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VIDEO: निकाय चुनाव में गहलोत सरकार की नीतियों ने दिलाई कांग्रेस को बीजेपी पर बढ़त

VIDEO: निकाय चुनाव में गहलोत सरकार की नीतियों ने दिलाई कांग्रेस को बीजेपी पर बढ़त

जयपुर: निकाय चुनावों के आंकड़ों की बाजीगरी सामने आ चुकी. इससे जाहिर होता है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की गुड गर्वनेंस को शहरी लोगों का विश्वास मिला है. लोकसभा चुनावों में जहां कांग्रेस 24 फीसदी मतों से बीजेपी से पीछे रही वहीं निकाय चुनावों कांग्रेस को करीब 4 फीसदी मतों की बढ़त मिली. परिणामों ने ये साबित कर दिया कि लोकसभा चुनाव में मोदी लहर थी तो वहीं निकाय चुनावों में राजस्थान में गहलोत लहर नजर आई. 

सियासत में मौजूदा निकाय चुनावों नई इबारत लिखी: 
राजस्थान की सियासत में मौजूदा निकाय चुनावों नई इबारत लिखी. कांग्रेस के लिये कम बैक की तरह ही रहे क्योंकि लोकसभा चुनाव में मोदी लहर ने सत्ताधारी कांग्रेस का राजस्थान में मिजाज़ बिगाड़ दिया था. कम समय में ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निकाय चुनावों में खुद की सियासी हैसियत को साबित कर दिया और शहरों में हाथ का असर दिखा दिया.

बीजेपी के लिये निकाय चुनाव की तस्वीर झकझोर करने वाली रही:
बीजेपी के लिये निकाय चुनाव की तस्वीर झकझोर करने वाली रही. एससी,एसटी और मुस्लिम तबका तो कांग्रेस के साथ ही रहा लेकिन बीजेपी का बेस वोट सवर्ण भी खिसक गया. बीजेपी के नये और युवा अध्यक्ष सतीश पूनिया के लिये हालात सोचनीय है. चुनावों के परिणामों के विश्लेषण की बात दिग्गज नेता कर रहे है. सतीश पूनिया के भावी स्टेप्स में संगठनात्मक कौशल निखारना बेहद अहम हो गया है.

फर्स्ट इंडिया ने आंकडों की भाषा के जरिये निकाय चुनावों की सियासत को सामने रखा है. जो यह जताते है कि कैसे अशोक गहलोत सरकार की नीतियों ने कांग्रेस को निकाय चुनावों में बीजेपी पर बढ़त दिलाने का काम किया. 

मौजूदा निकाय और पूर्व निकाय चुनावों से जुड़े आंकडे:

---तुलनात्मक दृष्टि में पार्षदों की संख्या: 

-2009 में कुल निकाय 46:
- कुल वार्ड 1612
- भाजपा को वोट मिले महज 36 प्रतिशत
- कांग्रेस को मिले 45 प्रतिशत मत
- अन्य को मिले 19 प्रतिशत मत मिले
- 2009 में 136 पार्षद ज्यादा थे कांग्रेस के

--2014 में 46 नगर निकाय चुनाव:
- परिसीमन के बाद 1696 वार्ड
- बीजेपी को 54 प्रतिशत मत मिले 
- वहीं कांग्रेस को केवल 26 फीसदी मत मिले
- अन्य को 18 प्रतिशत मत प्राप्त हुये
- सीधे तौर पर 485 पार्षद बीजेपी के अधिक थे

--2019 निकाय चुनाव तुलनात्मक आंकडे:
- परिसीमन के बाद 2105 वार्ड 
- 36 प्रतिशत वोट मिले थे भाजपा को
- 45 प्रतिशत मत मिले कांग्रेस को
- 9 फीसदी वोटों का SWING देखने को मिले

--चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 2009 में कांग्रेस के 136 पार्षद अधिक जीते थे
--वहीं मौजूदा निकाय चुनाव में 224 पार्षद कांग्रेस के ज्यादा जीते
--दोनों ही बार कांग्रेस की गहलोत सरकार काबिज

--मतदान प्रतिशत तुलनात्मक तथ्यों से: 
- 2009 में कांग्रेस को 37.73 फीसदी मत मिले
- जबकि भाजपा को मिले 34.83 प्रतिशत प्राप्त हुये 
- इनके बीच अंतर रहा 2.90 फीसदी वोटों का 
- मौजूदा निकाय चुनावों में गहलोत के प्रति स्थितियां और अनुकूल रही
- कांग्रेस का वोट प्रतिशत घटा 2019 में इसके बावजूद बीजेपी से 3.54 मत प्रतिशत अधिक ले गई 
- यूं कह सकते है कि कांग्रेस को 36.68 फीसदी और बीजेपी को 33.14 मत प्रतिशत मिले. 

