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VIDEO: सियासी नियुक्तियों के लिये तैयार गहलोत सरकार, चुनाव हार चुके चर्चित नेताओं पर गंभीरता से विचार

VIDEO: सियासी नियुक्तियों के लिये तैयार गहलोत सरकार, चुनाव हार चुके चर्चित नेताओं पर गंभीरता से विचार

जयपुर: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की भारत बचाओ रैली के बाद राजस्थान की कांग्रेस की सियासत में तेजी से नये फैसले सामने आ सकते हैं. 25 दिसम्बर तक प्रदेश और जिला स्तर पर सियासी नियुक्तियों को अमलीजामा पहनाया जा सकता है. पंचायत चुनावों की आचार संहिता से पहले यह काम होना है. वहीं सरकार की वर्षगांठ पर सौगातों की बारिश हो सकती है. बड़ी खबर यह मिल रही है कि चुनाव हार चुके और विधायकों को भी सियासी नियुक्ति से नवाजा जा सकता है. खास रिपोर्ट:

दिल्ली की कांग्रेस रैली की सफलता से आलाकमान उत्साहित:
दिल्ली की कांग्रेस रैली की सफलता से आलाकमान ही उत्साहित नहीं है, बल्कि राज्य की कांग्रेस भी जोश पर सवार है. कारण साफ है रैली को सफल बनाने में राजस्थान की कांग्रेस का योगदान जोरदार रहा है. राजस्थान ने संख्याबल में हरियाणा और दिल्ली को कड़ी टक्कर दी. रैली की सफलता के बाद कांग्रेसियों की नजरें टिकी है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर. रैली को सफल बनाने में योगदान देने वाले कांग्रेसियों को किस सियासी नियुक्ति से नवाजा जाता है, इसका बेसब्री से इंतजार है. बड़ी सियासी नियुक्तियां तो कम ही होगी लेकिन जिला स्तर पर सैंकड़ो की तादाद में नियुक्तियां की जानी है. जिला कांग्रेस कमेटी से नाम मांगे गये थे वो काम पूरा हो चुका है. कांग्रेस विधायकों को इसमें तवज्जो दिये जाने के आसार है. कैसे अशोक गहलोत इस कार्य को करेंगे, यह खास रहने वाला है. सीएम को उनकी 1 साल की वर्षगांठ का शायद इंतजार था. 

अशोक गहलोत किस तरह करेंगे नियुक्तियां ! 
—उन्हें नियुक्तियां देंगे जो समर्पित कार्यकर्ता रहे है 
—जिनकी कांग्रेस पार्टी के प्रति निष्ठा रही है 
—गुटबाजी से परे जिन्होंने कांग्रेस की सच्ची सेवा की
—पुराने और कर्मठ युवा चेहरों को प्राथमिकता मिलेगी
—चुनावों में सफलतापूर्वक टास्क निभाने वाले चेहरों को वरियता मिलेगी
—जिन्हें चुनावों में टिकट नहीं मिला था उन चेहरों को पुरस्कार मिल सकता है 

किसान आयोग, सूचना आयोग, उपभोक्ता आयोग, हाउसिंग बोर्ड, आर टी डी सी, बीज निगम, एससी आयोग, एस टी आयोग, महिला आयोग, हज हाउस, देवनारायण बोर्ड, खादी आयोग, देवस्थान बोर्ड, खादी बोर्ड, अधिनस्थ सेवा चयन बोर्ड, सिंधी अकादमी, केशकला बोर्ड, हिन्दी अकादमी, यूथ बोर्ड, क्रीडा परिषद, परशुराम बोर्ड, माटी कला बोर्ड समेत विभिन्न यू आ टी में नियुक्तियां होनी है. इनमें खासतौर पर आयोगों में जिला स्तर पर नियुक्तियां होनी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है उन चेहरों को चांस मिलेगा जिन्हें चुनाव में पराजय मिली थी.

