जयपुर गहलोत सरकार ने कमलेश प्रजापत एनकाउंटर केस CBI को सौंपने का किया फैसला, बाड़मेर में 22 अप्रैल की रात को हुआ था एनकाउंटर

गहलोत सरकार ने कमलेश प्रजापत एनकाउंटर केस CBI को सौंपने का किया फैसला, बाड़मेर में 22 अप्रैल की रात को हुआ था एनकाउंटर

जयपुर: गहलोत सरकार ने बाड़मेर के कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले (Kamlesh Prajapat encounter case) को CBI को सौंपने का फैसला किया है. कमलेश प्रजापत एनकाउंटर बाड़मेर में 22 अप्रैल की रात को हुआ था. एनकाउंटर का CCTV फुटेज आने के बाद हलचल शुरू हुई थी. कमलेश प्रजापत के घर से तादाद में हथियार मिले थे. इसके अलावा नकदी, मादक पदार्थ समेत 11 वाहन भी बरामद हुए थे. 

पुलिस ने कमलेश प्रजापत के घर से 59 लाख 69 हजार की नकदी, पांच पिस्टल, 9 मैगजीन, ढाई किलो अफीम का दूध, 13 मोबाइल, 4 डोंगल, 11 लग्जरी वाहन भी बरामद किए गए थे. नागाणा थाने के हिस्ट्रीशीटर प्रजापत पर पाली-बाड़मेर में 7 मामले दर्ज थे. 

पत्नी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका पेश की गई थी:
बता दें कि कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले को लेकर कमलेश की पत्नी की ओर से हाईकोर्ट (Jodhpur High Court) में याचिका पेश की गई थी. कमलेश की पत्नी जसोदा की ओर से पेश याचिका में इस एनकाउंटर को सुनियोजित हत्या बताते हुए पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आग्रह किया गया है. इसके साथ ही इस मामले में पांच करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग करते हुए यह रकम बाड़मेर पुलिस अधीक्षक और उप अधीक्षक सहित 24 अन्य पुलिसकर्मियों से वसूल कर उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की अपील की गई थी. राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विनीत माथुर की कोर्ट ने इस मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं. मामले की अगली सुनवाई अब 9 जुलाई को होना प्रस्तावित है. 

 

पुलिस जिसे मुठभेड़ करार दे रही है वह वास्तव में हुई ही नहीं: 
बाड़मेर में 23 अप्रैल 2021 को एक कमलेश प्रजापत को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था. अब उसके परिजनों तरफ से इस बारे में याचिका पेश की गई थी. अधिवक्ता धीरेन्द्र सिंह दासपा ने हाईकोर्ट में बताया कि यह बिलकुल साफ तौर पर हत्या का मामला है. पुलिस जिसे मुठभेड़ करार दे रही है वह वास्तव में हुई ही नहीं. गोली लगने के दौरान कमलेश के पास कोई हथियार भी बरामद नहीं हुआ. कमलेश को बहुत निकट से सीने में गोली मारी गई, जबकि पुलिस चाहती तो उसे पकड़ सकती थी. 

गोली चलाना दर्शाने के लिए कमलेश के वाहन के कांच पर लाठी मारी:
वहीं सीसीटीवी फुटेज में साफ है कि पुलिस ने गोली चलाना दर्शाने के लिए कमलेश के वाहन के कांच पर लाठी मारी. वहीं पुलिस ने अपने वाहन के बोनट पर भी लाठियां बरसाई ताकि संघर्ष दर्शाया जा सके. घटनाक्रम के वीडियो से स्पष्ट है कि यह मुठभेड़ नहीं बल्कि हत्या है. याचिका में मांग की गई है कि पुलिस की ओर से जब्त किए गए कमलेश के 14 मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स उपलब्ध कराई जाए. इससे खुलासा हो सकेगा कि उसकी किन लोगों से बातचीत हुई. इसके बाद घटनाक्रम बदल गया. वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विशेषज्ञों के माध्यम से नए सिरे से जांच कराई जाए. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.
 

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