---पार्टी आर मतदाताओं की संख्या में अंतर-- 
- 2009 में कांग्रेस को कुल मत 1316645 मत मिले
- जबकि 2019 में 872547 मत ही कांग्रेस को मिले
- लेकिन इसके बाद दोनों बार कांग्रेस को वोट अधिक मिले

----अब तुलना मौजूदा निकाय चुनावों की विधानसभा और लोकसभा चुनावों से---
- 2019 में कुल निकाय 49, कुल मतदान 2375775
- भाजपा को 33.14 प्रतिशत प्राप्त हुये
- कांग्रेस को वोट मिले 36.68 मत मिले 
- 3.54 प्रतिशत अंतर कांग्रेस का पक्ष में रहा
- जबकि 2018 में हुये विधानसभा चुनावों में महज 0.5 प्रतिशत ही कांग्रेस के अधिक थे
- अर्थ ये है कि 1लाख 77हजार 699 वोट अधिक मिले थे
- 2019 के लोकसभा चुनावों की स्थिति देखे तो मोदी लहर साफ दिखी और बीजेपी ने चौंकाते हुये 24फीसदी मतों की बढोत्तरी कांग्रेस के ऊपर बनाई.
- जबकि निकाय चुनाव आते आते बीजेपी करीब 84हजार वोटों से कांग्रेस से पीछे हो गई.
- कहा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव में देश में मोदी लहर थी तो निकाय चुनावों में गहलोत लहर नजर आई. 

यह तो थे तुलनात्मक वो आंकडे जो निकाय चुनावों की पुरानी तस्वीर को बयां करते थे और साथ ही तुलना करते थे लोकसभा और विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों की परफॉर्मेंस की. अब आपको बताते है जातिगत वर्गीकरण जिससे साबित हो गया कि दलित, एसटी और मुस्लिम मतों ने कांग्रेस के लिये विजय का रास्ता प्रशस्त किया. सवर्ण वर्ग का वोट भी पिछली बार के मुकाबले अधिक रहा जिसके पीछे कारण EWS से जुड़े राहत देते बदलाव भरे फैसले सीएम गहलोत के रहे.

---एससी वार्ड मत प्रतिशत--
- कुल वार्ड 308 में 
- कांग्रेस को 142 में जीत मिली
- भाजपा को 84 में विजय प्राप्त हुई

--एसटी वार्ड मत प्रतिशत--
- कुल वार्ड 71
- कांग्रेस जीती 35 वार्डो में
- भाजपा को जीत मिली 29 वार्डो में

--मुस्लिम वार्डो में 2014 में बीजेपी के 45 जीते थे, इस बार एकदम से कमी आई और महज जीते 25 पार्षद. जबकि कांग्रेस के पार्षदों की संख्या हु़ई दुगुनी.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट
 

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पुराने राजनेता बखूबी जानते है कि जब अशोक गहलोत ने पहली बार राजस्थान में सरकार बनाई थी, उस समय राज्य में भीषण अकाल पड़ा था. तब अशोक गहलोत ने ऐसे ही कदम उठाए थे. उस समय गहलोत के आह्वान पर कांग्रेस सेवादल की और से सूखा बनाम सेवादल अभियान चलाया था. साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष फॉलो अप कार्यक्रम भी चलाया गया था, सोनिया गांधी राजस्थान के कई क्षेत्रों में आयी थी और राहत कार्यों का जायज़ा लिया. तत्कालीन कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक बाबू लाल नागर ने अशोक गहलोत की अपील पर अभियान चलाया था. हालांकि इस बार हालात अलग है, यह अकाल नहीं महामारी है संक्रमण है जिससे बचना कांग्रेसी के लिए भी जरुरी है.

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कोरोना के खिलाफ जंग में सीएम की अपील के बाद प्रदेश कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है. संकल्प लिया है जनता के संवाद बनाए रखने का जिससे उनकी समस्याओं को दूर किया जा सके. सीएम अशोक गहलोत ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को कहा था कि वे भी अपना योगदान दे और ऐसे कठिन समय में अपनी भूमिका को निभाए,जनता को घर पर ही रहने के लिए प्रेरित करे.

