भारी बर्फबारी से उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटा, BRO का एक कैंप चपेट में आया; सेना ने 291 को बचाया

भारी बर्फबारी से उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटा, BRO का एक कैंप चपेट में आया; सेना ने 291 को बचाया

भारी बर्फबारी से उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटा, BRO का एक कैंप चपेट में आया; सेना ने 291 को बचाया

चमोली:  उत्तराखंड के चमोली जिले में भारी बर्फबारी के कारण ग्लेशियर टूट गया है.  इसके बाद पूरे इलाके में अलर्ट कर दिया गया है. वहीं अच्छी खबर यह है कि भारत चीन सीमा से जुड़े इस इलाके में सेना ने अब तक 291 लोगों को बचा लिया है. इनमें अधिकांश BRO (Border Road Organization) के कर्मचारी हैं. ये सभी चीन से सटी सुमना सीमा पर सड़क का निर्माण कर रहे थे.

सेना ने तत्काल रहत कार्य किया शुरू,  ऋषिगंगा नदी में खतरा बरकरार: 
पहले खबर थी कि BRO का एक कैम्प चपेट में आया है. सेना ने तत्काल वहां फंसे लोगों को बचा लिया. इसके बाद देर रात सूचना मिली की एक और कैम्प बर्फीले तूफान (Icy Storm) की चपेट में आया है. अच्छी खबर यह है कि सभी लोगों को सेना ने बचा लिया है. इस बीच जोशीमठ (Joshi Math) से बहने वाली ऋषिगंगा नदी (Rishiganga River) में खतरा बना हुआ है. मौसम विभाग ने दो दिन में मौसम साफ होने की बात कही है, जिसके बाद ही नुकसान का सही आंकलन हो सकेगा.   सड़क से बर्फ हटाने का काम चल रहा है.

In other rescue operations undertaken till 1.30 AM, 90 more BRO personnel have been rescued. 291 persons brought to safety so far. Rescue operations temporarily halted at night due to weather conditions. Search for other stranded BRO persons will resume in the morning.@adgpi

— SuryaCommand_IA (@suryacommand) April 24, 2021


दो शव बरामद, 291 लोगों को सुरक्षित बचाया:
उत्तराखंड में चमोली जनपद के जोशीमठ में ग्लेशियर टूटने के बाद सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operation) जारी है. ग्लेशियर टूटकर मलारी-सुमना सड़क पर गिर गया था. इस सड़क पर कंस्ट्रक्शन (Construction) का काम चल रहा था.  सेना के मुताबिक, अब तक दो शव बरामद किए जा चुके हैं और 291 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है. सेना की सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ये लोग जोशीमठ के सुमना इलाके में बने बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) के कैंप में थे. 

मौसम ख़राब होने के कारण रोका गया था रेस्क्यू ऑपरेशन:
गलेशियर के टूटने की सुचना पर सेना ने तुरंत रहत कार्य शुरू कर दिया था, किन्तु खराब मौसम के चलते रात में रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया गया था. अब सुबह होते ही इसे फिर से शुरू कर दिया गया है. इस बीच, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 28 घंटे में चमोली में तेज बारिश (Heavy Rain) के साथ आंधी आ सकती है. इस दौरान यहां न्यूनतम तापमान (Minimum Temperature) 6 डिग्री और अधिकतम 14 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. मौसम विभाग ने 26 अप्रैल से आसमान साफ रहने का अनुमान लगाया है.

जिस वक्त ग्लेश्यिर टूटा, मजदूर कर रहे थे काम:
BRO के कमांडर कर्नल मनीष कपिल (Commander Colonel Manish Kapil) ने दी है. उन्होंने कहा कि यहां सड़क निर्माण का काम चल रहा था, लेकिन हादसे में काम कर रहे मजदूरों को नुकसान नहीं पहुंचा है. ग्लेशियर टूटने का कारण भारी बर्फबारी को माना जा रहा है. हादसे की वजह से जोशीमठ-मलारी हाईवे भी बर्फ से ढक गया है.

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने जारी किया अलर्ट, NTPC समेत सभी कंस्ट्रक्शन के काम रोके गए:
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा है कि नीती घाटी के सुमना में ग्लेशियर टूटने की सूचना मिली है. इस संबंध में मैंने एलर्ट जारी कर दिया है. मैं निरंतर जिला प्रशासन और बीआरओ के सम्पर्क में हूं.  जिला प्रशासन को मामले की पूरी जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दे दिए हैं. एनटीपीसी (National Thermal Power Corporation Limited) एवं अन्य परियोजनाओं में रात के समय काम रोकने के आदेश दे दिए हैं, ताकि कोई अप्रिय घटना ना होने पाये।

माननीय गृह मंत्री श्री @AmitShah जी ने नीति घाटी के सुमना में ग्लेशियर टूटने की सूचना का तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड को पूरी मदद देने का आश्वासन दिया है और आईटीबीपी को सतर्क रहने के निर्देश दिये है।

— Tirath Singh Rawat (@TIRATHSRAWAT) April 23, 2021


2021 में ये दूसरी बड़ी तबाही:
इससे पहले उत्तराखंड में 7 फरवरी 2021 की सुबह साढ़े 10 बजे चमोली जिले के तपोवन में ग्लेशियर टूटकर ऋषिगंगा नदी में गिरा था.  हादसे के बाद 50 से ज्यादा लोगों की लाश मिली थी, जबकि 150 से ऊपर लोग ऐसे थे, जिनका हादसे के बाद कोई पता नहीं चल पाया था.  प्रशासन ने कुछ दिन तक चली खोजबीन के बाद इन्हें भी मृत मान लिया था. नदी में ग्लेशियर गिरने से धौलीगंगा (Dholiganga) पर बन रहा एक बांध बह गया था. तपोवन में एक प्राइवेट पावर कंपनी के ऋषिगंगा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट (Rishiganga Hydro Power Project) और सरकारी कंपनी NTPC के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था. आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान यहीं हुआ था.

चीन सीमा तक पहुंचाने वाला पुल टूटा था
देवभूमि उत्तराखंड में करीब साढ़े सात साल बाद कुदरती कहर दिखा था. चमोली जिले की कुल आबादी 3.90 लाख है.  हरा-भरा और पहाड़ों का खूबसूरत नजारा (Beautiful View) इसकी पहचान है, लेकिन उस हादसे ने सबको झकझोर दिया था. तबाही रैणी गांव के पास शुरू हुई थी. यहां से ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट को तबाह करने के बाद सैलाब आगे बढ़ा और भारत-चीन को जोड़ने वाला ब्रिज बहा ले गया. ये ब्रिज एकमात्र जरिया था, जिससे हमारे सैनिक चीन बॉर्डर (China Border) पर पहुंचते थे. ब्रिज टूटने से आस-पास के 12 गांवों से कनेक्शन भी टूट गया था.

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