सियासी नियुक्तियों के पीछ बड़ा फेक्टर:
—सवाल अभी शेष है कि चुनावों में पराजित नेताओं को क्या नियुक्ति मिलेगी
—लोकसभा चुनाव में 25बड़े चेहरे चुनाव हार गये थे
—इन्होंने मोदी लहर को बड़ा कारण बताया था
—मोदी लहर के तर्क को खारिज भी नहीं किया जा सकता
—पूरे देश में ही बड़े बड़े नेता चुनाव हार गये थे, अमेठी से राहुल गांधी तक परास्त हो गये थे
—विधानसभा चुनाव में कुछ दिग्गज बेहद कम अंतर से चुनाव हार गये थे 
—अविनाश पांडे ने इस मसले पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट से गंभीरता से चर्चा की है
—करीब 1 दर्जन ऐसे नाम है जो चुनाव भले ही हार गये थे लेकिन यह बड़े चेहरे कहे जाते है 
—भंवर जितेंद्र सिंह, नमोनारायण मीना, रघुवीर सिंह मीना, मानवेंद्र सिंह, बद्री जाखड़, सुभाष महरिया, 
—गोपाल सिंह शेखावत, भरतराम मेघवाल, ताराचंद भगौरा, ज्योति खंडेलवाल ऐसे ही चर्चित नाम है जो लोकसभा चुनाव हार गये थे. 
—कमोबेश यहीं हाल विधानसभा चुनाव हारे कई शीर्ष नेताओं का भी है 
—इनमें प्रमुख है गिरिजा व्यास, घनश्याम तिवाड़ी, सुरेन्द्र जाडावत, 
—राजकुमार रिणवां, सुरेन्द्र गोयल, प्रशांत शर्मा, अर्चना शर्मा सरीखे चर्चित नाम

बसपा विधायकों को सत्ता में भागीदारी की तलाश:
अब बात कर लेते है बसपा के उन विधायकों की जो कांग्रेस में आ चुके है, लेकिन उन्हें तलाश है सत्ता में भागीदारी की. चर्चा ये है कि इनमें से कुछ को बोर्ड और आयोग में पद दिया जा सकता है. जोगेंद्र सिंह अवाना को देवनारायण अथवा डांग विकास बोर्ड, वाजिब अली को मेवात विकास बोर्ड का चैयरमैन बनाया जा सकता है इस तरह की अटकलें है. कांग्रेस को समर्थन कर रहे निर्दलीय विधायकों को भी तरजीह मिल सकती है. नये साल के आगमन से पहले सियासी नियुक्तियां चाह रहे नेताओं के चेहरे पर कितनी मुस्कान खिलेगी यह तो सियासी जादूगर के फैसलों पर निर्भर करेगा, किस तरह 8सिविल लाइंस और पीसीसी के बीच समन्वय आधारित फैसले होंगे. 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

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Bihar Election 2020: बिहार में तीन चरणों में होंगे विधानसभा चुनाव, 10 नवंबर को आएंगे नतीजे

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नई दिल्ली: चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. बिहार की 243 विधानसभा सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान होगा. पहले चरण में 71 सीटों पर 28 अक्टूबर को तो दूसरे चरण में 94 सीटों के लिए 3 नवंर को मतदान होगा. वहीं तीसरे चरण में 78 सीटों पर पर 7 नवंबर को मतदान होगा. उसके बाद 10 नवंबर को बिहार चुनाव के नतीजे आएंगे.

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोरोना संकट की वजह से दुनिया के 70 देशों में चुनावों को टाल दिया गया. कोरोना संकट के बीच बिहार और उपचुनावों को लेकर लगातार मंथन किया गया. बिहार चुनाव देश के सबसे बड़े राज्यों में है और ये चुनाव कोरोना काल का सबसे बड़ा चुनाव है. राज्य में 29 नवंबर तक विधानसभा का कार्यकाल है. 