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प्रदेश कांग्रेस ने निर्देश जारी किए हैं कि प्रदेश कार्यकारिणी, जिलाअध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्षों, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्रिय, जिला प्रमुख और प्रधान अपनी और से मुख्यमंत्री सहायता कोष में आर्थिक सहयोग दे और मदद को आगे आए.

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अपने जिले के लोगों की हरसंभव मदद करने की अपील:
जिलाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ अपने जिलों में लोगों की हर संभव मदद करें और जिला प्रशासन के अधिकारियों के संपर्क में रहकर कोरोना वायरस के लॉक डाउन के बाद सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं से लोगों को लाभान्वित करवाएं. साथ ही सोशल मीडिया पर संपर्क रहने के निर्देश भी दिए गए है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ये भी निर्देश जारी किया गया है कि तमाम जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता सोशल मीडिया पर लगातार संपर्क में रहें और सोशल डिस्टेंस के लिए लोगों को जागरुक करने का काम भी करें.
...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

किसी 'वायरस' के कारण पहली बार राजस्थान की विधानसभा अनिश्चितकाल के लिये स्थगित

किसी 'वायरस' के कारण पहली बार राजस्थान की विधानसभा अनिश्चितकाल के लिये स्थगित

जयपुर: किसी 'वायरस' के कारण पहली बार राजस्थान की विधानसभा को अनिश्चितकाल के लिये स्थगित किया गया. कोरोना के कारण विधानसभा की कार्यवाही स्थगित की गई. विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद स्पीकर डॉ सीपी जोशी ने 26मार्च से बुलाये गये सत्र को अनिश्चितकाल के लिये स्थगित करने के निर्देश जारी किये. विधानसभा के सचिव प्रमिल कुमार माथुर बैठक में मौजूद रहे.

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संपूर्ण विपक्ष और सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने मांग की थी: 
वैसे कोरोना संकट के मद्देनजर लगातार विचार जारी था. लेकिन 26 मार्च को राज्यसभा चुनाव के तहत मतदान और सदन की कार्यवाही रखी गई थी. कुछ महत्वपूर्ण बिल भी रखे जाने थे. लेकिन जैसे ही राज्यसभा चुनाव टाले जाने का ऐलान चुनाव आयोग ने किया उसके बाद यह तय हो गया था विधानसभा का भावी सत्र भी स्थगित होगा. देश की सबसे बड़ी पंचायत में भी सत्र स्थगित किया चुका था. सदन के नेता और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल से चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी ने 26 मार्च को होने वाली कार्यवाही स्थगित कर दी. इस बारे में संपूर्ण विपक्ष और सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने मांग की थी. 

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सदन में सार्थक चर्चा देखने को मिली:
15वीं विधानसभा में 4 सत्र बुलाये गये, रिकॉर्ड 56 बार सदन में बैठकें आयोजित की गई. डॉ सीपी जोशी के नाम इस बार प्रश्नकाल के दौरान सर्वाधिक प्रश्न पूरे किये जाने का रिकॉर्ड भी बनाया. हंगामे की घटनाओं में रिकॉर्ड कमी और सदन में सार्थक चर्चा देखने को मिली. यह जरुर है कि स्पीकर डॉ सीपी जोशी को समय समय पर सख्त रवैया अपनाना पड़ा. 15 वीं विधानसभा शुरु हुई थी 2019 में 15जनवरी से, पहला सत्र चला 15 जनवरी-13फरवरी के बीच, दूसरा सत्र चला 27 जून से 5 अगस्त 2019 तक, तीसरा सत्र चला महज 2 दिन 28 और 29 नव.2019 को, चौथा सत्र 24जनवरी से 13 मार्च के बीच तक चला.
...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

कोरोना बचाव को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार को सराहा, बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में हुई बैठक 

कोरोना बचाव को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार को सराहा, बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में हुई बैठक 

जयपुर: राज्यसभा चुनाव टलने की खबर आने के बीच ही बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई. करीब 70 विधायक बैठक में शामिल हुए. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे नहीं आई. बैठक में कोरोना से बचाव और चुनाव स्थगित किये जाने पर इलेक्शन कमीशन की प्रशंसा की.कोरोना बचाव को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को सराहा. 26 मार्च को राज्यसभा चुनाव तो नहीं हो रहे.लिहाजा विधायकों के साथ कोरोना से बचाव पर संवाद किया गया.

