्मा की रिपोर्ट 
 

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