इस बार एक बूथ पर सिर्फ एक हजार ही मतदाता होंगे: 
इस बार एक बूथ पर सिर्फ एक हजार ही मतदाता होंगे. इस बार चुनाव में 6 लाख पीपीई किट राज्य चुनाव आयोग को दी जाएंगी, 46 लाख मास्क का इस्तेमाल भी होगा. सात लाख हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जाएगा, साथ ही 6 लाख फेस शील्ड को उपयोग में लाया जाएगा. इस बार पोलिंग स्टेशन की संख्या और मैनपावर को बढ़ाया गया है. बिहार में 2020 के चुनाव में सात करोड़ से अधिक वोटर मतदान करेंगे. इस बार वोट डालने के लिए एक घंटा अधिक वक्त रखा गया है, सुबह सात से शाम 6 बजे तक मतदान होगा. लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ऐसा नहीं होगा. मतदान के अंतिम समय में कोरोना पीड़ित अपना वोट डाल सकेंगे, जिनके लिए अलग व्यवस्था होगी.

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चुनाव टाले जाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार:
इससे पहले आज सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में विधानसभा चुनाव टाले जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया है. याचिकाकर्ता ने राज्य में कोरोना के चलते बिगड़े हालात का हवाला दिया था. कोर्ट ने कहा कि हम पहले ही साफ कर चुके है कि चुनाव आयोग हालात के मुताबिक सभी चीजों को ध्यान में रखकर फैसला लेने में समर्थ है.

243 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होगा: 
बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होगा. 2015 में राजद और जदयू ने मिलकर चुनाव लड़ा था. जिसके कारण बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को हार का सामना करना पड़ा था. तब राजद, जदयू, कांग्रेस महागठबंधन ने 178 सीटों पर बंपर जीत हासिल की थी. राजद को 80, जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं थीं. जबकि एनडीए को 58 सीटें हीं मिली. हालांकि लालू यादव की पार्टी राजद के साथ खटपट होने के बाद नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार चलाना शुरू किया.


 

पीएम मोदी बोले- आजादी के कई साल बाद तक किसानों के नाम पर कई नारे लगे, लेकिन उनके नारे खोखले थे

पीएम मोदी बोले- आजादी के कई साल बाद तक किसानों के नाम पर कई नारे लगे, लेकिन उनके नारे खोखले थे

नई दिल्ली: भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 104वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. इस कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे. पीएम मोदी ने कहा कि आज जब देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक-एक देशवासी अथक परिश्रम कर रहा है तब गरीबों को, दलितों, वंचितों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, आदिवासी, मजदूरों को उनका हक देने का बहुत ऐतिहासिक काम हुआ है.

लोगों के जीवन में सरकार जितना कम दखल देगी, उतना बेहतर होगा: 
वहीं कृषि बिल पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीते दिनों में हमारी सरकार ने युवा और किसानों के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए हैं. पीएम बोले कि लोगों के जीवन में सरकार जितना कम दखल देगी, उतना बेहतर होगा. आजादी के कई साल बाद तक किसानों के नाम पर कई नारे लगे, लेकिन उनके नारे खोखले थे. उन्होंने कहा कि कृषि बिल से छोटे किसानों को सबसे अधिक फायदा होगा. पीएम ने कहा कि अब किसान की मर्जी है कि वो कहीं पर भी फसल बेचे, जहां पर किसान को अधिक दाम मिलेगा वो वहां बेच सकेगा. बीजेपी के कार्यकर्ताओं को आसान भाषा में किसानों को समझाना होगा. 

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फेसलेस टैक्स सिस्टम कुछ महीने पहले ही टैक्स रिजीम का हिस्सा हो चुका:
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज से ही देश के ईमानदार करदाताओं के हितों को सुरक्षा देने वाला, फेसलेस अपील का प्रावधान, भारत की टैक्स व्यवस्था से जुड़ने वाला है.  ईमानदार करदाताओं को परेशानी ना हो, इसके लिए फेसलेस टैक्स सिस्टम कुछ महीने पहले ही टैक्स रिजीम का हिस्सा हो चुका है.  