दिया कोरोना जागरुकता का संदेश:
बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कोरोना जागरुकता का संदेश अपने विधायकों को दिया.विधायकों को जांच के बाद ही कार्यालय के अंदर प्रवेश दिया.डॉ एस एस अग्रवाल की अगुवाई में बीजेपी के मेडिकल सेल ने एक एक विधायक की जांच की. सेनिटाइज किये जाने के बाद ही बैठक में भाग लेने की अनुमति दी गई. भीलवाड़ा से आये विधायकों की भी विशेष जांच हुई. विधायक भीलवाड़ा, झुंझुनूं से भी बैठक में भाग लेने पहुंचे थे. 

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चुनाव आयोग का जताया आभार:
राज्यसभा चुनाव में होने वाले मतदान के संदर्भ में बैठक बुलाई गई थी. दूर दराज से कठिनाई सहन करते हुए विधायक पहुंचे भी और फिर चुनाव ही आगे खिसक गये. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी सतीश ओर संगठन महामंत्री चंद्रशेखर मौजूद रहे. राज्यसभा चुनाव स्थगित किये जाने पर चुनाव आयोग का आभार जताया गया. बीजेपी कोर कमेटी के सदस्यों के बीच भी अलग से बैठकों का दौर चला. बीजेपी नेतृत्व ने प्रत्येक विधायक से कोरोना वायरस के फैलाव और बचाव से जुड़ा फीडबैक लिया और उन्हें निर्देश दिये कि अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता के संपर्क में रहे.

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...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट

VIDEO- राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस जारी करेगी विधायकों के लिये व्हिप, अनुशासन बिगड़ते ही सदस्यता समाप्त!

जयपुर: राज्यसभा चुनाव तय समय पर होते है तो कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों के लिये व्हीप जारी करेगी. व्हीप में साफ होगा कि अगर उल्लघंन किया तो सदस्यता रद्द हो जाएगी. अनुशासन बनाये रखना ही व्हीप का असली मकसद होता है. इतिहास गवाह है कि गुजरात में बीते राज्यसभा चुनावों में अहमद पटेल तभी जीते थे जब उन्हीं के पार्टी के 2 विधायकों को जनप्रतिनिधि कानून के दायरे में लाया गया.

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राज्यसभा चुनाव में राजस्थान में 3 सीटों पर चुनाव होने है, चुनावी समर में उम्मीदवार उतरे है 4,दो कांग्रेस के और दो बीजेपी के.. लिहाजा चुनाव बेहद दिलचस्प और रोमांचक हो गये है. सत्ताधारी दल कांग्रेस जीत के प्रति आश्वस्त है लेकिन कोई जोखिम मोल नहीं लेना चाहता.  लिहाजा कांग्रेस विधायक दल की ओर से सभी विधायकों के व्हिप जारी किया जाएगा, इसे मानना विधायकों के लिये अनिवार्य होगा. वैसे तो कांग्रेस विधायक दल के अंदर क्रास वोटिंग की संभावना नजर नहीं आ रही लेकिन राजनीति में कु़छ कहा नहीं जा सकता है. आइये पहले आपको बता देते है व्हिप क्या होता है..

---व्हिप के मायने---
--व्हिप का उल्लंघन दल बदल विरोधी अधिनियम के तहत माना जा सकता है
--उल्लंघन पर सदस्यता रद्द कर दी जा सकती है
--व्हिप 3 तरह के होते हैं
-एक लाइन का व्हिप
 2 लाइन का व्हिप और 3 लाइन का व्हिप.
-इन तीनों व्हिप में 3 लाइन का व्हिप अहम माना जाता है, इसे कठोर कहा जाता है
-इसका इस्तेमाल सदन में अविश्वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस या वोटिंग में किया जाता है.
-यदि किसी सदस्य ने इसका उल्लंघन किया तो उसकी सदस्यता खत्म होने का भी प्रावधान है.
-व्हिप के मुताबिक राज्यसभा चुनाव में ओपन बैले के तहत मतदान प्रक्रिया होती है.
-किसी भी दल के विधायक को उसकी पार्टी के एंजेट को दिखाकर ही मत देना होता है ऐसा नहीं होने पर वोट अमान्य हो सकता है.