दीनदयाल जी का योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करने वाला:
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में, एक समाज के रूप में, भारत को बेहतर बनाने के लिए दीनदयाल जी ने जो योगदान दिया है, वो पीढ़ियों को प्रेरित करने वाला है. ये दीनदयाल जी ही थे जिन्होंने भारत की राष्ट्रनीति, अर्थनीति और समाजनीति, इन तीनों को भारत के अथाह सामर्थ्य के हिसाब से तय करने की बात मुखरता से कही थी, लिखी थी. 

किसान अध्यादेश के विरोध में कांगेस पार्टी आज करेगी देशव्यापी प्रेस कॉन्फ्रेंस, सभी बड़े नेता लेंगे हिस्सा

किसान अध्यादेश के विरोध में कांगेस पार्टी आज करेगी देशव्यापी प्रेस कॉन्फ्रेंस, सभी बड़े नेता लेंगे हिस्सा

जयपुर: किसान अध्यादेश के विरोध में कांग्रेस पार्टी आज देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी. आज सभी राज्यों की राजधानी में कृषि बिल मुद्दे पर कांग्रेस के बड़े नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. इसी के चलते आज राजस्थान में भी शाम 5 बजे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश प्रभारी अजय माकन VC के जरिये प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. इस दौरान पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा भी मौजूद रहेंगे. सीएम गहलोत और पीसीसी चीफ डोटासरा जयपुर से जुड़ेंगे तो वहीं दिल्ली से VC के जरिये प्रदेश प्रभारी अजय माकन रूबरू होंगे. 

28 सितंबर को PCC से राजभवन तक पैदल मार्च:  
इसके साथ ही कांग्रेस 28 सितंबर को PCC से राजभवन तक पैदल मार्च भी करेगी. हालांकि धारा-144 के मद्देनजर कार्यक्रम में बदलाव भी हो सकता है. पैदल मार्च के बाद राज्यपाल को ज्ञापन दिया जाएगा. 

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2 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस मनाएगी 'किसान मजदूर दिवस:
वहीं, 2 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस किसान मजदूर दिवस मनाएगी. 2 अक्टूबर को विधानसभा क्षेत्रों और जिला मुख्यालयों पर कृषि विधेयकों के खिलाफ धरने प्रदर्शन भी होंगे. 10 अक्टूबर को जयपुर सहित अन्य जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस किसान सम्मेलन आयोजित करेगी. 

पंजाब और हरियाणा में किसान इन बिलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे: 
गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा में किसान इन बिलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इन राज्यों में कांग्रेस ने पहले ही मोर्चा खोला हुआ है. कांग्रेस का आरोप है कि इन बिलों के जरिए मोदी सरकार किसानों को कॉरपोरेट के चंगुल में फंसा रही है. इससे मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा.


 

निर्वाचित सरपंच की आयु 15 साल से कम होने पर राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती, कोर्ट ने कहा- क्यों ना निर्वाचन निरस्त किया जाए

निर्वाचित सरपंच की आयु 15 साल से कम होने पर राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती, कोर्ट ने कहा- क्यों ना निर्वाचन निरस्त किया जाए

जयपुर: धौलपुर की पिपरौन ग्राम पंचायत की निर्वाचित सरपंच की उम्र 14 साल ही है. हाल ही में स्थानीय निवासी भूपेन्द्र कुमार ने आरटीआई के तहत जुटायी दस्तावेजों से ये जानकारी सामने आयी है. जिसके बाद अब भुपेन्द्र कुमार ने सरपंच रेखा देवी के निर्वाचन को राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी है. जस्टिस अशोक गौड़ की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद भरतपुर संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर धौलपुर, निर्वाचित सरपंच रेखा देवी सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. कोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों ना सरपंच का निर्वाचन निरस्त कर दिया जाए. 

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क्या है मामला: 
जनवरी में हुए पंचायत चुनावों में पिपरौन ग्राम पंचायत से रेखादेवी निर्वाचित हुई. स्थानीय निवासी भुपेन्द्र कुमार ने रेखा देवी से संबंधित सरकारी स्कूल से सूचना के अधिकार कानून के तहत सूचना मांगी. आरटीआई के तहत मिले दस्तावेजों में रेखा देवी की जन्म तिथि 20 जून 2005 दर्शायी गयी थी. इन दस्तावेजों के अनुसार चुनाव के समय सरपंच की उम्र करीब 14 साल छह माह ही होती है. याचिका में कहा गया कि रेखादेवी ने अधिकारियों से मिलीभगत कर अपने आप को 21 साल की उम्र का बताकर मतदाता कार्ड हासिल किया और उसके आधार पर सरपंच पद पर नामाकंन पत्र भरा था. इसी वजह से रेखा देवी के सरपंच पद पर निर्वाचन को रद्द करने के साथ कार्रवाई होनी चाहिए.  

पायलट समर्थक विधायकों की याचिका खारिज करने को लेकर प्रार्थना पत्र

पायलट समर्थक विधायकों की याचिका खारिज करने को लेकर प्रार्थना पत्र

जयपुर: कांग्रेस की अंदरूनी कलह के चलते बागी हुए विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा जारी किये गये नोटिस को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी थी. अब दोनों ही गुटों के बीच राजनैतिक समझौता होने का आधार बताते हुए पायलट समर्थक विधायकों की याचिकाओं को भारी जुर्माने के साथ खारिज करने की मांग की गयी है. 

याचिका पर अब सुनवाई का कोई उद्देश्य नहीं रहा:  
याचिका में आम व्यक्ति के रूप में पक्षकार बने मोहनलाल नामा ने राजस्थान हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर याचिका खारिज करने की गुहार लगायी है. प्रार्थना पत्र में कहा गया कि अब दोनों गुटों के बीच राजनीतिक समझौता हो गया है. विधानसभा का सत्र भी आहुत हो चुका है और दोनों पक्षों ने एक साथ कार्रवाई में हिस्सा लिया है. ऐसे में याचिका पर अब सुनवाई का कोई उद्देश्य नहीं रहा है. प्रार्थना पत्र में पायलट समर्थक विधायकों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग करते हुए याचिका को खारिज करने की गुहार की गयी है.

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19 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस को चुनौती दी थी:
गौरतलब है कि हाईकोर्ट में सचिन पायलट सहित ग्रुप के 19 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस को चुनौती दी थी. विधायक पीआर मीना एवं अन्य की इस याचिका पर हाईकोर्ट में कई दिनों तक सुनवाई करने के बाद 24 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस की पालना पर यथास्थिति के आदेश दिए थे. कोर्ट ने 13 कानूनी बिंदूओं पर विचार करते हुए तीन बिंदूओं सुनवाई का फैसला किया था. कोर्ट ने सभी पक्षों को कागजी कार्रवाई होने के बाद जल्द सुनवाई के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल करने की छूट दी थी. इसी मामले में पांच नंबर के पक्षकार मोहनलाल नामा ने बुधवार को हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर किया है. 

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

अमृतसर: केंद्र सरकार के द्वारा पारित किए गए कृषि बिलों के खिलाफ नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने अमृतसर में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. इस दौरान उनके साथ सैकड़ों की भीड़ में समर्थक भी दिखाई दिए. इस दौरान पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान बिल से जमाखोरी को बढ़ावा मिलेगा. क्या सरकार रोटी को आवश्यक वस्तु नहीं मानती है? 

सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे:  
इस दौरान सिद्धू ट्रैक्टर पर सवार दिखे. साथ ही किसानों के हाथ में तख्तियां थीं और कुछ ने काले झंडे भी लिए हुए थे. सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे हैं. नवजोत सिंह सिद्धू पिछले काफी लंबे वक्त के बाद किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं. उनका पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के साथ रिश्ता सही नहीं रहा है, ऐसे में यही वजह है कि पंजाब की पॉलिटिक्स में कम एक्टिव हैं.  हालांकि, कोरोना संकट के दौरान भी वो लगातार सोशल मीडिया पर अपने वीडियो डाल मुद्दों पर बात रखते रहे. 