Corona Virus Updates: मंगलवार से मोटर साइकिल, प्राइवेट कार, स्टेट हाईवे पर बैन, सीएम गहलोत का बड़ा फैसला 

अदालत के महत्वपूर्ण निर्णय के अनुसार संसदीय परम्पराओं को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये व्हिप का प्रावधान है जिसके तहत क्रास वोटिंग को रोका जा सके और पार्टी के आदेश का विधायक अनुशासित होकर पालन करे, हार्स ट्रैडिंग को प्रोत्साहन नहीं मिले. राजस्थान में कांग्रेस पार्टी ने दो उम्मीदवारों को चुनावी समर में उतारा है के सी वेणुगोपाल और नीरज डांगी........ इन्हें 13 निर्दलीय,2 सीपीएम,2 बीटीपी,1 आरएलडी के वोटों की उम्मीद है. इस गणित के लिहाज से तो कांग्रेस को 3 में से 2 सीटें मिलना तय है. फिर भी सियासत आखिर सियासत ही है. यहां दूध का जला छाछ फूंक फूंक कर पीता है.

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट


 

VIDEO- कोरोना वायरस: ओम माथुर के ठीक पास में बैठे हुए थे दुष्यंत सिंह, किरोड़ी मीणा भी नहीं थे ज्यादा दूर

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जयपुर: बॉलीवुड की मशहूर सिंगर कनिका कपूर के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद सांसद दुष्यंत सिंह भले ही सेल्फ आइसोलेशन में चले गए हैं, मगर इस खबर से राजस्थान के कुछ सांसद और परेशान हो गए है. दरअसल, ओम माथुर दुष्यंत सिंह के ठीक पास में बैठे हुए थे. राष्ट्रपति भवन में अल्पाहार के कार्यक्रम में माथुर दुष्यंत के करीब दिखे थे. ऐसे में अब ओम माथुर समर्थकों में इस बात की चिंता है. अलबत्ता ओम माथुर भी स्वयं की जांच करवाएंगे. वहीं दुष्यंत किरोड़ी लाल मीणा और अर्जुन लाल मीणा से भी ज्यादा दूर नहीं थे. 

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दुष्यंत ने कनिका कपूर के साथ पार्टी अटेंड की थी:
बता दे कि बीजेपी सांसद दुष्यंत सिंह ने कोरोना पीड़ित सिंगर कनिका कपूर के साथ एक पार्टी अटेंड की थी. इसके बाद दुष्यंत सिंह ने कई सांसदों से मुलाकात की थी. यहां तक कि उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मुलाकात की थी. सांसद दुष्यंत सिंह ने और उनकी मां वसुंधरा राजे जिन्होंने रविवार को पार्टी अटेंड की थी खुद को आइसोलेट कर लिया है. अब इसके बाद कई सांसद खुद को सेल्फ क्वॉरेंटाइन कर रहे हैं जो कि पिछले हफ्ते दुष्यंत सिंह से मिले थे. 

 

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भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस्तीफा दे दिया है. सीएम कमलनाथ ने कहा कि मैंने हमेशा विकास में विश्वास रखा. प्रदेश की जनता आज पूछ रही है कि कमलनाथ का क्या कसूर है. मुझे जनता ने पूरे पांच सालों के लिए बहुमत दिया था. प्रदेश के साथ धोखा करने वाले नेताओं के साथ जनता कभी न्याय नहीं करेगी.

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अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनवाया: 
कमलनाथ ने इस दौरान अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनवाया और कहा कि हमने आम लोगों के लिए काम किया, लेकिन ये भाजपा को रास नहीं आया. हमारी सरकार पर किसी तरह का आरोप नहीं लगा, बीजेपी ने किसानों के साथ धोखा किया लेकिन हमें उनके लिए काम नहीं करने दिया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमलनाथ ने कहा कि हमने अपने कार्यकाल में माफियाओं को खत्म करने का काम किया, बीजेपी को यहां सरकार चलाने के लिए 15 साल मिले.

बीजेपी ने 22 विधायकों को बंधक बनाया: 
कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी ने 22 विधायकों को बंधक बनाया और ये पूरा देश बोल रहा है. करोड़ों रुपये खर्च कर खेल खेला जा रहा है. एक महाराज और उनके 22 साथियों के साथ मिलकर साजिश रची. सीएम बोले कि जिसकी सच्चाई थोड़ी समय में सामने आएगी. हमने तीन बार विधानसभा में अपनी बहुमत साबित की. बीजेपी की ओर से जनता के साथ विश्वासघात किया जा रहा है और लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की जा रही है, जनता इन्हें कभी माफ नहीं करेगी.

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कमलनाथ सरकार के पास बहुमत नहीं था:
बता दें कि 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार के पास बहुमत नहीं था और आज शाम को फ्लोर टेस्ट होना था. लेकिन उससे पहले ही कमलनाथ ने इस्तीफे का ऐलान किया.

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