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पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ:
बता दें कि पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ है. इससे पहले शिरोमणी अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को विश्वास में लेने में कामयाब नहीं हुई. हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से लगातार इस बिल को लेकर विपक्ष पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है. और किसानों को विपक्ष की बातों में ना आने की सलाह दी जा रही है. 


 

संसद में विपक्षी नेताओं के व्यवहार पर मायावती ने जताई नाराजगी, कहा - यह लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला

संसद में विपक्षी नेताओं के व्यवहार पर मायावती ने जताई नाराजगी, कहा - यह लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने पिछले दिनों किसान बिल पारित होने के दौरान संसद खासकर राज्यसभा में विपक्षी नेताओं के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई है. मायावती ने ट्वीट करते हुए लिखा कि वैसे तो संसद लोकतंत्र का मंदिर ही कहलाता है फिर भी इसकी मर्यादा अनेकों बार तार-तार हुई है. वर्तमान संसद सत्र के दौरान भी सदन में सरकार की कार्यशैली व विपक्ष का जो व्यवहार देखने को मिला है वह संसद की मर्यादा, संविधान की गरिमा व लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला है. अति-दुःखद.

विपक्षी सांसदों ने काफी हंगामा खड़ा किया था: 
गौरतलब है कि रविवार को राज्यसभा में किसान बिल पारित कराने के दौरान विपक्षी सांसदों ने काफी हंगामा खड़ा किया था. टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने तो उप सभापति के आसान के पास जाकर रूल बुक तक फाड़ दी थी. 

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मंगलवार को सरकार ने सात विधेयक उच्च सदन से पास करा लिए:
रविवार की घटना के बाद हालांकि मंगलवार को सरकार ने सात विधेयक उच्च सदन से पास करा लिए. इस पर विपक्ष ने अपनी मांगे नहीं मानने पर संयुक्त रूप से सत्र का बहिष्कार किया. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि जब तक हमारे सांसदों के बहिष्कार को वापस नहीं लिया जाता और किसान के विधेयकों से संबंधित हमारी मांगों को नहीं माना जाता, विपक्ष सत्र का बहिष्कार करेगा. 
 

किसान अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस का चौतरफा विरोध, 24 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में होगी प्रेसवार्ता

जयपुर: किसान अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस का चौतरफा विरोध सामने आ रहा है. 24 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेसवार्ता होगी. प्रदेश प्रभारी अजय माकन ,पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा मौजूद रहेंगे. 28 सितंबर को पीसीसी से राजभवन तक पैदल मार्च तक पैदल मार्च बताया जा रहा. हालांकि धारा 144 के मद्देनजर कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है. 

2 अक्टूबर को मनाएगी प्रदेश कांग्रेस किसान मजदूर दिवस:
पैदल मार्च के बाद राज्यपाल को ज्ञापन दिया जाएगा. 2 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस किसान मजदूर दिवस मनाएगी. इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की है जयंती.  2 अक्टूबर को ही विस क्षेत्रों पर कृषि विधेयकों के खिलाफ धरने प्रदर्शन होंगे. संभव है 10 अक्टूबर को जयपुर सहित अन्य जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस किसान सम्मेलन आयोजित करेेंगे. सोमवार को भी कृषि विधेयकों के खिलाफ कांग्रेस ने  प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर्स को ज्ञापन सौंपे थे,सोशल डिस्टेंसिंग सहित गाइड लाइन की पालना होगी. 

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कृषि अध्यादेशों को लेकर विरोध प्रदर्शन:
कृषि अध्यादेशों को लेकर एक पखवाड़े तक विरोध प्रदर्शन के निर्णय के पीछे किसान वोट बैंक है. प्रदेश की बात करें तो यहां वर्तमान में चल रहे ग्राम पंचायतों के साथ ही आगामी समय में पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव भी हैं ऐसे में इस मुद्दों के जरिए कांग्रेस किसान वर्ग की सहानुभूति बंटोरकर उन्हें अपने पाले में लाना चाहती है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट